लखनऊः निर्भया कांड के छह साल बाद टूटी पुलिस की नींद, इन इलाकों में बनेंगे पिंक बूथ
निर्भया कांड के बाद महिला सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बनी योजना के छह साल बाद लखनऊ पुलिस की नींद टूटी है। अब तक महिला सुरक्षा के खोखले दावे करने वाली पुलिस ने पिंक बूथ का खाका तैयार किया है। हालांकि, पिंक बूथ सिर्फ शहर के 100 चिह्नित स्थानों पर ही बनाने का प्रस्ताव है।
ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए फिलहाल कोई योजना नहीं है। पुलिस प्रवक्ता का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अगले चरण में पिंक बूथ बनाए जाएंगे। हालांकि, पहले चरण में पिंक बूथ बनकर कब तक तैयार हो जाएंगे? इसका बजट क्या होगा?
पिंक बूथ पर तैनात पुलिसकर्मियों के मानक क्या होंगे? इस बारे में किसी अधिकारी के पास कोई जानकारी नहीं है। दरअसल निर्भया फंड का अभी तक पुलिस अधिकारियों ने इस्तेमाल नहीं किया। हैदराबाद में पशु चिकित्सक से गैंगरेप व जिंदा जलाकर मारने और उन्नाव में गैंगरेप पीड़िता की जलाकर हत्या के बाद निर्भया फंड का इस्तेमाल न होने से अधिकारियों पर सवाल उठने लगे।
इसके बाद आनन-फानन पिंक बूथ की योजना तैयार कर सूची जारी कर दी गई। सबसे हैरत की बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पिंक बूथ बनाने पर कोई विचार नहीं किया गया, जबकि वहां महिलाओं से दुष्कर्म, छेड़छाड़ और उत्पीड़न की घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं।
गोमतीनगर व हजरतगंज में होंगे सबसे ज्यादा बूथ
वहीं हजरतगंज में नरही तिराहा, परिवर्तन चौक, नेशनल पीजी कॉलेज, हजरतगंज का मेट्रो स्टेशन और लालबाग चौराहे पर इनकी स्थापना होगी। गाजीपुर, पीजीआई, मड़ियांव, ठाकुरगंज, बाजारखाला और सआदतगंज में चार-चार, कैसरबाग, कृष्णानगर, सरोजनीनगर, बंथरा, आलमबाग, कैंट, आशियाना, चिनहट, अलीगंज, महानगर, हसनगंज, चौक, इंदिरानगर, तालकटोरा और गुडंबा में तीन-तीन तथा विभूतिखंड, हुसैनगंज, गौतमपल्ली, मानकनगर, पारा, जानकीपुरम, विकासनगर, अमीनाबाद, नाका और वजीरगंज में दो-दो बूथ बनवाए जाने हैं।
वीआईपी हजरतगंज और घनी आबादी वाले हसनगंज में स्ट्रीट लाइटें खराब
हसनगंज में 35 स्थान मिले तो हजरतगंज में 21 जगहों पर स्ट्रीट लाइट नहीं पाई गई। स्ट्रीट लाइट के मामले में ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति भी खराब पाई गई। वहां बीकेटी, इटौंजा, मोहनलालगंज, निगोहां, गोसाईंगंज, नगराम, मलिहाबाद, माल और काकोरी में 17 स्थान पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं मिली।
इसमें कुछ स्कूल-कॉलेज, कोचिंग संस्थान और हॉस्टल भी शामिल हैं। मड़ियांव में 17, अमीनाबाद में 15, वजीरंज में 14, नाका और बाजारखाला में 13-13, कैसरबाग और चौक में 12-12, विकासनगर और कृष्णानगर में 10-10 व जानकीपुरम में सात जगहों पर स्ट्रीट लाइट नहीं दिखी अथवा खराब मिली।
पुलिस कार्यालयों के बाहर भी अंधेरा
स्ट्रीट लाइट की पड़ताल में चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं। वजीरगंज स्थित पुलिस ऑफिस के सामने ही अंधेरा रहता है। कई सीओ के कार्यालय व थानों की सड़क पर स्ट्रीट लाइट खराब पड़ी हैं तो वीआईपी इलाकों का भी हाल बुरा है।
वजीरगंज में चार बत्ती चौराहा से केके अस्पताल तक की सड़क पर स्ट्रीट लाइट नहीं है। केके अस्पताल के सामने ही पुलिस ऑफिस है जहां एसएसपी और उनका पूरा स्टाफ बैठता है। इसी तरह कैंट सीओ के ऑफिस से पीछे देवीखेड़ा जाने वाली सड़क पर स्ट्रीट लाइट नहीं लगी है तो विभूतिखंड थाना वाली सड़क पर लगी स्ट्रीट लाइट काफी समय से काम नहीं कर रही है।