{"_id":"6901303fd0b82f2e6a0037ac","slug":"polices-remand-application-rejected-for-arrest-without-giving-any-reason-lucknow-news-c-13-knp1050-1445136-2025-10-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: बिना कारण बताए गिरफ्तार करने पर पुलिस की रिमांड अर्जी खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: बिना कारण बताए गिरफ्तार करने पर पुलिस की रिमांड अर्जी खारिज
Wed, 29 Oct 2025 02:36 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Wed, 29 Oct 2025 02:36 AM IST
विज्ञापन
लखनऊ। एससी-एसटी एक्ट के मामले में बिना कारण बताए आरोपी को गिरफ्तार करने और कोर्ट में पेश करने पर एससी-एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने मड़ियाव पुलिस की रिमांड अर्जी खारिज करते हुए आरोपी को रिहा कर दिया। कोर्ट ने आरोपी अशर्फी लाल को 50 हजार रुपये के मुचलके और अंडरटेकिंग दाखिल करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि अशरफी लाल को गिरफ्तार करने वाले मड़ियांव थाने के दरोगा अखिलेश कुमार की इस कार्यवाही की जानकारी कमिश्नर को दी जाए। पत्रावली के अनुसार मड़ियांव पुलिस ने वर्ष 2023 में आत्महत्या के लिए उकसाने, मारपीट, एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य मामले में दर्ज मुकदमे में आरोपी अशर्फी लाल को 26 अक्तूबर को गिरफ्तार किया। अगले दिन कोर्ट में पेश करके कोर्ट से आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने की मांग की।
कोर्ट ने जब पुलिस के कागजात की जांच की तो पाया कि दरोगा अखिलेश कुमार ने साथी पुलिसकर्मियों की मदद से आरोपी को गिरफ्तार किया था। कागजात में उस खाते को खाली छोड़ दिया, जिसमें आरोपी को गिरफ्तार करने का कारण लिखा जाता है।
विज्ञापन
कोर्ट ने आरोपी का रिमांड खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर किसी व्यक्ति को बिना कारण बताए गिरफ्तार किया जाता है तो ऐसी गिरफ्तारी अवैध मानी जाएगी।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा कि अशरफी लाल को गिरफ्तार करने वाले मड़ियांव थाने के दरोगा अखिलेश कुमार की इस कार्यवाही की जानकारी कमिश्नर को दी जाए। पत्रावली के अनुसार मड़ियांव पुलिस ने वर्ष 2023 में आत्महत्या के लिए उकसाने, मारपीट, एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य मामले में दर्ज मुकदमे में आरोपी अशर्फी लाल को 26 अक्तूबर को गिरफ्तार किया। अगले दिन कोर्ट में पेश करके कोर्ट से आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने की मांग की।
विज्ञापन
कोर्ट ने जब पुलिस के कागजात की जांच की तो पाया कि दरोगा अखिलेश कुमार ने साथी पुलिसकर्मियों की मदद से आरोपी को गिरफ्तार किया था। कागजात में उस खाते को खाली छोड़ दिया, जिसमें आरोपी को गिरफ्तार करने का कारण लिखा जाता है।
विज्ञापन
कोर्ट ने आरोपी का रिमांड खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर किसी व्यक्ति को बिना कारण बताए गिरफ्तार किया जाता है तो ऐसी गिरफ्तारी अवैध मानी जाएगी।