चूहों को मारने के लिए रेलवे ने दी साढ़े सात लाख की 'सुपारी'
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उत्तर रेलवे का लाखों रुपये डकार चुके चूहों के आतंक से चारबाग रेलवे स्टेशन को मुक्ति दिलाने के लिए रेलवे ने फिर ‘सुपारी’ दी है।
इस बार रेलवे ने चूहे मारने के फिर 7.50 लाख रुपये का टेंडर निकाला है, इसके लिए चार कंपनियों के आवेदन आए हैं। हालांकि, ठेकेदार का नाम अभी फाइनल नहीं हुआ है।
अधिकारियों की मानें तो अकेले चारबाग स्टेशन पर हजारों की तादात में चूहे हैं, जो रेलवे के साथ-साथ यात्रियों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। इसके लिए गत 29 मार्च को टेंडर निकाला गया था।
टेंडर फाइनल होते ही चूहों को मारने का काम शुरू हो जाएगा। ठेकेदार को साल में 25 ट्रीटमेंट देने होंगे, जिसमें मारे जाने वाले चूहों की रिपोर्ट रेलवे को देनी होगी।
उल्लेखनीय है कि स्टेशन पर चूहों के सफाए के लिए पहले भी अभियान चल चुके हैं, लेकिन उनका नतीजा ढाक केतीन पात वाला ही रहा। अधिकारियों की मानें तो अभियान लगातार नहीं चले, जिससे चूहों की आबादी बढ़ती गई।
जहरीला गेहूं भी चट गए थे चूहे
पिछली बार जिस निजी कंपनी को ठेका दिया गया था, उसके कर्मचारियों ने चूहों को मारने के लिए गेहूं के दानों पर जहर की कोटिंग कर बिलों में डाला। लेकिन चूहे एक गेहूं चट कर गए। हालांकि, अधिकारी बताते हैं कि उस दौरान स्टेशन से चूहों का आतंक तकरीबन खत्म हो गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी द्वारा रोजाना करीब 250 चूहे मारे जा रहे थे। जो उम्मीद से काफी कम थे। अधिकारियों को रोजाना दो से ढाई हजार चूहों के मारने की उम्मीद थी, जिस पर संस्था खरी नहीं उतरी।
होटलों व घरों में भाग जाते हैं चूहे
पेस्टीसाइड एक्सपर्ट डॉ. सुनील चंद्र बताते हैं कि स्टेशन पर चूहों ने करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे बिल बना रखे हैं, जो एक ओर रेलवे कॉलोनी में खुलते हैं तो दूसरी ओर चारबाग के होटलों तक उनकी पहुंच है।
जब इन चूहों को मारने के अभियान चलते हैं तो चूहे बिलों से होते हुए होटलों व कॉलोनी में भाग जाते हैं। इसलिए चूहों को मारने के लिए अभियान चौतरफा चलाना पड़ेगा। कॉलोनी, होटलों व स्टेशन पर एक साथ दवाओं का इस्तेमाल करना होगा।
कोच में भी पकड़े गए चूहे
स्टेशन के अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनों में भी चूहे मारने के लिए ठेके हो चुके हैं। सूत्रों की मानें तो कुछ वर्ष पूर्व लखनऊ से गुजरने व यहां से शुरू होने वाली कई ट्रेनों की बोगियों में चूहों के लिए करीब 47 लाख रुपये के ठेके हुए थे, जिस पर काम भी हुआ था।
पहले हुआ खर्च
वर्ष--खर्च
2010--6.48 लाख
2012--7.20 लाख
इस पर रेलवे के सीनियर डीसीएम अजीत कुमार सिन्हा का कहना है कि चूहों को मारने के लिए 7.50 लाख रुपये का टेंडर हुआ है, चार आवेदन आए हैं, इनमें से जल्द ही एक को फाइनल किया जाएगा।