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Lucknow News: जहां तैयार होते थे दिव्यांग खिलाड़ी, वहां दवा स्टोर बनाने की तैयारी
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लखनऊ। केजीएमयू में लिंब सेंटर के जिस ऐतिहासिक वुडन हॉल में पैरा ओलंपिक के लिए दिव्यांग खिलाड़ियों को तैयार किया जाता था, उसे अब दवाओं का स्टोर बनाने की तैयारी है। इस मंशा का पता चलने के बाद स्टाफ व खिलाड़ियों ने विरोध शुरू कर दिया है।
केजीएमयू के लिंब सेंटर में हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) का सेंट्रल ड्रग स्टोर शुरू करने की तैयारी है। इसका सर्वे हो गया है। अफसरों का कहना है कि सेंटर के वुडन हॉल को भी स्टोर में बदला जाएगा। अभी सेंट्रल ड्रग स्टोर अटल बिहारी वाजपेई साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में है। निर्देश के बाद इसे यहां से शिफ्ट करने की योजना है। इसे लेकर बैठकें भी हो चुकी हैं।
लिंब सेंटर में डिपार्टमेंट ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिटेशन (डीपीएमआर) विभाग चल रहा है। यहां दिव्यांगजनों का इलाज किए जाने के साथ उनके लिए कृत्रिम अंग बनाए जाते हैं। सेंटर में खास तरह की लकड़ी से बनाए गए वुडन हॉल का इस्तेमाल पैरा खिलाड़ियों को बैडमिंटन, टेबल टेनिस, व्हीलचेयर रेस की ट्रेनिंग देने के लिए होता था।
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यहां प्रशिक्षित दिव्यांगों ने जीते गोल्ड मेडल
वर्ष 1973, 1977 व 1994 के पैरा ओलंपिक में बैडमिंटन, टेबल टेनिस, व्हीलचेयर रेस में बनवारी, शाकिर अली, मोहन लाल ने दिव्यांग श्रेणी में भारत के लिए तीन गोल्ड मेडल जीते थे। इन्हें इसी वुडन हॉल में प्रशिक्षण दिया गया था। खास बात यह है कि इस हॉल के निर्माण में एक भी कील का इस्तेमाल नहीं हुआ है। शासनादेश में स्पष्ट है कि वुडन हॉल का इस्तेमाल केवल दिव्यांगजनों से संबंधित कार्यों के लिए ही होगा। ऐसे में इसका इस्तेमाल दवाएं रखने में किए जाने की तैयारी का विरोध शुरू हो गया है। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह का कहना है कि दो वर्ष से वुडन हॉल में आयोजन नहीं हुए थे। इसे इस्तेमाल में नहीं लाया जा रहा था। यह देखते हुए कमेटी ने सर्वे किया है। वुडन हॉल का इस्तेमाल मरीजों के लिए हित में हो, इसका प्रयास किया जा रहा है।
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केजीएमयू के लिंब सेंटर में हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) का सेंट्रल ड्रग स्टोर शुरू करने की तैयारी है। इसका सर्वे हो गया है। अफसरों का कहना है कि सेंटर के वुडन हॉल को भी स्टोर में बदला जाएगा। अभी सेंट्रल ड्रग स्टोर अटल बिहारी वाजपेई साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में है। निर्देश के बाद इसे यहां से शिफ्ट करने की योजना है। इसे लेकर बैठकें भी हो चुकी हैं।
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लिंब सेंटर में डिपार्टमेंट ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिटेशन (डीपीएमआर) विभाग चल रहा है। यहां दिव्यांगजनों का इलाज किए जाने के साथ उनके लिए कृत्रिम अंग बनाए जाते हैं। सेंटर में खास तरह की लकड़ी से बनाए गए वुडन हॉल का इस्तेमाल पैरा खिलाड़ियों को बैडमिंटन, टेबल टेनिस, व्हीलचेयर रेस की ट्रेनिंग देने के लिए होता था।
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यहां प्रशिक्षित दिव्यांगों ने जीते गोल्ड मेडल
वर्ष 1973, 1977 व 1994 के पैरा ओलंपिक में बैडमिंटन, टेबल टेनिस, व्हीलचेयर रेस में बनवारी, शाकिर अली, मोहन लाल ने दिव्यांग श्रेणी में भारत के लिए तीन गोल्ड मेडल जीते थे। इन्हें इसी वुडन हॉल में प्रशिक्षण दिया गया था। खास बात यह है कि इस हॉल के निर्माण में एक भी कील का इस्तेमाल नहीं हुआ है। शासनादेश में स्पष्ट है कि वुडन हॉल का इस्तेमाल केवल दिव्यांगजनों से संबंधित कार्यों के लिए ही होगा। ऐसे में इसका इस्तेमाल दवाएं रखने में किए जाने की तैयारी का विरोध शुरू हो गया है। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह का कहना है कि दो वर्ष से वुडन हॉल में आयोजन नहीं हुए थे। इसे इस्तेमाल में नहीं लाया जा रहा था। यह देखते हुए कमेटी ने सर्वे किया है। वुडन हॉल का इस्तेमाल मरीजों के लिए हित में हो, इसका प्रयास किया जा रहा है।