पहला रेल बजट: मोदी जी, ये तो होना ही था...
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बजट पेश करते समय रेलमंत्री गौड़ा ने भले ही न सोचा हो लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तो पहले से ही इसकी आशंका रही होगी।
उत्तर प्रदेश में सत्तारूए़ सपा ने रेल बजट को प्रदेश के लिए निराशाजनक बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य की उपेक्षा की है।
सपा के अनुसार बजट में आम यात्रियों की उपेक्षा और खास वर्ग की चिंता दिखती है।
सपा का आकलन है कि रेल मंत्री ने एफडीआई और निजी क्षेत्र को तरजीह देकर ट्रेन के सफर और सुविधाओं को महंगा करने की भूमिका तैयार कर दी है।
रेल बजट से आम यात्री निराश
सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि रेल बजट ने यूपी ही नहीं आम यात्रियों को भी निराश किया है। प्रदेश के बहुत बड़े इलाके को ट्रेन की सुविधा से वंचित रखा गया है, जो ठीक नहीं है।
बजट से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार ने अपने संसाधनों पर भरोसा करने के बजाय एफडीआई और निजी क्षेत्र पर अधिक ध्यान दिया है।
रेल परियोजनाओं को पूरा करने और अन्य कार्यों के लिए बाहरी स्रोतों पर भारतीय रेल की निर्भरता भविष्य में रेल सुविधा को और अधिक महंगा एवं दुष्कर बनाएगी।
रेल बजट से गरीब होंगे परेशान
सपा प्रवक्ता ने कहा इटावा से मैनपुरी रेलवे ट्रैक पर कुछ किलोमीटर का ही काम अधूरा छोड़ दिया गया, जबकि एक बड़े भाग पर काम हो चुका है।
मैनपुरी के यात्रियों की असुविधा को देखते हुए इसे तत्काल पूरा करना आवश्यक है। उन्होंने कहा, चुनाव में जनता को सब्जबाग दिखाने वाली भाजपा की केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत रेल बजट से देश और विशेष रूप से उप्र के लोगों को काफी निराशा हुई है।
रेल मंत्रालय सामाजिक दायित्वों की घोर उपेक्षा करके कारोबारी फर्म में तब्दील होने जा रहा है। निश्चित ही इसका असर समाज के गरीब, कमजोर एवं पिछड़े वर्गों पर पड़ेगा।
यह तबका यात्री किराए और भाड़े में बजट पूर्व की गई भारी बढ़ोतरी से पहले ही परेशान है। बजट में कुछ भी ऐसा नहीं है जो उल्लेखनीय हो।