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Lucknow News: बिना बायोप्सी के होगी प्रोस्टेट कैंसर की सटीक पहचान
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लखनऊ। प्रोस्टेट कैंसर की पहचान बिना बायोप्सी के भी संभव है। इसके लिए व्यक्ति के माइक्रो आरएनए की जांच करनी होगी। केजीएमयू में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के सहयोग से हुए अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया है। यह अध्ययन इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित हुआ है।
यह अध्ययन डॉ. अन्वेशिका महाराज, डॉ. मो. कलीम अहमद, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. सुमैरा कय्यूम, डॉ. गौतम प्रसाद, डॉ. दुर्गेश कुमार व डॉ. अब्बास अली मेहंदी ने किया। इसमें कुल 188 लोगों को शामिल किया गया। इन सभी को चार समूहों में बांटा गया। पहले समूह में 55 स्वस्थ व्यक्ति रखे गए। दूसरे में सौम्य प्रोस्टेट हाइपरप्लासिया के 60, तीसरे में प्रोस्टेट कैंसर के 48 और चौथे समूह में हार्मोन-प्रतिरोधी प्रोस्टेट कैंसर के 25 मरीज रखे गए।
इन सभी समूहों के व्यक्तियों में माइक्रो आरएनए प्रोफाइलिंग मात्रात्मक पोलीमरेज चेन रिएक्शन (क्यूपीसीआर) से की गई। सामान्य व्यक्तियों के मुकाबले प्रोस्टेट कैंसर और अन्य समूह में एमआईआर-363-3पी की अधिकता मिली। इसलिए एमआईआर-363-3पी की पहचान प्रोस्टेट कैंसर के अहम बायोमार्कर के रूप में की गई।
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इनसेट-
9.3 फीसदी की दर से बढ़ रहा प्रोस्टेट कैंसर
अध्ययन में बताया गया कि भारत जैसे एशियाई देशों में यह देखा गया है कि समय के साथ वैश्विक स्तर पर 9.3 प्रतिशत तक प्रोस्टेट कैंसर के नए मामलों में वृद्धि हुई है। इस समय प्रोस्टेट कैंसर से मृत्यु दर 13.9 प्रतिशत हो गई है।
इनसेट-
फेफड़े के बाद होने वाला दूसरा सबसे ज्यादा कैंसर
कैंसर सांख्यिकी 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर (पीसीए) फेफड़ों के कैंसर के बाद दूसरा सबसे आम कैंसर है। इससे होने वाली मौतों की बात करें तो कैंसर से होने वाली मौतों में इसका पांचवां स्थान है।
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यह अध्ययन डॉ. अन्वेशिका महाराज, डॉ. मो. कलीम अहमद, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. सुमैरा कय्यूम, डॉ. गौतम प्रसाद, डॉ. दुर्गेश कुमार व डॉ. अब्बास अली मेहंदी ने किया। इसमें कुल 188 लोगों को शामिल किया गया। इन सभी को चार समूहों में बांटा गया। पहले समूह में 55 स्वस्थ व्यक्ति रखे गए। दूसरे में सौम्य प्रोस्टेट हाइपरप्लासिया के 60, तीसरे में प्रोस्टेट कैंसर के 48 और चौथे समूह में हार्मोन-प्रतिरोधी प्रोस्टेट कैंसर के 25 मरीज रखे गए।
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इन सभी समूहों के व्यक्तियों में माइक्रो आरएनए प्रोफाइलिंग मात्रात्मक पोलीमरेज चेन रिएक्शन (क्यूपीसीआर) से की गई। सामान्य व्यक्तियों के मुकाबले प्रोस्टेट कैंसर और अन्य समूह में एमआईआर-363-3पी की अधिकता मिली। इसलिए एमआईआर-363-3पी की पहचान प्रोस्टेट कैंसर के अहम बायोमार्कर के रूप में की गई।
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इनसेट-
9.3 फीसदी की दर से बढ़ रहा प्रोस्टेट कैंसर
अध्ययन में बताया गया कि भारत जैसे एशियाई देशों में यह देखा गया है कि समय के साथ वैश्विक स्तर पर 9.3 प्रतिशत तक प्रोस्टेट कैंसर के नए मामलों में वृद्धि हुई है। इस समय प्रोस्टेट कैंसर से मृत्यु दर 13.9 प्रतिशत हो गई है।
इनसेट-
फेफड़े के बाद होने वाला दूसरा सबसे ज्यादा कैंसर
कैंसर सांख्यिकी 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर (पीसीए) फेफड़ों के कैंसर के बाद दूसरा सबसे आम कैंसर है। इससे होने वाली मौतों की बात करें तो कैंसर से होने वाली मौतों में इसका पांचवां स्थान है।