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मुसलमानों में बहुविवाह : कानूनी प्रावधान की वैधता को चुनौती, हाईकोर्ट ने सरकार को पक्ष पेश करने का दिया समय
Fri, 20 Aug 2021 02:55 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 20 Aug 2021 02:55 PM IST
सार
कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति मुनीश्वर नाथ भंडारी और न्यायमूर्ति सुरेश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को यह आदेश हिंदू पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव पवन कुमार दास शास्त्री की जनहित याचिका पर दिया।
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लखनऊ हाईकोर्ट
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मुसलमानों में बहुविवाह के कानूनी प्रावधान की वैधता को चुनौती देने के मामले में केंद्र व यूपी सरकार को पक्ष रखने का आदेश दिया। इसके लिए दोनों सरकारों के वकीलों को दो हफ्ते का वक्त दिया। अगली सुनवाई 6 सिबंतर को होगी। कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति मुनीश्वर नाथ भंडारी और न्यायमूर्ति सुरेश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को यह आदेश हिंदू पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव पवन कुमार दास शास्त्री की जनहित याचिका पर दिया।
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याचिका में देश के मुसलमानों को बहुविवाह की इजाजत देने संबंधी मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लिकेशन एक्ट 1937 की धारा 2 को संविधान में दिए गए धर्म आदि के आधार पर भेदभाव की मनाही के मूल अधिकार का उल्लंघन करने वाली करार देने का आग्रह किया गया है। साथ ही द्विविवाह (पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह) की मनाही संबंधी भारतीय दंड संहिता की धारा 494 को भी या तो सबके लिए बगैर किसी धार्मिक भेदभाव के समान रूप से लागू करने या फिर इसे असांविधानिक करार देकर खत्म किए जाने के निर्देश सरकार को देने की गुजारिश की गई है।
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याची के अधिवक्ता अशोक पांडेय का कहना था कि धारा 494 हिंदुओं समेत अन्य समुदायों पर लागू होती है। इसके उल्लंघन में द्विविवाह करने पर आपराधिक केस में सात साल तक की सजा व जुर्माने का प्रावधान है। जबकि यह धारा मुसलमानों पर पर्सनल लॉ की वजह से प्रभावी नहीं होती है।
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