प्राइमरी टीचर ध्यान दें, स्कूल बेस्ट हुआ तो मिलेंगे 1.20 लाख
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प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए पुरस्कार योजना शुरू की गई है। इस पुरस्कार के लिए उन विद्यालयों का चयन किया जाएगा, जहां बच्चों की उपस्थिति ठीक-ठाक रहती हो।
कम से कम डेढ़ सौ बच्चे पढ़ रहे हों। शिक्षकों ने पाठ्यक्रम समय से पूरा करवाया हो। सर्वांगीण विकास के लिए बच्चे पढ़ाई से इतर खेलकूद और अन्य गतिविधियों में भी हिस्सा लेते हों।
सचिव बेसिक शिक्षा की ओर से जारी शासनादेश में कहा गया है कि हर खंड शिक्षा अधिकारी निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले 10 स्कूलों के नाम जिलास्तरीय समिति को भेजेंगे।
जिलास्तरीय समिति सभी ब्लॉकों से मिले प्रस्तावों में से किसी एक का चयन करके उसे 7 मार्च तक बेसिक शिक्षा निदेशालय को भेजेगी।
पुरस्कार के लिए निर्धारित मानक
चयनित विद्यालय की प्रबंध समिति (एसएमसी) के अध्यक्ष और प्रधानाध्यापक या प्रभारी अध्यापक को राज्य स्तर पर समारोह आयोजित कर सम्मानित किया जाएगा। इतना ही नहीं, जिला स्तरीय समिति चयनित विद्यालय के सभी शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र भी देगी।
‘द बेस्ट’ स्कूल के चयन के लिए जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के प्राचार्य की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी के सदस्य सचिव जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी होंगे। जिलाधिकारी की ओर से नामित एक सदस्य भी होगा।
ये हैं मानक
- शैक्षिक सत्र 2015-16 में विद्यालय में कम से कम 150 छात्र-छात्राएं हों।
- स्कूल के लिए निर्धारित क्षेत्र के 06-11 वर्ष के सभी बच्चों का नाम स्कूल में लिखा हो।
- बच्चों की मासिक औसतन उपस्थित 60 फीसदी से अधिक हो।
- शिक्षकों ने पाठ्यक्रम समय से पूरा कराया हो।
- शैक्षिक सत्र 2015-16 में विद्यालय निरीक्षण में विद्यालय उत्कृष्ट कोटि का पाया गया हो।
- बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग टॉयलेट्स हों।
- विद्यालय में पीने का साफ पानी उपलब्ध हो।
- जरूरी सूचनाएं विद्यालय की दीवार पर अंकित हों।
- भवन का रख-रखाव संतोषजनक और परिसर साफ-सुथरा हो। परिसर में पौधरोपण किया गया हो।
- बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर या प्लास्टिक की चटाई या टाट-पट्टी की उचित व्यवस्था हो।
- मेन्यू के अनुसार मिड डे मील उपलब्ध कराया जा रहा हो।
- विद्यालय प्रबंध समिति की मासिक बैठक नियमित रूप से हो रही हो।
- सभी बच्चों के पास निशुल्क किताबें, वर्क बुक और यूनिफॉर्म के पूरे सेट उपलब्ध हों।
- खेलकूद, वाद-विवाद प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता हो।
- छात्र-छात्राओं ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया हो।
- शिक्षकों ने प्रशिक्षण एवं अन्य गतिविधियों में हिस्सा लिया हो।