रायबरेली: इस बार राहुल ने गिनाईं सिस्टम की खामियां, कराया मुख्य विपक्षी नेता होने का एहसास, दिए ये संकेत
Rahul Gandhi in Rae Bareli: रायबरेली से जुड़ी 410 करोड़ की परियोजनाओं की जांच कराने का निर्देश देने और महिला हेल्पलाइन पर कॉल करने के सियासी निहितार्थ हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मंगलवार को पूरे रौ में दिखे। बिना सियासी बात किए वह बड़ा सियासी संदेश दे गए। उनका रायबरेली से जुड़ी 410 करोड़ की परियोजनाओं की जांच कराने का निर्देश देने और महिला हेल्पलाइन पर कॉल करने के सियासी निहितार्थ हैं। इसके जरिए उन्होंने सरकारी सिस्टम की न सिर्फ बखिया उधेड़ी बल्कि विपक्ष की भूमिका निभाते हुए ताकत का अहसास भी कराने का प्रयास किया। यह पूरी कवायद किसी न किसी रूप में उनके सियासी जमीं को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।
अमेठी सांसद रहते वक्त आमतौर पर राहुल गांधी प्रशासनिक बैठकों से दूर रहे, लेकिन रायबरेली से सांसद चुने जाने के बाद वह लगातार यहां के लोगों से अपने रिश्तों की डोर मजबूत कर रहे है। युवक की हत्या होने पर मौके पर पहुंचते हैं तो मंगलवार को सिर्फ दिशा की बैठक में हिस्सा लेने आते हैं। न कार्यकर्ताओं के साथ बैठक और न ही उपचुनाव के मद्देनजर कोई जनसभा की।
यह भी उनकी सियासी रणनीति का हिस्सा है। दिशा की बैठक और शहीद चौक व सड़क के उद्घाटन कार्यक्रम में हिस्सा लेकर उन्होंने अपनी जमीं पर उतरने की सियासत को आगे बढाया। यह संदेश देने का प्रयास किया है कि वह जनता से जुड़े छोटे- छोटे कार्यक्रमों में आने के लिए तैयार हैं। उनका महिलाओं के बारे में पूछना और उनसे जुड़ी हेल्पलाइन 181 पर फोन मिलाना, तीन बार कॉल करने के बाद भी कॉल न उठने पर अफसरों को लताड़ लगाना और विभिन्न कार्यों से जुड़़ी 410 करोड़ की 182 परियोजनाओं की गुणवत्ता की जांच कराने का निर्देश देने, उज्जवला के लाभार्थियों की रिपोर्ट तलब करना, मनरेगा के भुगतान की सूची मांगने के भी सियासी निहितार्थ हैं। वे इसके जरिए सरकारी सिस्टम की सिर्फ पोल ही नहीं खोलते हैं बल्कि खुद के चाहने वालों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश है कि वे हर स्तर पर संघर्ष के लिए तैयार हैं।
विपक्ष की ताकत का अहसास कराने का प्रयास
सियासी जानकारों का यह भी कहना है कि राहुल गांधी लगातार खुद को बदल रहे हैं। उत्तर प्रदेश में भले कांग्रेस के सिर्फ दो विधायक और छह सांसद हैं, लेकिन वह अपनी रणनीति के जरिए विपक्ष की भूमिका निभाने को तैयार रहने का भी संदेश दे रहे हैं। मंगलवार को राहुल गांधी की गतिविधियां किसी न किसी रूप में उस सियासी कदम को आगे बढ़ा रही हैं, जिसके जरिए वह कभी कुली तो कभी मोची से भी मिलने से गुरेज नहीं करते हैं। यही वजह है कि रायबरेली से लौटते ही वह सोशल मीडिया पर लिखते हैं कि रायबरेली से मेरा रिश्ता चाहे जितना भी पुराना हो, हर बार पहुंच कर और भी गहरा हो जाता है। सभी क्षेत्रवासियों ने मिलकर बहुत प्यार दिया और पूरे हक के साथ अपनी समस्याएं बताईं।