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आईआईटीआर की प्री-मानसून रिपोर्ट: लखनऊ के इन इलाकों की हवा सबसे ज्यादा जहरीली
Thu, 06 Jun 2019 03:07 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 06 Jun 2019 03:07 PM IST
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लखनऊ के आबादी वाले इलाकों की हवा औद्योगिक क्षेत्र से भी ज्यादा जहरीली है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी (आईआईटीआर) की प्री-मानसून रिपोर्ट-2019 के मुताबिक विकासनगर की हवा में सबसे ज्यादा जहर घुला हुआ है।
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यहां सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाले सूक्ष्मकण पीएम-10 का औसत 185.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 2.5 का औसत 88.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड किया गया है। पिछले साल तक आईआईटीआर की आवासीय इलाकों की रिपोर्ट में इंदिरानगर ही सबसे ज्यादा प्रदूषित पाया गया था।
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व्यावसायिक इलाकों की बात करें तो चारबाग की हवा शहर में सबसे ज्यादा प्रदूषित है। हालांकि राहत की बात है कि वायु प्रदूषण के साथ ध्वनि प्रदूषण के स्तर में पिछले साल की तुलना में कमी दर्ज हुई है। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर रिलीज हुई प्री-मानसून रिपोर्ट के मुताबिक चारबाग की हवा में विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक से चार गुना से ज्यादा सूक्ष्मकण मिले हैं।
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हवा के साथ फेफड़ों तक पहुंच कर उसको बेहद नुकसान पहुंचा सकने वाले सूक्ष्मकण पीएम-10 का यहां औसत 190.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। यह सर्वेक्षण के लिए चुने गए सभी नौ स्थानों में सबसे अधिक है। इससे भी सूक्ष्मकण पीएम2.5 का औसत यहां अधिकतम 92.0 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर मिला है। यहां हवा के सबसे अधिक प्रदूषित मिलने की वजह रेलवे, सड़क मार्ग के ट्रैफिक के अलावा घनी आबादी के आसपास होने और ज्यादातर समय जाम लगने को कारण बताया जा रहा है।
देखें- अमौसी में चारबाग और रिहायशी इलाकों से भी कम प्रदूषण
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ये मानक हैं...इस पर परखिए हवा की सेहत कैसी है
पीएम10 का राष्ट्रीय मानक नैक्स 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमी और विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 50 माइक्रोग्राम प्रति घनमी है। पीएम2.5 के लिए नैक्स का 40 और डब्ल्यूएसओ का 25 माइक्रोग्राम प्रति घनमी मानक है।
अमौसी में चारबाग और रिहायशी इलाकों से भी कम प्रदूषण
आईआईटीआर की रिपोर्ट बताती है कि चारबाग में वायु प्रदूषण का स्तर अमौसी औद्योगिक क्षेत्र से अधिक मिला है। अमौसी में पीएम10 का औसत 189.2 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर और पीएम2.5 का औसत 79.8 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पाया गया है। यह चारबाग, आलमबाग, अलीगंज, गोमतीनगर, विकासनगर, इंदिरानगर, चौक से भी कम है।
चिंता इसलिए : पीएम2.5 अति सूक्ष्मकण फेफड़े को पहुंचा सकते हैं गंभीर नुकसान
रिपोर्ट के मुताबिक रिहायशी और आवासीय इलाकों में पीएम2.5 कण का मानक से अधिक होना खतरनाक हो सकता है। यह पीएम10 से अधिक खतरनाक इसलिए होता है। क्योंकि, पीएम10 बलगम के साथ बाहर फेफड़ों से निकल जाता है। वहीं पीएम2.5 फेफड़ों के अंदर छोटे साइज की वजह से प्रवेश कर जाता है। इससे जहां अस्थमा जैसी बीमारियां गंभीर हो जाती हैं। वहीं फेफड़ों का कैंसर और संक्रमण जैसी समस्याएं होने की आशंका भी बढ़ जाती है।
पीएम10 का राष्ट्रीय मानक नैक्स 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमी और विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 50 माइक्रोग्राम प्रति घनमी है। पीएम2.5 के लिए नैक्स का 40 और डब्ल्यूएसओ का 25 माइक्रोग्राम प्रति घनमी मानक है।
अमौसी में चारबाग और रिहायशी इलाकों से भी कम प्रदूषण
आईआईटीआर की रिपोर्ट बताती है कि चारबाग में वायु प्रदूषण का स्तर अमौसी औद्योगिक क्षेत्र से अधिक मिला है। अमौसी में पीएम10 का औसत 189.2 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर और पीएम2.5 का औसत 79.8 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पाया गया है। यह चारबाग, आलमबाग, अलीगंज, गोमतीनगर, विकासनगर, इंदिरानगर, चौक से भी कम है।
चिंता इसलिए : पीएम2.5 अति सूक्ष्मकण फेफड़े को पहुंचा सकते हैं गंभीर नुकसान
रिपोर्ट के मुताबिक रिहायशी और आवासीय इलाकों में पीएम2.5 कण का मानक से अधिक होना खतरनाक हो सकता है। यह पीएम10 से अधिक खतरनाक इसलिए होता है। क्योंकि, पीएम10 बलगम के साथ बाहर फेफड़ों से निकल जाता है। वहीं पीएम2.5 फेफड़ों के अंदर छोटे साइज की वजह से प्रवेश कर जाता है। इससे जहां अस्थमा जैसी बीमारियां गंभीर हो जाती हैं। वहीं फेफड़ों का कैंसर और संक्रमण जैसी समस्याएं होने की आशंका भी बढ़ जाती है।
इन नौ इलाकों से लिए गए नमूने
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नौ इलाकों से लिए गए नमूने
विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर जारी इस रिपोर्ट के लिए आईआईटीआर के वैज्ञानिकों की टीम ने नौ इलाकों में अप्रैल-मई महीने में नमूने लिए। इन नौ इलाकों में चार आवासीय (अलीगंज, विकासनगर, इंदिरानगर, गोमतीनगर), चार व्यावसायिक (चारबाग, आलमबाग, अमीनाबाद, चौक) और एक औद्योगिक क्षेत्र अमौसी शामिल है। सभी जगहों पर पीएम10 और पीएम2.5 का लेवल हवा में डब्ल्यूएचओ और नैक्स के मानकों से अधिक मिला है।
राहत भी : हवा में सीसा और निकिल की मात्रा घटी
रिपोर्ट में सबसे ज्यादा राहत वाली बात है कि हवा में हैवी मेटल्स की मौजूदगी घटी है। सीसा यानी लेड की मात्रा सबसे अधिक अमौसी में 87.53 नैनोग्राम प्रति घनमीटर मिली है। वहीं निकिल की सबसे अधिक मात्रा चारबाग में 16.95 नैनोग्राम प्रति घनमी मिली है। नैक्स के मानक के हिसाब से हवा में लेड 1000 नैनोग्राम प्रति घनमीटर और निकिल के लिए 20 नैनोग्राम प्रति घनमीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर जारी इस रिपोर्ट के लिए आईआईटीआर के वैज्ञानिकों की टीम ने नौ इलाकों में अप्रैल-मई महीने में नमूने लिए। इन नौ इलाकों में चार आवासीय (अलीगंज, विकासनगर, इंदिरानगर, गोमतीनगर), चार व्यावसायिक (चारबाग, आलमबाग, अमीनाबाद, चौक) और एक औद्योगिक क्षेत्र अमौसी शामिल है। सभी जगहों पर पीएम10 और पीएम2.5 का लेवल हवा में डब्ल्यूएचओ और नैक्स के मानकों से अधिक मिला है।
राहत भी : हवा में सीसा और निकिल की मात्रा घटी
रिपोर्ट में सबसे ज्यादा राहत वाली बात है कि हवा में हैवी मेटल्स की मौजूदगी घटी है। सीसा यानी लेड की मात्रा सबसे अधिक अमौसी में 87.53 नैनोग्राम प्रति घनमीटर मिली है। वहीं निकिल की सबसे अधिक मात्रा चारबाग में 16.95 नैनोग्राम प्रति घनमी मिली है। नैक्स के मानक के हिसाब से हवा में लेड 1000 नैनोग्राम प्रति घनमीटर और निकिल के लिए 20 नैनोग्राम प्रति घनमीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
देखें- प्रदूषण कम करने के लिए ये सुझाव दिए
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प्रदूषण कम करने के लिए ये सुझाव दिए, कुछ सिस्टम को फॉलो करना है कुछ आप कीजिए
- शहर की सड़कों को यथा संभव चौड़ा रखा जाए
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे मेट्रो, मोनो रेल को बढ़ावा दिया जाए
- चौराहों पर यातायात को सुगम किया जाए
- पैदल यात्रियों केलिए फुटपाथ का निर्माण हो
- यातायात प्रबंधन को ठीक किया जाए
- व्यक्तिगत वाहनों के उपयोग को न्यूनतम किया जाए
- प्रेशर हार्न का उपयोग प्रतिबंधित हो
- पत्तियां, कूड़ा और टायर जलाने को रोका जाए
- बैटरी चालित या हाइब्रिड वाहनों को प्रोत्साहित किया जाए
- पार्कों में हरियाली और पेड़ों की संख्या बढ़े
- एयर स्क्रबर का उपयोग घने ट्रैफिक वाले इलाकों में हो
- शहर की सड़कों को यथा संभव चौड़ा रखा जाए
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे मेट्रो, मोनो रेल को बढ़ावा दिया जाए
- चौराहों पर यातायात को सुगम किया जाए
- पैदल यात्रियों केलिए फुटपाथ का निर्माण हो
- यातायात प्रबंधन को ठीक किया जाए
- व्यक्तिगत वाहनों के उपयोग को न्यूनतम किया जाए
- प्रेशर हार्न का उपयोग प्रतिबंधित हो
- पत्तियां, कूड़ा और टायर जलाने को रोका जाए
- बैटरी चालित या हाइब्रिड वाहनों को प्रोत्साहित किया जाए
- पार्कों में हरियाली और पेड़ों की संख्या बढ़े
- एयर स्क्रबर का उपयोग घने ट्रैफिक वाले इलाकों में हो