मां की मौत, तीन अबोध बच्चियां... मामा ने कहा- लावारिस में डाल दो
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तीन अबोध बेटियों के साथ अकेले रहती थी। कोई कहता पति की मौत हो गई, कोई बताता दो-तीन वर्ष पहले छोड़कर चला गया। वह पोस्ट ग्रेजुएट होते हुए अस्पताल में साफ-सफाई का काम करती और इन बेटियों को आलमबाग के एक किराए के मकान में रहते हुए पाल रही थी।
सबकुछ ठीक था, लेकिन दो हफ्ते पहले बीमार हुईं तो सिविल अस्पताल में भर्ती की गई। यहां मंगलवार दोपहर को उसने दम तोड़ दिया। उसकी मौत के साथ ही उसकी तीनों बेटियां बेसहारा हो गईं।
अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को तो पुलिस ने चाइल्ड लाइन को सूचित किया। उन्हें बालगृह में आश्रय दिलाया गया है।सिविल अस्पताल में इलाज करा रही लंगड़ा फाटक सीताराम मंदिर आलमबाग निवासी मृतक रीता देवी उर्फ बबली मिश्रा की उम्र 37 वर्ष बताई जा रही है।
सोनी उसकी सबसे बड़ी बेटी आठ साल की है। उससे छोटी सिमरन छह साल की और सबसे छोटी कृष्णा तीन साल है। इन तीनों का ही मां की मौत के बाद रो-रोकर बुरा हाल है। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे कहां जाएंगी।
अस्पताल के मुताबिक, बबली 11 फरवरी को सिविल अस्पताल में भर्ती हुई थी। उसे तेज बुखार था। जांच में उसे टीबी बताया गया जिसका इलाज चल रहा था। 10 दिन चली जिंदगी और मौत की जंग वो मंगलवार को हार गई।
भाई बोला- उसका कोई बहन नहीं
अस्पताल स्टाफ के मुताबिक, अस्पताल प्रशासन ने मृतक बबीता के परिवारीजनों से संपर्क करना चाह लेकिन बबीता के भाई से बात होने पर उसने, उसकी कोई बहन न होने की बात करते हुए कहा कि लावारिस में डाल दीजिए।
हजरतगंज पुलिस को जानकारी दी गई तो पुलिस ने बच्चों के संरक्षण को लेकर चाइल्ड लाइन को बच्चे सौंप दिए। चाइल्ड लाइन सदस्य विजय पाठक ने बताया कि तीनों बच्चियां के साथ काफी सामान भी मिला है।
इसमें एक मोबाइल फोन और 1300 रुपये के साथ उसकी इंटर बीए व एमए की मार्कशीट भी हैं। इसके अलावा मृतक का बायोडाटा भी मिला है। मृतक बबली मिश्रा का नाम मार्कशीट पर रीता देवी दर्ज है।
जिसमें वे लंगड़ा फाटक सीताराम मंदिर पर किराए के मकान में रहने की जानकारी है, जबकि स्थाई निवासी गोसाईगंज सदरपुर करोरा की जानकारी मिली है। मां के मरने के बाद अस्पताल ने हजरतगंज पुलिस को सूचित किया।
राजकीय बालगृह में दिलाया आश्रय
यहां पहुंचकर पुलिस ने चाइल्ड लाइन को सूचित किया। सदस्य मनोज वर्मा और टीम ने बच्चियों को अपने संरक्षण में लिया और उन्हें बाल कल्याण समिति को जानकारी देते हुए प्राग नारायण रोड स्थित राजकीय बाल गृह में आश्रय दिलाया है।
चाइल्ड लाइन समन्वयक अजीत कुशवाहा ने बताया कि तीनों बेटियां स्वस्थ हैं, लेकिन, मोनू की पीट जली हुई। मां की मौत के बाद बेहद दुखी हैं। उनका संरक्षण और सुरक्षा फिलहाल सबसे प्रमुख है और इसके अलावा कोशिश की जाएगी कि बच्चियों के किसी करीबी रिश्तेदार से संपर्क हो सके जो उनकी देखभाल में सक्षम हो।
... मोनू मिश्रा पहले पिता अब मां से बिछड़ने से सदमे में है... कुछ पूछने से पहले ही बोली अंकल हमें अलग तो नहीं करोगे, हम सब को एक साथ ही रहने दो। पापा पहले मर चुके हैं, मम्मी आज मर गईं।
हमारे घर में बहुत सामान है, बेड कुर्सी टीवी फ्रिज सब कुछ है। मोनू के मुताबिक, मां अस्पताल में साफ-सफाई का काम करती थी और वे स्कूल जाती थी। इस बीच सिमरन बोली, अंकल नहीं, मेरे पापा मुकेश घर से भाग गए, यह तो मम्मी कहती थी...पापा का एक्सीडेंट हो गया वे मर गए।