ये सात मुद्दे सुलझे तो खत्म होगी बिजली समस्या
सूबे में बिजली की व्यवस्था के मसले पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल के बीच मंगलवार को एक अहम बैठक होगी।
इससे पूर्व ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने केंद्र व राज्य सरकार के सामने सात अहम मुद्दे रखते हुए इन पर समाधान निकालने का आग्रह किया है। कहा, यूपी में बिजली सुधार के लिए राजनीति से ऊपर उठकर फैसले किए जाएं।
फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे व विद्युत अभियंता संघ के महासचिव डीसी दीक्षित ने कहा कि निजी घरानों पर अति निर्भरता के चलते पिछले दो दशकों में प्रदेश की बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
पिछले दस वर्षों में प्रदेश में निजी क्षेत्र को लगभग 16,610 मेगावाट क्षमता की नई बिजली परियोजनाएं दी गईं लेकिन इन परियोजनाओं पर काम नहीं शुरू हुआ।
जबकि इस दौरान सार्वजनिक क्षेत्र में अनपरा डी, पारीछा व हरदुआगंज में नई इकाइयां लग गई और उत्पादन भी शुरू हो गया।
अगर 16,610 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं में से आधी भी सरकारी क्षेत्र को दी गई होतीं तो वे पूरी हो जाती और प्रदेश बिजली के मामले में आत्म निर्भर होता। अभी बिजली की मांग और आपूर्ति में 3,000 मेगावाट का अंतर है। लिहाजा ऊर्जा नीति में बदलाव पहली जरूरत है।
बिजली आवंटन के गाडगिल फॉर्मूले में बदलाव जरूरी
फेडरेशन व अभियंता संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक दूसरा बड़ा मुद्दा इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2014 का है, जिसका 18 राज्यों ने विरोध किया है।
यूपी को इस पर अपनी स्पष्ट राय रखनी चाहिए। तो तीसरा मुद्दा केंद्र से राज्यों को मिलने वाली बिजली के फॉर्मूले में बदलाव का है।
गाडगिल फॉर्मूले से यूपी के हिस्से में कम बिजली आ रही है। जबकि छोटे राज्यों को जरूरत से ज्यादा बिजली मिल रही है। वहीं निजी कंपनियां सरप्लस बिजली बेचकर मुनाफा कमा रही हैं।
बिजली आवंटन नीति में बदलाव बड़ी जरूरत है। चौथा मुद्दा राष्ट्रीय ग्रिड में वेस्टर्न रीजन से बिजली लेने के लिए ट्रांसमिशन की कुल ट्रांसफर क्षमता में वृद्धि का है क्योंकि इसकी वजह से यूपी को पश्चिमी राज्यों से बिजली नहीं मिल पा रही है।
इसके अलावा नई सुपर क्रिटिकल इकाइयों के लिए पर्यावरणीय मंजूर, कोल ब्लॉक में खनन के लिए वन विभाग की मंजूरी, बिजली नेटवर्क दुरुस्त करने के लिए वित्तीय मदद और बिजली निगमों में ठेकेदारी प्रथा बंद करके रिक्त पदों पर नियमित भर्तियां करने के लिए श्रमिक नीति में बदलाव जैसे मुद्दों का भी सार्थक समाधान निकाला जाना चाहिए।