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UP News: पहले सिस्टम सुधारें...फिर बिजली दरों पर करें बात, उपभोक्ता परिषद बोला-पीक ऑवर्स में कांपते हैं सिस्टम

Thu, 21 Aug 2025 09:02 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 21 Aug 2025 09:02 AM IST
सार

नियामक आयोग में पॉवर ट्रांसमिशन व यूपीएसएलडीसी ने अपना पक्ष रखा। इसमें उपभोक्ता परिषद ने कहा कि पहले सिस्टम सुधारें फिर बिजली दरों पर बात करें। पीक ऑवर्स में सिस्टम हैंग हो जाते हैं।

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Power Transmission and UPSLDC presented their side in Regulatory Commission regarding
कंप्यूटर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

बिजली दरों के निर्धारण की चल रही सुनवाई के तहत बुधवार को उप्र. पॉवर ट्रांसमिशन व यूपीएसएलडीसी ने पक्ष रखे। इस दौरान उपभोक्ता परिषद ने मांग की है कि पहले ट्रांसमिशन के सिस्टम (उपकरणों) का भार सही किया जाए फिर बिजली दर व ट्रांसमिशन चार्ज बढ़ाने की बात की जाए।

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विद्युत नियामक आयोग में अध्यक्ष अरविंद कुमार व सदस्य संजय कुमार सिंह की उपस्थिति में पॉवर ट्रांसमिशन के अधिकारियों ने प्रजेंटेशन दिया। इसके बाद उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पॉवर ट्रांसमिशन ने इस बार अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक राजस्व आवश्यकता 6279 करोड़ दाखिल किया है। यह जनता पर भार डालने की साजिश है। 
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इस पर आयोग को गंभीरता से विचार करना चाहिए। वर्मा ने कहा कि पहले उपकरणों की क्षमता बढ़ाई जानी चाहिए क्योंकि गर्मी में पीक ऑवर्स में डायवर्सिटी फैक्टर 1:1 होते ही इनका सिस्टम कांपने लगता है। ऊपर से बिजली चोरी का लोड भी इसी सिस्टम पर आता है। ऐसे में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को सुचारु रूप से 24 घंटा बिजली नहीं मिल पाती है।
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वर्मा ने कहा कि यूपीएसएलडीसी स्वतंत्र होकर काम करे। आज भी केंद्र सरकार के बनाए कानून के तहत 24 घंटे विद्युत आपूर्ति के मामले पर यूपीएसएलडीसी चुप रहता है। उन्होंने पॉवर ट्रांसमिशन के टैरिफ पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि सबसे पहले पॉवर ट्रांसमिशन सिर्फ रिटर्न ऑफ इक्विटी लाभांश 2% लेता था। 


इस बार 14.5% लेने की बात कही गई है। इससे उपभोक्ताओं पर सीधे तौर पर 1824 करोड़ का भार आएगा। अगर आयोग इसे मंजूर करता है तो टैरिफ बेस कॉम्पिटेटिव बिडिंग की प्रक्रिया जो निजीकरण को बढ़ावा दे रही है पर पूर्णतया प्रतिबंध लगना चाहिए।

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