अंधा कानून!: मूक-बधिर को अगवा कर मारने के आरोप में तीन जेल गए; चार साल बाद वह एनसीआर में जिंदा मिला
समस्तीपुर के रोसड़ा में चार साल पहले लापता हुआ रविशंकर अचानक जिंदा मिल गया। उसकी हत्या की आशंका जताते हुए दर्ज मामले में पुलिस तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी। अब आरोपी पक्ष के लोग ही रविशंकर को नोएडा से खोजकर रोसड़ा थाना लेकर पहुंचे हैं।
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समस्तीपुर जिले के रोसड़ा थाना क्षेत्र स्थित लालापुर गांव निवासी जिस युवक के चार साल पहले अपहरण के बाद परिजनों ने उसकी हत्या की आशंका जताई थी, वह अचानक जिंदा मिल गया। जिस मामले में नामजद तीन आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी, उसी मामले में रविवार शाम आरोपी पक्ष के लोग युवक को लेकर रोसड़ा थाना पहुंच गए। युवक के थाने पहुंचते ही पुलिसकर्मियों के साथ वहां मौजूद लोगों में भी कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
मामला रोसड़ा थाना कांड संख्या-259/22 से जुड़ा है। लालापुर निवासी मदन यादव ने वर्ष 2022 में अपने 20 वर्षीय पुत्र रविशंकर के लापता होने की शिकायत पुलिस से की थी। प्राथमिकी में तीन लोगों को नामजद करते हुए पुत्र का अपहरण कर उसकी हत्या कर दिए जाने की आशंका जताई गई थी। रविशंकर मूक-बधिर है और बोलने में असमर्थ है। युवक के अचानक गायब होने के बाद परिजनों की चिंता बढ़ती गई और पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
चार साल तक नहीं मिला कोई सुराग
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने युवक की तलाश की, लेकिन लंबे समय तक उसका कोई पता नहीं चल सका। जांच के दौरान नामजद तीनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। युवक का कोई सुराग नहीं मिलने के कारण परिजनों की आशंका और मजबूत होती गई कि उसके साथ कोई अनहोनी हो गई है।
इधर, रविवार को अचानक मामले ने पूरी तरह नया मोड़ ले लिया। आरोपी पक्ष के लोग ही रविशंकर को लेकर रोसड़ा थाना पहुंच गए। उनके साथ युवक को देखकर पुलिस भी हैरान रह गई। चार साल से जिस युवक की हत्या की आशंका जताई जा रही थी, वह सकुशल सामने था।
आरोपी पक्ष ने नोएडा से खोजकर युवक को लाया
आरोपी पक्ष के लोगों का कहना है कि वे पिछले करीब चार वर्षों से रविशंकर की तलाश कर रहे थे। इसी क्रम में उन्हें जानकारी मिली कि रविशंकर नोएडा में रह रहा है। सूचना मिलने के बाद वे लोग नोएडा पहुंचे और वहां से रविशंकर को अपने साथ लेकर रोसड़ा आए।
हालांकि, युवक चार साल तक कहां रहा, नोएडा में किसके साथ रह रहा था, वहां कैसे पहुंचा और इतने लंबे समय तक परिवार या पुलिस से उसका संपर्क क्यों नहीं हुआ—इन सवालों के जवाब अभी स्पष्ट नहीं हैं। पुलिस अब युवक के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इन सभी बिंदुओं की जांच करेगी।
मूक-बधिर होने के कारण जांच और बयान महत्वपूर्ण
रविशंकर बोलने में असमर्थ है। ऐसे में उसके साथ चार वर्षों के दौरान क्या हुआ, वह किन परिस्थितियों में नोएडा पहुंचा और क्या वह अपनी इच्छा से वहां रह रहा था, यह पुलिस जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। पुलिस उसके बयान के लिए न्यायालय की प्रक्रिया अपनाएगी।
थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर लालबाबू कुमार ने बताया कि बरामद युवक का न्यायालय में बयान कराया जाएगा। न्यायालय के आदेश और युवक के बयान के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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अब चार साल पुराने मुकदमे की जांच की दिशा बदलेगी
रविशंकर के जिंदा मिलने से चार साल पुराने अपहरण मामले की पूरी जांच की दिशा बदल गई है। जिस मामले में हत्या की आशंका जताई गई थी और तीन लोगों को जेल तक जाना पड़ा, अब पुलिस को यह पता लगाना होगा कि युवक वास्तव में किन परिस्थितियों में घर से गया था और इतने वर्षों तक कहां रहा।
पुलिस यह भी जांच करेगी कि युवक के गायब होने के पीछे किसी व्यक्ति की भूमिका थी या वह स्वयं किसी कारण से घर से दूर चला गया था। साथ ही, नामजद आरोपियों के खिलाफ अब तक हुई कार्रवाई और उनके विरुद्ध जुटाए गए साक्ष्यों की भी समीक्षा की जाएगी।
चार साल से जिस युवक को परिजन मृत समझने की आशंका में जी रहे थे, उसके अचानक जिंदा सामने आने से न सिर्फ परिवार, बल्कि पुलिस की जांच भी नए मोड़ पर पहुंच गई है। अब रविशंकर का न्यायालय में दर्ज होने वाला बयान ही इस रहस्य की सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है।