ग्रामीण उपभोक्ताओं को भी लगेगा तगड़ा ‘झटका’
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजली के नए टैरिफ से ग्रामीण क्षेत्र के घरेलू उपभोक्ताओं को भी तगड़ा ‘झटका’ धीरे से लगेगा।
हालांकि पावर कॉर्पोरेशन कह रहा है कि ग्रामीण उपभोक्ताओं के बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि नए टैरिफ में ग्रामीण बिजली उपभोक्ताओं की दरें प्रति कनेक्शन के बजाय प्रति किलोवॉट कर दी गई हैं।
ऐसे में ग्रामीण उपभोक्ताओं का बिल काफी बढ़ जाएगा। उत्तर प्रदेश राज्य उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इस समय प्रदेश में बगैर मीटर वाले ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या 47,16,315 है।
वर्तमान लागू दर 180 रुपये प्रति कनेक्शन के आधार पर 85 करोड़ रुपये प्रतिमाह और सालाना लगभग 1020 करोड़ राजस्व पावर कॉर्पोरेशन को मिलता है। नए टैरिफ से 180 रुपये प्रति किलोवॉट के आधार पर लगभग 141 करोड़ रुपये प्रतिमाह राजस्व मिलेगा। इस तरह पूरे साल में लगभग 1692 करोड़ रुपये राजस्व मिलेगा।
रेगुलेटरी सरचार्ज भी देना होगा 20 साल तक
ऐसे में नए आदेश के अनुसार ग्रामीण उपभोक्ताओं को साल में लगभग 672 करोड़ रुपये ज्यादा देने पड़ेंगे। इसके अलावा उन्हें 2.38 प्रतिशत रेगुलेटरी सरचार्ज भी 20 साल तक देना पड़ेगा।
ऐसे में पावर कॉर्पोरेशन का यह कहना कि ग्रामीण क्षेत्र की बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को खुद हस्तक्षेप कर प्रदेश की जनता को राहत देनी चाहिए।
नए उपभोक्ताओं पर रेग्युलेटरी सरचार्ज लगाना गलत
वर्मा ने कहा कि रेग्युलेटरी सरचार्ज पिछले घाटे को पूरा करने के लिए लगाया जाता है। ऐसे में नए उपभोक्ताओं ने जब बीते सालों में बिजली का इस्तेमाल ही नहीं किया तो उन पर सरचार्ज लगाना कहां का इंसाफ है।