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पत्नी और मासूम बच्चे के हत्यारे ने जेल में फांसी लगाकर दी जान

Mon, 29 Aug 2016 12:54 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 29 Aug 2016 12:54 PM IST
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prisoner committed suicide in lucknow district jail
डेमो प‌िक - फोटो : demo pic

लखनऊ जिला कारागार में पत्नी और बच्चे की हत्या के आरोप में जेल में बंद कैदी ने रविवार रात फांसी लगाकर जान दे दी। 

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काकोरी के काजीखेड़ा का रहने वाला 30 साल का श्रवण अपनी पत्नी और बच्चे की हत्या के आरोप में 26 फरवरी 2016 को जिला जेल लाया गया था।

जेल में तनाव और अवसाद के चलते श्रवण का कैदियों से झगड़ा होता था। हाइपर टेंशन की शिकायत होने पर उसे 24 अगस्त को जेल अस्पताल में दिखाया गया। वहां भी कैदियों के साथ झगड़ा करने पर उसे तनहाई बैरक में रख दिया गया।

रविवार रात करीब 9.30 पर श्रवण ने शौचालय के पार्टीशन पर चढ़कर अपनी बनियान से फंदा बनाया और फांसी लगा ली।

उसे फांसी पर लटका देख प्रधान बंदी रक्षक ने शोर मचाया जब तक लोगों ने उसे उतारा तब तक उसकी जान जा चुकी थी। पत्नी, बच्चे की हत्या के बाद श्रवण ने खुद भी जहर खाकर जान देने की कोशिश की थी।

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शराब के नशे में की थी वारदात

prisoner committed suicide in lucknow district jail
डेमो प‌िक

पुलिस के मुताबिक, गांव काजी खेड़ा में श्रवण रावत (28) नवनिर्मित मकान में अपनी पत्नी अनीता (25), बेटी नैनसी (3) व डेढ़ साल के बेटे अंश के साथ रहता था। शराब की लत के चलते श्रवण टीबी का शिकार था और तंगहाली को लेकर पति-पत्नी में अक्सर झगड़ा होता था। 

दोनों में 18 फरवरी देरशाम झगड़ा होते देख नैनसी कुछ दूर स्थित अपने बाबा रामप्रसाद व दादी सुजनी उर्फ रमका के पास चली गई। घर का दरवाजा भीतर से बंद करके पति-पत्नी रात तक झगड़ते रहे। श्रवण ने अनीता की पिटाई की। इससे उसकी चूडिय़ां टूटकर कमरे में बिखर गई। 

श्रवण की छोटी बहन लकलक शुक्रवार सुबह अपनी भतीजी नैनसी को लेकर उसके घर पहुंची। काफी देर तक कुंडी खटखटाने पर दरवाजा नहीं खुला तो उसने अपनी मां रमकाव परिवार के अन्य लोगों को बुलाया। 

परिवारीजन पड़ोसी की छत से घर के आंगन में कूदे। बाहर वाले कमरे में चारपाई पर खाली बिस्तरथा। अंदर वाले कमरे में दरवाजे के पास फंदे से अनीता का शव लटका था। 

फर्श पर मासूम अंश के शव के पास श्रवण तड़प रहा था। उसकी पैंट में गंदगी व खून था। रमका ने शोर मचाने के साथ मुख्य दरवाजा खोला। 

आसपास के लोगों ने पुलिस को जानकारी दी थी कि साल भर से काम पर नहीं जा रहे श्रवण को अनीता का किसी से बातचीत करना नागवार गुजरता था। उसे मोबाइल पर बात करते देखकर भड़क जाता था। 

घर पर लोगों के आने को लेकर भी झगड़ा होता था। श्रवण व अनीता में झगड़ा शुरू होते ही नैनसी अपने बाबा-दादी के पास चली जाती थी। 

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