रेलवे में नौकरी के नाम पर किया सात लाख का सौदा, दो लाख ठगे
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खुद को सचिवालय में समीक्षा अधिकारी बताने वाले जालसाज राज सिंह ने इलाहाबाद के फोटोग्राफर राजेश दीक्षित से दोस्ती बनाई। उसके भाई वेद प्रकाश दीक्षित से रेलवे में टीसी की नौकरी का सात लाख में सौदा किया।
दो लाख रुपये व शैक्षिक प्रमाणपत्र लेकर आए युवक को चारबाग से कार में बैठाकर डीआरएम ऑफिस में बैठाया और खुद महिला मित्र के साथ रकम लेकर चंपत हो गया। कई घंटे इंतजार के बाद युवक ने तलाश शुरू की और हजरतगंज कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
पुलिस के मुताबिक, इलाहाबाद के नैनी थाने के गांव नंदन तालाब अरैली निवासी वेद प्रकाश दीक्षित ने राज सिंह पटेल समेत तीन लोगों पर रेलवे में टीसी की नौकरी का झांसा देकर दो लाख रुपये और शैक्षिक प्रमाणपत्र लेकर चंपत हो जाने का केस दर्ज कराया है।
वेदप्रकाश का कहना है कि उसके भाई राजेश दीक्षित का इलाहाबाद में फोटोस्टूडियो है। खुद को सचिवालय का समीक्षा अधिकारी बताने वाला राज सिंह अक्सर फोटो खिंचाने जाता था। इस दौरान उसने राजेश से दोस्ती बना ली। राजेश ने उससे अपने भाई वेदप्रकाश के बेरोजगार होने की जानकारी दी।
आरोप है कि राज सिंह ने 25 दिसंबर को वेदप्रकाश को कॉल करके बताया कि एमआर कोटे से रेलवे में टीसी की नौकरी है। सात लाख रुपये का इंतजाम करके 27 दिसंबर की सुबह नौ बजे हजरतगंज में उत्तर रेलवे के डीआरएम ऑफिस पहुंचना होगा।
महिला मित्र के साथ रकम लेकर चंपत
मोटी रकम का इंतजाम करने में असमर्थता जताने पर कहा कि जितना रुपया हो सके लेकर आ जाओ, बाकी बाद में दे देना। वेदप्रकाश अपने भाई राजेश के साथ दो लाख रुपये, शैक्षिक प्रमाणपत्र आदि लेकर चारबाग पहुंचा।
राज सिंह अपने साथी अनिल फिंच व एक लड़का-लड़की और ड्राइवर के साथ गाड़ी लेकर चारबाग में मिला। दोनों भाइयों को गाड़ी में बैठाकर डीआरएम ऑफिस ले गया, जहां नौकरी का फर्जी अनुमतिपत्र देते हुए दो लाख रुपये, शैक्षिक प्रमाणपत्र, आधार कार्ड लिए।
गाड़ी में बैठी लड़की को उल्टी आने का बहाना करते हुए कहा कि बाकी काम अनिल फिंच करा देंगे। अनिल ने दोनों भाइयों को डीआरएम ऑफिस के बाहर बैठाया और खुद नियुक्ति पत्र दिलाने की बात कहकर दफ्तर में चला गया।
रात आठ बजे तक अनिल के न लौटने से परेशान दोनों भाइयों ने उसे तलाशना शुरू किया। इस बीच राज सिंह ने वेदप्रकाश को कॉल करके जानकारी दी कि काम हो गया है लेकिन अधिकारी के न होने की वजह से नियुक्तिपत्र 31 दिसंबर को मिलेगा।
वेदप्रकाश ने उसकी गाड़ी में कपडे़, खर्च के रुपये व अन्य सामान से भरा बैग रखा होने की जानकारी देते हुए उसे लौटाने को कहा। इस पर राज सिंह ने फोन बंद कर लिया।
दोनों भाई किसी तरह इलाहाबाद लौटे और 31 दिसंबर को डीआरएम ऑफिस पहुंचकर पता लगाया। राज सिंह व अनिल फिंच का कुछ पता न चलने पर उन्होंने छानबीन शुरू की। ठगी का पता चलने पर हजरतगंज कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई।