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लखनऊ: पावर कॉर्पोरेशन की अंधेरगर्दी, एडवांस में बिजली खरीद रहे प्रीपेड उपभोक्ताओं को बना दिया कर्जदार
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नरेश शर्मा, लखनऊ। बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देने का दम भरने वाले पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों ने अंधेरगर्दी मचा रखी है। राजधानी में करीब 10 हजार प्रीपेड उपभोक्ता हैं, जो एडवांस में बिजली खरीदने के बाद भी कर्जदार बना दिए गए हैं। हद तो ये कि गलती मानने की जगह बकाया वसूली के लिए इनके घर कर्मचारी भेजे जा रहे हैं। लखनऊ में कुल 28 हजार प्रीपेड कनेक्शन धारक उपभोक्ता हैं। इनमें सबसे ज्यादा 10,500 उपभोक्ता वृंदावन खंड में हैं। दूसरे नंबर पर राजभवन खंड है। यहां लगभग 3500 उपभोक्ता हैं। शहर के एक तिहाई से ज्यादा प्रीपेड बिजली उपभोक्ता फर्जी बिल भेजे जाने से बेहाल हैं।
60,722 जमा करो, तभी मिलेगी बिजली
मदन लाल ने पान दरीबा चारबाग में वर्ष 2018 में प्रीपेड मीटर बिजली कनेक्शन (खाता नंबर 5666389080) लिया था। तकनीकी खामी के चलते रिचार्ज न होने पर उसकी जगह पर वर्ष 2020 में दूसरा प्रीपेड बिजली कनेक्शन लिया। दूसरा कनेक्शन लेते ही उपकेंद्र के जेई ने उन्हें बुलाकर 60,722 रुपये का बकाया बताते हुए पर्ची लिख कर दी और कहा कि इसे जमा करने पर ही बिजली जला सकेंगे।
अर्शी हुसैन पर 95,860 की दिखाई देनदारी
नरही के रेनवे लाइफ अपार्टमेंट की अर्शी हुसैन ने अक्तूबर 2021 में चार किलोवाट का प्रीपेड बिजली कनेक्शन (खाता 0776334375) लिया था। वह हर माह प्रीपेड मीटर को रिचार्ज कर एडवांस में बिजली की रकम भरती हैं। उन्होंने नवंबर 2022 तक 95,860 रुपये की बिजली जलाई, जिसका एडवांस में बिल भर चुकी हैं, लेकिन पावर कॉर्पोरेशन यह रकम बकाया बता रहा है।
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चहेते कर्मियों ने शुरू कर दी कमाई
प्रीपेड कनेक्शन धारकों से कुछ खंडों में अभियंताओं के चहेते उपकेंद्र कर्मियों ने फर्जी बकाया बिल की वसूली के नाम पर कमाई शुरू कर दी है। ऐसी शिकायतें उच्च अफसरों से लेकर कॉल सेंटर के नंबर 1912 तक पर की जा रही हैं, लेकिन कार्रवाई के बजाय शिकायतों को दबा दिया जाता है।
अमर उजाला को बताई पीड़ा, तो खुली पोल
बांसमंडी के जेई के इशारे पर जब संविदाकर्मी ने मदन लाल की दुकान की बिजली काट दी तो उन्होंने साक्ष्यों के साथ ‘अमर उजाला’ को अपनी पीड़ा बताई। प्रकरण की पड़ताल शुरू की गई तो पता चला कि शहर में मदन जैसे करीब 10 हजार प्रीपेड बिजली उपभोक्ता इस मनमानी का शिकार हैं। यह भी पता चला कि पावर कॉर्पोरेशन में यह अंधेरगर्दी लगभग चार साल से चली आ रही है। ऐसे मामलोें के निस्तारण के लिए शक्ति भवन में निदेशक समेत तमाम अफसरों की फौज तैनात है, लेकिन सब मौज कर रहे हैं।
हर छह माह में सॉफ्टवेयर अपग्रेड, फिर भी खामी
लेसा के अधीक्षण अभियंता ने बताया कि अधिकतर प्रीपेड बिजली कनेक्शन सिक्योर एवं जीनस कंपनी के मीटर से दिए गए हैं। इन मीटरों का कनेक्शन पावर कॉर्पोरेशन के बिलिंग सिस्टम से नहीं है। इसके कारण एडवांस भुगतान भरने वालों के बिल भी बन रहे हैं, जबकि बिलिंग कंपनी हर छह माह में सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर रही है।
शिकायतें आएंगी तो जांच कराएंगे
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के निदेशक वाणिज्य योगेश कुमार का कहना है कि प्रीपेड कनेक्शन के उपभोक्ता जब बिजली की कीमत एडवांस में जमा करते हैं तो बिल छपने नहीं चाहिए। किसी तकनीकी खामी से ऐसे बिल छपने की शिकायतें मेरे पास आएंगी तो उनकी जांच कराएंगे।
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60,722 जमा करो, तभी मिलेगी बिजली
मदन लाल ने पान दरीबा चारबाग में वर्ष 2018 में प्रीपेड मीटर बिजली कनेक्शन (खाता नंबर 5666389080) लिया था। तकनीकी खामी के चलते रिचार्ज न होने पर उसकी जगह पर वर्ष 2020 में दूसरा प्रीपेड बिजली कनेक्शन लिया। दूसरा कनेक्शन लेते ही उपकेंद्र के जेई ने उन्हें बुलाकर 60,722 रुपये का बकाया बताते हुए पर्ची लिख कर दी और कहा कि इसे जमा करने पर ही बिजली जला सकेंगे।
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अर्शी हुसैन पर 95,860 की दिखाई देनदारी
नरही के रेनवे लाइफ अपार्टमेंट की अर्शी हुसैन ने अक्तूबर 2021 में चार किलोवाट का प्रीपेड बिजली कनेक्शन (खाता 0776334375) लिया था। वह हर माह प्रीपेड मीटर को रिचार्ज कर एडवांस में बिजली की रकम भरती हैं। उन्होंने नवंबर 2022 तक 95,860 रुपये की बिजली जलाई, जिसका एडवांस में बिल भर चुकी हैं, लेकिन पावर कॉर्पोरेशन यह रकम बकाया बता रहा है।
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चहेते कर्मियों ने शुरू कर दी कमाई
प्रीपेड कनेक्शन धारकों से कुछ खंडों में अभियंताओं के चहेते उपकेंद्र कर्मियों ने फर्जी बकाया बिल की वसूली के नाम पर कमाई शुरू कर दी है। ऐसी शिकायतें उच्च अफसरों से लेकर कॉल सेंटर के नंबर 1912 तक पर की जा रही हैं, लेकिन कार्रवाई के बजाय शिकायतों को दबा दिया जाता है।
अमर उजाला को बताई पीड़ा, तो खुली पोल
बांसमंडी के जेई के इशारे पर जब संविदाकर्मी ने मदन लाल की दुकान की बिजली काट दी तो उन्होंने साक्ष्यों के साथ ‘अमर उजाला’ को अपनी पीड़ा बताई। प्रकरण की पड़ताल शुरू की गई तो पता चला कि शहर में मदन जैसे करीब 10 हजार प्रीपेड बिजली उपभोक्ता इस मनमानी का शिकार हैं। यह भी पता चला कि पावर कॉर्पोरेशन में यह अंधेरगर्दी लगभग चार साल से चली आ रही है। ऐसे मामलोें के निस्तारण के लिए शक्ति भवन में निदेशक समेत तमाम अफसरों की फौज तैनात है, लेकिन सब मौज कर रहे हैं।
हर छह माह में सॉफ्टवेयर अपग्रेड, फिर भी खामी
लेसा के अधीक्षण अभियंता ने बताया कि अधिकतर प्रीपेड बिजली कनेक्शन सिक्योर एवं जीनस कंपनी के मीटर से दिए गए हैं। इन मीटरों का कनेक्शन पावर कॉर्पोरेशन के बिलिंग सिस्टम से नहीं है। इसके कारण एडवांस भुगतान भरने वालों के बिल भी बन रहे हैं, जबकि बिलिंग कंपनी हर छह माह में सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर रही है।
शिकायतें आएंगी तो जांच कराएंगे
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के निदेशक वाणिज्य योगेश कुमार का कहना है कि प्रीपेड कनेक्शन के उपभोक्ता जब बिजली की कीमत एडवांस में जमा करते हैं तो बिल छपने नहीं चाहिए। किसी तकनीकी खामी से ऐसे बिल छपने की शिकायतें मेरे पास आएंगी तो उनकी जांच कराएंगे।