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दिसंबर से लखनऊ-इलाहाबाद शताब्दी दौड़ाने की तैयारी,
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दिसंबर से लखनऊ-इलाहाबाद शताब्दी दौड़ाने की तैयारी, पर डबलिंग व इलेक्ट्रिफिकेशन पूरा होने का इंतजार
लखनऊ-इलाहाबाद शताब्दी एक्सप्रेस को पटरी पर लाने के लिए उत्तर मध्य रेलवे के अधिकारियों ने माथापच्ची तेज कर दी है, लेकिन यह आसान नहीं है।
टाइमिंग, किराए, रूट से लेकर फ्लेक्सी प्राइसिंग आदि से रेलवे अधिकारियों को जूझना पड़ रहा है। इससे शताब्दी की राह कांटों भरी नजर आती है।
दरअसल, लखनऊ से इलाहाबाद के लिए एक हाई स्पीड व लग्जरी ट्रेन चलाने की मांग कुंभ से पहले उठ रही थी। इस पर कई बैठकें भी हुईं, लेकिन ट्रेन चलाने पर सहमति नहीं बन सकी थी।
हालांकि, अब संचालन के लिए रास्ते साफ हो रहे हैं। दोनों शहरों के बीच लंबे समय से प्रस्तावित और लगातार टल रही शताब्दी एक्सप्रेस का संचालन साल के अंत तक शुरू हो सकता है।
इस बाबत उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन तैयारियों में जुट गया है। प्रशासन का दावा है कि लखनऊ से इलाहाबाद के बीच शताब्दी एक्सप्रेस का संचालन दिसंबर तक शुरू हो जाएगा।
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दरअसल, रूट पर डबलिंग व इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा होते ही ट्रेन को पटरी पर लाने की तैयारी है। इलाहाबाद से ऊंचाहार और रायबरेली से लखनऊ के बीच रेलमार्ग का विद्युतीकरण हो चुका है।
जबकि ऊंचाहार से रायबरेली के बीच विद्युतीकरण का काम जल्द पूरा करने का लक्ष्य है। रायबरेली से लखनऊ तक रेलवे लाइन की डबलिंग हो चुकी है और इलाहाबाद से फाफामऊ की डबलिंग भी जल्द से जल्द पूरी कर ली जाएगी।
...कहीं जनशताब्दी जैसा न हो हाल
रेलवे अधिकारी बताते हैं कि लखनऊ-इलाहाबाद रूट पर पहले जनशताब्दी एक्सप्रेस चलती थी। इस ट्रेन में आरक्षण की व्यवस्था थी। यात्री एसी सेकेंड क्लास आदि में रिजर्वेशन कराकर सफर करते थे। लेकिन एक स्थिति ऐसी आई, जब रेलवे के सामने खर्च निकालने का संकट पैदा हो गया। इससे बाद में ट्रेन को इंटरसिटी बना दिया गया।
फ्लेक्सी प्राइसिंग से लगेगा अड़ंगा
दरअसल, रेलवे बोर्ड के नियमानुसार शताब्दी व राजधानी ट्रेनों में विमान की तर्ज पर फ्लेक्सी प्राइसिंग सिस्टम लागू होता है। इसके तहत यदि लखनऊ-प्रयागराज शताब्दी एक्सप्रेस चलती है तो फ्लेक्सी प्राइसिंग से किराया बढ़ना तय है। मसलन, हर 10 प्रतिशत सीटों की बिक्री के बाद किराया 10 प्रतिशत बढ़ जाएगा। अभी लखनऊ से इलाहाबाद के बीच जनरल का किराया 45 से 80 रुपये, स्लीपर का 160 रुपये, चेयरकार का 330 रुपये, थर्ड एसी का 495 रुपये, सेकेंड एसी का 700 और फर्स्ट एसी का 1,155 रुपये है।
टाइम व रूट पर हो रही माथापच्ची
लखनऊ से इलाहाबाद के लिए अभी प्रयाग इंटरसिटी, गंगा गोमती एक्सप्रेस, त्रिवेणी एक्सप्रेस, इलाहाबाद हरिद्वार एक्सप्रेस सहित दो पैसेंजर ट्रेनें चलती हैं। ऐसे में शताब्दी के लिए रेलवे को ऐसी टाइमिंग रखनी होगी, जिसमें उसे यात्री मिल सके। वहीं लखनऊ से इलाहाबाद जाने के दो रूट हैं। पहला वाया रायबरेली, ऊंचाहार, कुंडा होते हुए, जबकि दूसरा रूट वाया प्रतापगढ़ है। हालांकि, रेलवे की प्राथमिकताओं में वाया रायबरेली रेलखंड शामिल है। अभी 200 किमी की दूरी तय करने में चार से पांच घंटे लग जाते हैं, जबकि शताब्दी से तीन घंटे में सफर पूरा हो सकेगा।
मुगलसराय तक चली शताब्दी तो होगा मुनाफा
रेलवे विशेषज्ञों की मानें तो लखनऊ-इलाहाबाद शताब्दी से यदि रेलवे को मुनाफा कमाना है तो इसका संचालन मुगलसराय तक बढ़ाना चाहिए। इससे रेलवे को आरक्षण वाले यात्री आसानी से मिल सकेंगे। दरअसल, मुगलसराय तक ट्रेन के चलने पर वाराणसी जाने वालों को भी एक बेहतर विकल्प मिल सकेगा।
विमान सेवा बंद होने से जगी उम्मीद
14 जून, 2018 को जेट एयरवेज ने लखनऊ से इलाहाबाद और इलाहाबाद से लखनऊ के लिए हवाई उड़ान शुरू की थी, जो जेट पर आए आर्थिक संकट के बाद बंद हो चुकी है। ऐसे में लखनऊ से इलाहाबाद के बीच लग्जरी क्लास में सफर करने वाले यात्री तो हैं, लेकिन सेवाओं की कमी है। यह लखनऊ-इलाहाबाद शताब्दी के लिए फायदेमंद होगा।
प्रयाग से इलाहाबाद जंक्शन तक डबलिंग का काम पूरा
सीपीआरओ, उत्तर मध्य रेलवे, अजीत कुमार सिंह ने बताया कि प्रयाग से इलाहाबाद जंक्शन तक डबलिंग का काम हो गया है। रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने संस्तुति भी कर दी है। ट्रेन के रूट, टाइमिंग, किराए आदि को लेकर मंथन हो रहा है। इस साल यह ट्रेन पटरी पर आ जाएगी। इससे यात्रियों को खासी राहत मिलेगी।
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लखनऊ-इलाहाबाद शताब्दी एक्सप्रेस को पटरी पर लाने के लिए उत्तर मध्य रेलवे के अधिकारियों ने माथापच्ची तेज कर दी है, लेकिन यह आसान नहीं है।
टाइमिंग, किराए, रूट से लेकर फ्लेक्सी प्राइसिंग आदि से रेलवे अधिकारियों को जूझना पड़ रहा है। इससे शताब्दी की राह कांटों भरी नजर आती है।
दरअसल, लखनऊ से इलाहाबाद के लिए एक हाई स्पीड व लग्जरी ट्रेन चलाने की मांग कुंभ से पहले उठ रही थी। इस पर कई बैठकें भी हुईं, लेकिन ट्रेन चलाने पर सहमति नहीं बन सकी थी।
हालांकि, अब संचालन के लिए रास्ते साफ हो रहे हैं। दोनों शहरों के बीच लंबे समय से प्रस्तावित और लगातार टल रही शताब्दी एक्सप्रेस का संचालन साल के अंत तक शुरू हो सकता है।
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इस बाबत उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन तैयारियों में जुट गया है। प्रशासन का दावा है कि लखनऊ से इलाहाबाद के बीच शताब्दी एक्सप्रेस का संचालन दिसंबर तक शुरू हो जाएगा।
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दरअसल, रूट पर डबलिंग व इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा होते ही ट्रेन को पटरी पर लाने की तैयारी है। इलाहाबाद से ऊंचाहार और रायबरेली से लखनऊ के बीच रेलमार्ग का विद्युतीकरण हो चुका है।
जबकि ऊंचाहार से रायबरेली के बीच विद्युतीकरण का काम जल्द पूरा करने का लक्ष्य है। रायबरेली से लखनऊ तक रेलवे लाइन की डबलिंग हो चुकी है और इलाहाबाद से फाफामऊ की डबलिंग भी जल्द से जल्द पूरी कर ली जाएगी।
...कहीं जनशताब्दी जैसा न हो हाल
रेलवे अधिकारी बताते हैं कि लखनऊ-इलाहाबाद रूट पर पहले जनशताब्दी एक्सप्रेस चलती थी। इस ट्रेन में आरक्षण की व्यवस्था थी। यात्री एसी सेकेंड क्लास आदि में रिजर्वेशन कराकर सफर करते थे। लेकिन एक स्थिति ऐसी आई, जब रेलवे के सामने खर्च निकालने का संकट पैदा हो गया। इससे बाद में ट्रेन को इंटरसिटी बना दिया गया।
फ्लेक्सी प्राइसिंग से लगेगा अड़ंगा
दरअसल, रेलवे बोर्ड के नियमानुसार शताब्दी व राजधानी ट्रेनों में विमान की तर्ज पर फ्लेक्सी प्राइसिंग सिस्टम लागू होता है। इसके तहत यदि लखनऊ-प्रयागराज शताब्दी एक्सप्रेस चलती है तो फ्लेक्सी प्राइसिंग से किराया बढ़ना तय है। मसलन, हर 10 प्रतिशत सीटों की बिक्री के बाद किराया 10 प्रतिशत बढ़ जाएगा। अभी लखनऊ से इलाहाबाद के बीच जनरल का किराया 45 से 80 रुपये, स्लीपर का 160 रुपये, चेयरकार का 330 रुपये, थर्ड एसी का 495 रुपये, सेकेंड एसी का 700 और फर्स्ट एसी का 1,155 रुपये है।
टाइम व रूट पर हो रही माथापच्ची
लखनऊ से इलाहाबाद के लिए अभी प्रयाग इंटरसिटी, गंगा गोमती एक्सप्रेस, त्रिवेणी एक्सप्रेस, इलाहाबाद हरिद्वार एक्सप्रेस सहित दो पैसेंजर ट्रेनें चलती हैं। ऐसे में शताब्दी के लिए रेलवे को ऐसी टाइमिंग रखनी होगी, जिसमें उसे यात्री मिल सके। वहीं लखनऊ से इलाहाबाद जाने के दो रूट हैं। पहला वाया रायबरेली, ऊंचाहार, कुंडा होते हुए, जबकि दूसरा रूट वाया प्रतापगढ़ है। हालांकि, रेलवे की प्राथमिकताओं में वाया रायबरेली रेलखंड शामिल है। अभी 200 किमी की दूरी तय करने में चार से पांच घंटे लग जाते हैं, जबकि शताब्दी से तीन घंटे में सफर पूरा हो सकेगा।
मुगलसराय तक चली शताब्दी तो होगा मुनाफा
रेलवे विशेषज्ञों की मानें तो लखनऊ-इलाहाबाद शताब्दी से यदि रेलवे को मुनाफा कमाना है तो इसका संचालन मुगलसराय तक बढ़ाना चाहिए। इससे रेलवे को आरक्षण वाले यात्री आसानी से मिल सकेंगे। दरअसल, मुगलसराय तक ट्रेन के चलने पर वाराणसी जाने वालों को भी एक बेहतर विकल्प मिल सकेगा।
विमान सेवा बंद होने से जगी उम्मीद
14 जून, 2018 को जेट एयरवेज ने लखनऊ से इलाहाबाद और इलाहाबाद से लखनऊ के लिए हवाई उड़ान शुरू की थी, जो जेट पर आए आर्थिक संकट के बाद बंद हो चुकी है। ऐसे में लखनऊ से इलाहाबाद के बीच लग्जरी क्लास में सफर करने वाले यात्री तो हैं, लेकिन सेवाओं की कमी है। यह लखनऊ-इलाहाबाद शताब्दी के लिए फायदेमंद होगा।
प्रयाग से इलाहाबाद जंक्शन तक डबलिंग का काम पूरा
सीपीआरओ, उत्तर मध्य रेलवे, अजीत कुमार सिंह ने बताया कि प्रयाग से इलाहाबाद जंक्शन तक डबलिंग का काम हो गया है। रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने संस्तुति भी कर दी है। ट्रेन के रूट, टाइमिंग, किराए आदि को लेकर मंथन हो रहा है। इस साल यह ट्रेन पटरी पर आ जाएगी। इससे यात्रियों को खासी राहत मिलेगी।