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यूपी: यूपी पुलिस ने किया प्रियंका गांधी के आरोपों का खंडन, सीओ ने उच्चाधिकारियों को लिखी चिठ्ठी
Sun, 29 Dec 2019 12:46 PM IST
शाहरुख खान
ब्यूरो, अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 29 Dec 2019 12:46 PM IST
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स्कूटी पर जाती प्रियंका गांधी
- फोटो : ANI
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राजधानी लखनऊ में शनिवार की शाम हाईवोल्टेज ड्रामा की गवाह बनी। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से सेवानिवृत्त आईपीएस एसआर दारापुरी की बीमार पत्नी से मिलने जा रहीं प्रियंका गांधी वाड्रा को पुलिस ने जबरन रोक लिया। उनकी कार के सामने एक अन्य कार लगाकर ऐसा किया गया।
नोकझोंक के बाद प्रियंका कार से उतरकर स्कूटी से आगे बढ़ीं तो करीब 400 मीटर बाद पुलिस ने उन्हें फिर रोका। महिला पुलिस कर्मी ने आगे न बढ़ने देने के लिए प्रियंका के गिरेबान पर हाथ डाल दिया। धक्का-मुक्की भी की। फिर भी प्रियंका नहीं रुकीं और पैदल ही दारापुरी के इंदिरानगर स्थित घर का करीब 5 किलोमीटर लंबा सफर तय किया।
प्रियंका गांधी वाड्रा स्थापना दिवस समारोह समाप्त होने और प्रमुख नेताओं से मिलने के बाद शाम पांच बजे पीसीसी मुख्यालय से निकलीं। इस दौरान उनके साथ सिर्फ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, प्रमोद कृष्णम, प्रमोद तिवारी और शहर अध्यक्ष मुकेश सिंह चौहान थे।
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तब तक किसी को यह नहीं बताया गया था कि वे कहां जा रही हैं। जैसे ही उनकी कार लोहिया पार्क चौराहे पर पहुंची, पुलिस ने रोकना चाहा। कार के थोड़ा आगे बढ़ने पर पुलिस ने उनकी कार के सामने एक दूसरी कार लाकर रोक लिया। प्रियंका और साथ चल रहे नेताओं ने इसकी वजह पूछी तो पुलिस की ओर से बताया गया कि उन्हें यह जानकारी देनी होगी कि कहां जा रही हैं।
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नोकझोंक के बाद प्रियंका कार से उतरकर स्कूटी से आगे बढ़ीं तो करीब 400 मीटर बाद पुलिस ने उन्हें फिर रोका। महिला पुलिस कर्मी ने आगे न बढ़ने देने के लिए प्रियंका के गिरेबान पर हाथ डाल दिया। धक्का-मुक्की भी की। फिर भी प्रियंका नहीं रुकीं और पैदल ही दारापुरी के इंदिरानगर स्थित घर का करीब 5 किलोमीटर लंबा सफर तय किया।
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प्रियंका गांधी वाड्रा स्थापना दिवस समारोह समाप्त होने और प्रमुख नेताओं से मिलने के बाद शाम पांच बजे पीसीसी मुख्यालय से निकलीं। इस दौरान उनके साथ सिर्फ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, प्रमोद कृष्णम, प्रमोद तिवारी और शहर अध्यक्ष मुकेश सिंह चौहान थे।
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तब तक किसी को यह नहीं बताया गया था कि वे कहां जा रही हैं। जैसे ही उनकी कार लोहिया पार्क चौराहे पर पहुंची, पुलिस ने रोकना चाहा। कार के थोड़ा आगे बढ़ने पर पुलिस ने उनकी कार के सामने एक दूसरी कार लाकर रोक लिया। प्रियंका और साथ चल रहे नेताओं ने इसकी वजह पूछी तो पुलिस की ओर से बताया गया कि उन्हें यह जानकारी देनी होगी कि कहां जा रही हैं।
कहा गया कि सुरक्षा कारणों से यह जानना आवश्यक है। इस पर प्रियंका ने कहा कि यह मामला ‘एसपीजी’ सुरक्षा का नहीं है, पूरी तरह से यूपी पुलिस का है। इस तरह से रोके जाने से हादसा भी हो सकता था। वे बिना बताए कहीं भी जा सकती हैं, लेकिन पुलिस ने उनके एक भी तर्क को नहीं सुना।
इसके बाद प्रियंका कार से उतरकर थोड़ा पैदल चलीं और फ्लाईओवर पर चढ़ गईं। वहां एक स्कूटी पर बैठकर पॉलीटेक्निक चौराहे पर पहुंचीं। यहां महिला पुलिस कर्मियों ने उन्हें जबरन रोक लिया। एक महिला कर्मी ने उनकी गर्दन पकड़ी। साथ ही धक्का-मुक्की भी की। तब तक बड़ी संख्या में कांग्रेसी भी वहां पहुंच गए थे।
प्रियंका स्कूटी से उतरकर पैदल ही मुंशी पुलिया की ओर बढ़ीं। इस बीच पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी भी प्रियंका से बात करने आ गए। लेकिन, प्रियंका अपने रास्ते पर आगे बढ़ती रहीं। करीब 6:20 पर वह एसआर दारापुरी के इंदिरानगर स्थित आवास पर पहुंची। वहां उन्होंने दारापुरी की बीमार पत्नी का हालचाल लिया। परिवारीजनों को हरसंभव मदद का वादा भी किया।
यहां बता दें कि सेवानिवृत्त आईपीएस दारापुरी को 19 दिसंबर को उस वक्त गिरफ्तार कर लिया गया था, जब वे सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन का हिस्सा थे। दारापुरी इस समय जेल में हैं। प्रियंका करीब सात बजे दारापुरी के परिवार से मिलने के बाद दुबारा प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर पहुंचीं।
इसके बाद प्रियंका कार से उतरकर थोड़ा पैदल चलीं और फ्लाईओवर पर चढ़ गईं। वहां एक स्कूटी पर बैठकर पॉलीटेक्निक चौराहे पर पहुंचीं। यहां महिला पुलिस कर्मियों ने उन्हें जबरन रोक लिया। एक महिला कर्मी ने उनकी गर्दन पकड़ी। साथ ही धक्का-मुक्की भी की। तब तक बड़ी संख्या में कांग्रेसी भी वहां पहुंच गए थे।
प्रियंका स्कूटी से उतरकर पैदल ही मुंशी पुलिया की ओर बढ़ीं। इस बीच पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी भी प्रियंका से बात करने आ गए। लेकिन, प्रियंका अपने रास्ते पर आगे बढ़ती रहीं। करीब 6:20 पर वह एसआर दारापुरी के इंदिरानगर स्थित आवास पर पहुंची। वहां उन्होंने दारापुरी की बीमार पत्नी का हालचाल लिया। परिवारीजनों को हरसंभव मदद का वादा भी किया।
यहां बता दें कि सेवानिवृत्त आईपीएस दारापुरी को 19 दिसंबर को उस वक्त गिरफ्तार कर लिया गया था, जब वे सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन का हिस्सा थे। दारापुरी इस समय जेल में हैं। प्रियंका करीब सात बजे दारापुरी के परिवार से मिलने के बाद दुबारा प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर पहुंचीं।
मेरा गला दबाया, जबरन रोका : प्रियंका
दारापुरी के परिवारीजनों से मिलने के बाद प्रियंका ने मीडिया को बताया कि वह शांतिपूर्वक दारापुरी के परिवार से मिलने आ रही थीं। रास्ते में पुलिस ने उन्हें जबरन रोका। प्रियंका ने कहा, एक महिला पुलिस कर्मी ने मेरा गला दबाया। मुझे धकेला भी गया। ये सब जो हो रहा है, मेरी समझ से परे है। रास्ते में अचानक पुलिस की गाड़ी आई और मुझे रोक लिया गया। मैंने पूछा कि रोकने का क्या मतलब होता है तो पुलिस ने कहा कि आगे नहीं जाने देंगे।
गला पकड़ने, गिराने की बातें भ्रामक व असत्य : सीओ
प्रियंका गांधी की फ्लीट प्रभारी व माडर्न कंट्रोल रूम की सीओ डॉ. अर्चना सिंह का कहना है कि प्रियंका माल एवेन्यू स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय से कौल हाउस, गोखले मार्ग के लिए निकलीं, लेकिन उनकी फ्लीट वीमेन पावर लाइन-1090 चौराहा से सीधे न जाकर लोहिया पथ की तरफ जाने लगी।
प्रियंका की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था कराने के लिए उनसे गंतव्य के बारे में जानकारी मांगी गई, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। इसके बाद प्रियंका गाड़ी से उतरकर कार्यकर्ताओं के साथ पैदल चलने लगीं। अर्चना सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रियंका गांधी का गला पकड़ना और उन्हें गिराने जैसी भ्रामक बातें प्रचारित की जा रही हैं जो पूर्णतया असत्य हैं।
सीओ ने कहा, मेरे साथ भी धक्का-मुक्की की गई। मैं एक बार गिर भी गई, लेकिन प्रियंका के साथ किसी भी स्तर पर कोई दुर्व्यवहार नहीं किया गया। उन्हें सुरक्षा के मद्देनजर हेलमेट न लगाने की बात भी की गई, मगर उन्होंने ध्यान नहीं दिया। सीओ का कहना है कि उन्होंने पूरी कर्त्तव्यनिष्ठा से अपनी ड्यूटी का निर्वहन किया। सीओ ने अपर पुलिस अधीक्षक प्रोटोकाल को भी यही लिखकर दिया है।
गला पकड़ने, गिराने की बातें भ्रामक व असत्य : सीओ
प्रियंका गांधी की फ्लीट प्रभारी व माडर्न कंट्रोल रूम की सीओ डॉ. अर्चना सिंह का कहना है कि प्रियंका माल एवेन्यू स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय से कौल हाउस, गोखले मार्ग के लिए निकलीं, लेकिन उनकी फ्लीट वीमेन पावर लाइन-1090 चौराहा से सीधे न जाकर लोहिया पथ की तरफ जाने लगी।
प्रियंका की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था कराने के लिए उनसे गंतव्य के बारे में जानकारी मांगी गई, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। इसके बाद प्रियंका गाड़ी से उतरकर कार्यकर्ताओं के साथ पैदल चलने लगीं। अर्चना सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रियंका गांधी का गला पकड़ना और उन्हें गिराने जैसी भ्रामक बातें प्रचारित की जा रही हैं जो पूर्णतया असत्य हैं।
सीओ ने कहा, मेरे साथ भी धक्का-मुक्की की गई। मैं एक बार गिर भी गई, लेकिन प्रियंका के साथ किसी भी स्तर पर कोई दुर्व्यवहार नहीं किया गया। उन्हें सुरक्षा के मद्देनजर हेलमेट न लगाने की बात भी की गई, मगर उन्होंने ध्यान नहीं दिया। सीओ का कहना है कि उन्होंने पूरी कर्त्तव्यनिष्ठा से अपनी ड्यूटी का निर्वहन किया। सीओ ने अपर पुलिस अधीक्षक प्रोटोकाल को भी यही लिखकर दिया है।
वहीं, सीओ गोमतीनगर संतोष कुमार सिंह का कहना है कि प्रियंका को किसी ने रोका नहीं था। वह जब वीमेन पावर लाइन 1090 चौराहा पहुंची तो पुलिसकर्मियों ने उनसे पूछा कि वह कहां जाना चाहती हैं। इस पर उन्होंने कुछ बताया नहीं और किसी पार्टी नेता के साथ स्कूटी से चली गईं।
सीआरपीएफ वीआईपी सुरक्षा प्रभारी को लिखा शिकायती पत्र
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के लखनऊ दौरे को लेकर उनके कार्यालय ने सीआरपीएफ वीआईपी सुरक्षा प्रभारी को पत्र लिखा है। सूत्रों के मुताबिक पत्र में शिकायत की गई है कि लखनऊ के सर्किल अधिकारी (सीओ) ने प्रियंका की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों को धमकाते हुए चेतावनी दी कि वे प्रियंका की आवाजाही को प्रतिबंधित रखे।
सूत्रों के मुताबिक उन्होंने संबंधित अधिकारी के खिलाफ जरूरी कार्रवाई करने की मांग की है। मालूम हो कि केंद्र ने गांधी परिवार को मिली एसपीजी सुरक्षा हटाते हुए सीआरपीएफ की जेड प्लस सुरक्षा दी है। सीआरपीएफ महानिदेशालय के आईजी प्रदीप कुमार सिंह को लिखे पत्र में प्रियंका गांधी के कार्यालय ने बताया कि हजरतगंज के सर्किल ऑफिसर अभय मिश्रा ने प्रोटोकॉल को तोड़ा है।
सीआरपीएफ वीआईपी सुरक्षा प्रभारी को लिखा शिकायती पत्र
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के लखनऊ दौरे को लेकर उनके कार्यालय ने सीआरपीएफ वीआईपी सुरक्षा प्रभारी को पत्र लिखा है। सूत्रों के मुताबिक पत्र में शिकायत की गई है कि लखनऊ के सर्किल अधिकारी (सीओ) ने प्रियंका की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों को धमकाते हुए चेतावनी दी कि वे प्रियंका की आवाजाही को प्रतिबंधित रखे।
सूत्रों के मुताबिक उन्होंने संबंधित अधिकारी के खिलाफ जरूरी कार्रवाई करने की मांग की है। मालूम हो कि केंद्र ने गांधी परिवार को मिली एसपीजी सुरक्षा हटाते हुए सीआरपीएफ की जेड प्लस सुरक्षा दी है। सीआरपीएफ महानिदेशालय के आईजी प्रदीप कुमार सिंह को लिखे पत्र में प्रियंका गांधी के कार्यालय ने बताया कि हजरतगंज के सर्किल ऑफिसर अभय मिश्रा ने प्रोटोकॉल को तोड़ा है।