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रेल सुरक्षा के पोर्टल पर कर्मचारी रो रहे हैं अपना दुखड़ा

Fri, 24 Aug 2018 12:50 PM IST
नीरज ‘अम्बुज’ , अमर उजाला, लखनऊ
नीरज ‘अम्बुज’ , अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 24 Aug 2018 12:50 PM IST
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railway employees are complaining on railway portal
- फोटो : डेमो
केस 1: आराम नहीं मिल रहा है। लगातार ड्यूटी कर रहा हूं। छुट्टी के लिए अधिकारी से गुहार लगाता हूं तो भला-बुरा कहकर भगा देते हैं। एक बार बड़े साहब के पास गया तो उन्होंने दोबारा आने पर कार्रवाई की बात कही। कहीं कोई सुनवाई नहीं।
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केस 2: घर में आग लग गई है। सारा सामान जलकर खाक हो गया है। दफ्तर नहीं आ पाऊंगा। लम्बी छुट्टी चाहिए। अधिकारी दे नहीं रहे हैं। इसलिए यहां शिकायत दर्ज करवा रहा हूं। बेटे की शादी से पहले घर की हालत भी ठीक करवानी है।
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केस 3: अरे, साहब गजब हो गया। एसीएम साहब स्टेशन आए थे। रिटायरिंग रूम में लगा एसी खुलवा कर को अपने आवास उठवा ले गए। वे ठंड़ी हवा ले रहे हैं और हम यहां धूप में चमड़ी काली कर रहे हैं। कोई एक्शन लीजिए सर।
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ट्रेनों की सुरक्षा दांव पर

railway employees are complaining on railway portal
ये चंद उदाहरण उन व्यक्तिगत शिकायतों के है। जिन्हें रेलकर्मियों ने रेलवे सिस्टम से जुड़ी शिकायतों के लिए बने पोर्टल (सिम्स) पर दर्ज कराया गया है।

यह इस बात की बानगी है कि किस तरह रेल सुरक्षा का संवेदनशील पहलू भी कर्मचारियों के लिए मजाक बनकर रह गया है और ट्रेनों की सुरक्षा दांव पर लगी है।

ट्रेनों की सुरक्षा व रेल हादसे रोकने के उद्देश्य से  2018 में रेलवे की ओर सेफ्टी इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम(सिम्स) पोर्टल क्रिस द्वारा तैयार करवाया गया।

इसका मूल उद्देश्य यह था कि रेलकर्मी बगैर किसी फॉर्मल चैनल के सेफ्टी से जुड़ी शिकायतों को सीधे दर्ज करवा सकें और गोपनीयता बनाए रखते हुए सीधे आला अधिकारियों को मामले से अवगत करा सकें।

पोर्टल को बंद करने पर विचार

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गोपनीयता बनाए रखते हुए सीधे आला अधिकारियों को मामले से अवगत करा सकें। इससे पहले तय चैनल के तहत ही सेफ्टी की शिकायत दर्ज करवा सकते थे।

सिम्स पर दर्ज शिकायतें सीधे मुख्य संरक्षा अधिकारी(सीएसओ) तक पहुंचती है। जबकि मंडलों में भी निगरानी के लिए व्यवस्था की गई है। लेकिन जागरुकता के अभाव में रेल सुरक्षा से जुड़ी यह व्यवस्था फेल होती नजर आ रही है।

रेलवे कर्मचारी पोर्टल में सेफ्टी से अधिक व्यक्तिगत शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। इसमें छुट्टी से लेकर आपसी झगड़े या अधिकारियों  के भ्रष्टाचार  से जुड़े मामले उठा रहे हैं।

ऐसा तब  है जब रेलकर्मियों की समस्याओं के लिए 'निवारण' व 'सीपीग्राम्स' पोर्टल पहले से बने हैं। सिम्स पर व्यक्तिगत समस्याएं दर्ज करने से असल शिकायतों पर काम करने में दिक्कते आ रही हैं। सूत्रों की मानें तो देश भर में यही समस्या आ रही है, लिहाजा पोर्टल को बंद करने पर विचार किया जा सकता है।

व्यक्तिगत शिकायतें अधिक दर्ज

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रेलवे अधिकारियों के मुताबिक उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे में सेफ्टी पोर्टल सिम्स पर पिछले पांच महीने में सिर्फ 65 शिकायतें ही दर्ज हुई हैं। इनमें भी रेलकर्मियों की व्यक्तिगत समस्याओं से जुड़ी शिकायतों की खासी संख्या है।

हालांकि इसके अतिरिक्त सेफ्टी जुड़ी यानी सिग्नल फेल, सर्किट फेल, रेल फ्रैक्चर और जर्जर बोगियों को लेकर भी शिकायतें भी दर्ज हुई हैं। सिम्स ऐसा सिस्टम है, जिस पर ट्रेन, ट्रैक, स्टेशन आदि की सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों को दर्ज कराने के साथ सुझाव दिए जा सकते हैं।

इसके लिए afety.indianrail.gov.in वेबसाइट पर जाकर वालेंटरी सेफ्टी रिपोर्टिंग कॉलम में अपनी शिकायत बता सकते हैं। शिकायत को गोपनीय रखा जाता है। इसके बाद रिफरेंस नंबर मिलता है, जिससे शिकायत का स्टेटस भी चेक कर सकते हैं। 

सिम्स को सफल बनाने के लिए कॉमर्शियल से लेकर मैकेनिकल विभाग तक में रेलकर्मियों को जागरुक किया जा रहा है। ताकि व्यक्तिगत समस्याओं को पोर्टल पर न डालें और सेफ्टी को मजबूत बनाने में मदद करें। इसके लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है।’ - जगतोष शुक्ल, सीनियर डीसीएम, उत्तर रेलवे
 
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