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लखनऊ में कई परिवारों ने सहेजी राजनीतिक विरासत, पीढ़ी दर पीढ़ी चढ़ते गए सत्ता की सीढ़ी
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सचिन त्रिपाठी, लखनऊ। तहजीब का शहर लखनऊ, सांस्कृतिक के साथ ही राजनैतिक विरासत सहेजने में भी आगे रहा है। यहां कई परिवारों ने लंबे समय तक विधानसभा में अपनी उपस्थिति बनाए रखी। इसके लिए किसी ने एक ही राजनैतिक पार्टी का सहारा लिया तो कई अलग-अलग पार्टियों से चुनाव लड़कर विधायक बने। कुछ निर्दलीय चुनाव लड़कर भी विधानसभा पहुंचे। जनता के बीच से निकले इन प्रतिनिधियों में से कई ने दो, तो किसी ने तीन पीढ़ी तक इस परंपरा को आगे बढ़ाया।
लखनऊ में वर्ष 1957 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर मलिहाबाद विधानसभा सीट से चुनाव जीतने वाले रामपाल त्रिवेदी के परिवार ने तीन पीढ़ी तक इस परंपरा को आगे बढ़ाया। रामपाल त्रिवेदी खुद 1957 के बाद 1962 में भी मलिहाबाद से चुनाव जीते। इसके बाद वह महोना सीट पर 1967, 1969 और 1974 में विधायक चुने गए। इसके बाद उनके भतीजे चंद्रशेखर त्रिवेदी ने भी महोना सीट से वर्ष 1980 में विधायक का चुनाव जीता। लंबे अंतराल के बाद चंद्रशेखर त्रिवेदी के पुत्र अविनाश त्रिवेदी ने वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में विजय दर्ज की। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस के बजाय भाजपा के टिकट पर यह उपलब्धि हासिल की। कांग्रेस के ही एक अन्य पूर्व विधायक डीपी बोरा के पुत्र डॉ. नीरज बोरा ने भी भाजपा के टिकट पर विजयश्री हासिल की। डीपी बोरा जहां लखनऊ पश्चिम सीट पर वर्ष 1969 और 1974 में चुनाव जीते तो वहीं उनके पुत्र डॉ. नीरज बोरा ने वर्ष 2017 चुनाव में लखनऊ उत्तर सीट पर अपना परचम लहराया।
उपचुनाव में बदली पार्टी
लखनऊ की मलिहाबाद विधानसभा सीट से वर्ष 1993, 1996 और 2007 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले गौरीशंकर के पुत्र सिद्धार्थ शंकर भी इस परंपरा को आगे बढ़ाने में कामयाब रहे। हालांकि, उन्होंने यह कामयाबी सपा के बजाय बहुजन समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर हासिल की। सिद्धार्थ शंकर वर्ष 2009 में हुए उपचुनाव में मलिहाबाद विधानसभा सीट से ही चुनाव जीते।
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एक ही पार्टी में रहकर आगे बढ़ाई विरासत
लखनऊ में एक तरफ एक ही परिवार के विधायकों ने अलग-अलग पार्टी के सहारे राजनैतिक विरासत आगे बढ़ाई। वहीं लखनऊ के पूर्व सांसद और कई बार विधायक रहे लालजी टंडन के पुत्र आशुतोष टंडन गोपालजी भाजपा के टिकट पर ही चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे। लालजी टंडन लखनऊ पश्चिम से वर्ष 1996, 2002 और 2007 में चुनाव जीते। वहीं आशुतोष टंडन ने लखनऊ पूर्व सीट से 2017 में चुनाव जीता।
पति निर्दलीय, पत्नी भाजपा के टिकट पर विधायक
एक ही परिवार से विधायक बनने वालों की सूची में भाजपा के मोहनलालगंज सीट से मौजूदा सांसद कौशल किशोर का नाम भी आता है। कौशल किशोर मलिहाबाद सीट पर वर्ष 2002 में निर्दलीय चुनाव जीते थे। इसके बाद वे भाजपा में शामिल होकर सांसद बन गए। वर्ष 2017 में इसी सीट से उनकी पत्नी जयदेवी कौशल विधायक चुनी गईं।
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लखनऊ में वर्ष 1957 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर मलिहाबाद विधानसभा सीट से चुनाव जीतने वाले रामपाल त्रिवेदी के परिवार ने तीन पीढ़ी तक इस परंपरा को आगे बढ़ाया। रामपाल त्रिवेदी खुद 1957 के बाद 1962 में भी मलिहाबाद से चुनाव जीते। इसके बाद वह महोना सीट पर 1967, 1969 और 1974 में विधायक चुने गए। इसके बाद उनके भतीजे चंद्रशेखर त्रिवेदी ने भी महोना सीट से वर्ष 1980 में विधायक का चुनाव जीता। लंबे अंतराल के बाद चंद्रशेखर त्रिवेदी के पुत्र अविनाश त्रिवेदी ने वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में विजय दर्ज की। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस के बजाय भाजपा के टिकट पर यह उपलब्धि हासिल की। कांग्रेस के ही एक अन्य पूर्व विधायक डीपी बोरा के पुत्र डॉ. नीरज बोरा ने भी भाजपा के टिकट पर विजयश्री हासिल की। डीपी बोरा जहां लखनऊ पश्चिम सीट पर वर्ष 1969 और 1974 में चुनाव जीते तो वहीं उनके पुत्र डॉ. नीरज बोरा ने वर्ष 2017 चुनाव में लखनऊ उत्तर सीट पर अपना परचम लहराया।
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उपचुनाव में बदली पार्टी
लखनऊ की मलिहाबाद विधानसभा सीट से वर्ष 1993, 1996 और 2007 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले गौरीशंकर के पुत्र सिद्धार्थ शंकर भी इस परंपरा को आगे बढ़ाने में कामयाब रहे। हालांकि, उन्होंने यह कामयाबी सपा के बजाय बहुजन समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर हासिल की। सिद्धार्थ शंकर वर्ष 2009 में हुए उपचुनाव में मलिहाबाद विधानसभा सीट से ही चुनाव जीते।
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एक ही पार्टी में रहकर आगे बढ़ाई विरासत
लखनऊ में एक तरफ एक ही परिवार के विधायकों ने अलग-अलग पार्टी के सहारे राजनैतिक विरासत आगे बढ़ाई। वहीं लखनऊ के पूर्व सांसद और कई बार विधायक रहे लालजी टंडन के पुत्र आशुतोष टंडन गोपालजी भाजपा के टिकट पर ही चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे। लालजी टंडन लखनऊ पश्चिम से वर्ष 1996, 2002 और 2007 में चुनाव जीते। वहीं आशुतोष टंडन ने लखनऊ पूर्व सीट से 2017 में चुनाव जीता।
पति निर्दलीय, पत्नी भाजपा के टिकट पर विधायक
एक ही परिवार से विधायक बनने वालों की सूची में भाजपा के मोहनलालगंज सीट से मौजूदा सांसद कौशल किशोर का नाम भी आता है। कौशल किशोर मलिहाबाद सीट पर वर्ष 2002 में निर्दलीय चुनाव जीते थे। इसके बाद वे भाजपा में शामिल होकर सांसद बन गए। वर्ष 2017 में इसी सीट से उनकी पत्नी जयदेवी कौशल विधायक चुनी गईं।