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यूपी : बछिया ही पैदा करने वाले सीमेन की गुणवत्ता पर सवाल, जांच का आदेश
Mon, 06 Sep 2021 04:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा
महेंद्र तिवारी, लखनऊ
महेंद्र तिवारी, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 06 Sep 2021 04:13 AM IST
सार
- अलग-अलग रिपोर्ट आने पर मंडलायुक्त मेरठ ने प्रमुख सचिव को निर्णय के लिए भेजा
- किसानों से 300 रुपये लेकर पशुओं का किया जा रहा गर्भाधान
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प्रतिकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
बछिया ही पैदा करने वाले सीमेन की गुणवत्ता जांच में भिन्नता पाई गई है। एक जांच में गुणवत्ता पूरी तरह फेल साबित हुई है। मंडलायुक्त मेरठ सुरेंद्र सिंह ने इस पर निर्णय के लिए रिपोर्ट प्रमुख सचिव पशुपालन व पशुधन विकास विकास बोर्ड के चेयरमैन को भेजी है। इसी सीमेन का पूरे प्रदेश में उपयोग हो रहा है।
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मेरठ क्षेत्र के किसानों ने मंडलायुक्त मेरठ से शिकायत की थी कि पशुपालन विभाग 300 रुपये लेकर गायों से सिर्फ बछिया पैदा करने वाले ‘सेक्सड सीमेन’ से कृत्रिम गर्भाधान कर रहा है। इसमें उपयोग में लाए जा रहे सीमेन से 90 प्रतिशत बछिया ही पैदा होने का दावा किया जा रहा है। मगर, ज्यादातर मामलों में कृत्रिम गर्भाधान के बाद भी गर्भधारण नहीं हो रहा है। इसके बाद मंडलायुक्त ने सीमेन की जांच का आदेश दे दिया गया है।
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तीन अलग-अलग जांच के नतीजे अलग-अलग आए।दो जांच नतीजों के बाद तीसरी जांच सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि मेरठ से संबद्ध कॉलेज ऑफ वेटेनरी एंड एनीमल साइंसेज से कराई गई। विभागाध्यक्ष प्रो. विजय सिंह ने बताया कि जांच मैनुअल मेथड से की गई है। सीमेन में प्रोग्रेसिव मोटिलिटी व लाइव स्पर्म कम से कम 50 प्रतिशत होना चाहिए। लेकिन यह क्रमश: 20 व 28 प्रतिशत ही आया। सैंपल उपयोग लायक नहीं पाया गया।
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जिस मशीन से जांच, वह इस सीमेन की जांच के लिए उपयुक्त नहीं : सीईओ
पशुधन विकास परिषद लखनऊ के प्रभारी मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एके सिंह ने बताया कि मेरठ से सीमेन की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है। मगर, जिस मशीन से जांच हुई है, वह मशीन इस सीमेन की जांच के लिए उपयुक्त नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसी अन्य क्षेत्र से सीमेन को लेकर कोई शिकायत नहीं आई है।
परिषद सीमेन प्राप्त करते समय क्वालिटी कंट्रोल की जांच के बाद रिसीव करता है और वितरण तक उसकी क्वालिटी सुनिश्चित कराता है। पशुओं में गर्भाधान के समय की विभिन्न स्थितियों व बरते जाने वाले एहतियात का सीमेन के नतीजों पर असर पड़ता है। इसे गुणवत्ता फेल के रूप में नहीं देखा जा सकता। कम संतति दर का मामला जरूर सामने आया है, जिसे केंद्र सरकार के स्तर पर उठाया गया है।
प्रदेश सरकार माफ करे 300 रुपये शुल्क : कमलेश
पथिक कृषक उत्पादक संघ मिश्रिख सीतापुर के निदेशक व पशुपालक कमलेश सिंह का कहना है कि उत्तराखंड में बछिया ही जन्म देने वाले सीमेन से पशुओं में गर्भाधान कराने पर 100 रुपये लिया जाता है। प्रदेश में 300 रुपये लेवी शुल्क लिया जा रहा है। यह बहुत ज्यादा है। एक बार गर्भाधान पर यदि गाय ने गर्भधारण नहीं किया तो दोबारा इस सीमेन से गर्भाधान कराना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में यूपी सरकार को केवल बछिया जन्म देने वाले सीमेन पर लिए जाने वाले 300 रुपये शुल्क को माफ करना चाहिए।
गुणवत्ता में कमी आते ही बदले रंग : डॉ. राकेश
पशु चिकित्सा संघ के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि सेक्सड सीमेन की गुणवत्ता में कमी से कम संख्या में संतति उत्पन्न होने का ठीकरा पशु चिकित्सकों पर फोड़ा जाता है। सीमेन स्ट्रा ऐसी तकनीक से तैयार किया जाए कि यदि गलत हैंडलिंग से उसकी गुणवत्ता में कमी आए तो उसका रंग बदल जाए। ऐसे सीमेन का प्रयोग निषिद्ध किया जाए। इससे पशुपालकों व चिकित्सकों दोनों को राहत मिलेगी।