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गिरधारी ने पिस्टल छीन चलाई थीं नौ गोलियां, बचाव में चलाई गई गोली से मारा गया, एनकाउंटर मामले में पुलिस ने कोर्ट में दाखिल किया जवाब
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मुठभेड़ मामले में पुलिस ने दाखिल किया जवाब।
लखनऊ। कठौता चौराहे पर अजीत सिंह की हत्या करने के आरोपी रहे कन्हैया विश्वकर्मा उर्फ गिरधारी उर्फ डॉक्टर की पुलिस रिमांड के दौरान मुठभेड़ में मौत के मामले में पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर, एसीपी प्रवीण मलिक,डीसीपी संजीव सुमन और थानाध्यक्ष विभूति खंड चंद्रशेखर सिंह ने शुक्रवार को हलफ नामा पर अपना जवाब दाखिल कर दिया। इसमें कहा गया कि गिरधारी ने दरोगा की पिस्टल लूट ली और एक दरोगा पर गोली चला दी। बचाव में उसपर गोली चलाना पड़ा। मामले को लेकर दायर परिवाद पर जिला न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा के नोटिस जारी कर अफसरों से जवाब तलब किया था।
पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर, डीसीपी संजीव सुमन, एसीपी प्रवीण मलिक और थानाध्यक्ष विभूतिखंड चंद्रशेखर सिंह ने हलफ नामा दाखिल कर बताया कि असलहा बरामदगी के दौरान गिरधारी ने हाथ और सिर से हमला करके दरोगा की पिस्टल लूटी और एक दरोगा के हाथ मे गोली मार दी। थाना प्रभारी के सीने में भी गोली मारी लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट के चलते वो बच गए। कहा गया कि गिरधारी ने कुल 9 गोलियां चलाईं और बचाव में चलाई गई पुलिस की गोली से वह घायल हो गया। उसकी जान बचाने के लिए लोहिया अस्पताल भेजा गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
सभी प्रक्रिया का पालन...निष्पक्ष जांच कराई जा रही
हलफनामे में यह भी कहा गया कि इस अप्रत्याशित घटना में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए आरोपी का पंचनामा मजिस्ट्रेट से कराया गया। पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराई गई। मामले की रिपोर्ट दर्ज कर दूसरे जोन स्थित हजरतगंज के एसीपी से निष्पक्ष विवेचना कराई जा रही है। मामले की न्यायिक जांच के लिए सभी तथ्यों से अवगत कराते हुए न केवल डीएम को अवगत कराया गया बल्कि मानवाधिकार आयोग, सीजेएम को अवगत कराया गया। घटना में प्रयुक्त हथियारों को जमा कर लिया गया है। आगे कहा गया कि घटनास्थल से पिस्टल, खोखा, कारतूस, खून इकट्ठा किया गया साथ ही आरोपी के शव को उसके परिजनों को ससम्मान सुपुर्द किया गया है। शुक्रवार को सुनवाई के समय वादी के वकीलों ने पुलिस के हलफ नामे पर आपत्ति दाखिल करने के लिए समय की मांग की। इसपर कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 23 फ रवरी की तारीख तय करते हुए हलफ नामे की प्रति वादी के वकील को देने का आदेश दिया, साथ ही वादी को आपत्ति दाखिल करने का अवसर भी दिया।
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परिवाद में यह कहा गया
पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर, डीसीपी संजीव सुमन, एसीपी प्रवीण मलिक एवं इंस्पेक्टर विभूति खंड चंद्रशेखर सिंह के खिलाफ राकेश विश्वकर्मा की ओर से वकील प्रांशु अग्रवाल और आदेश सिंह ने गत बुधवार को परिवाद दाखिल किया था। मामला सुनवाई योग्य है या नहीं, इस बिंदु पर सुनवाई के लिए अदालत ने 20 फ रवरी की तारीख तय की थी। परंतु बृहस्पतिवार को वादी के वकीलों ने मामले की गंभीरता को लेकर तुरंत सुनवाई किए जाने की मांग करते हुए अर्जी दी और कहा कि वादी के भाई की कथित एनकाउंटर में हत्या कर दी गई। वहीं ऐसे मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी दिशा निर्देशों का पुलिस अधिकारियों ने पालन नहीं किया। अहम दस्तावेजों में छेड़छाड़ भी की जा रही है। कोर्ट ने बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए मामले में पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्या निर्देशों का पालन हुआ है या नहीं।
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पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर, डीसीपी संजीव सुमन, एसीपी प्रवीण मलिक और थानाध्यक्ष विभूतिखंड चंद्रशेखर सिंह ने हलफ नामा दाखिल कर बताया कि असलहा बरामदगी के दौरान गिरधारी ने हाथ और सिर से हमला करके दरोगा की पिस्टल लूटी और एक दरोगा के हाथ मे गोली मार दी। थाना प्रभारी के सीने में भी गोली मारी लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट के चलते वो बच गए। कहा गया कि गिरधारी ने कुल 9 गोलियां चलाईं और बचाव में चलाई गई पुलिस की गोली से वह घायल हो गया। उसकी जान बचाने के लिए लोहिया अस्पताल भेजा गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
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सभी प्रक्रिया का पालन...निष्पक्ष जांच कराई जा रही
हलफनामे में यह भी कहा गया कि इस अप्रत्याशित घटना में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए आरोपी का पंचनामा मजिस्ट्रेट से कराया गया। पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराई गई। मामले की रिपोर्ट दर्ज कर दूसरे जोन स्थित हजरतगंज के एसीपी से निष्पक्ष विवेचना कराई जा रही है। मामले की न्यायिक जांच के लिए सभी तथ्यों से अवगत कराते हुए न केवल डीएम को अवगत कराया गया बल्कि मानवाधिकार आयोग, सीजेएम को अवगत कराया गया। घटना में प्रयुक्त हथियारों को जमा कर लिया गया है। आगे कहा गया कि घटनास्थल से पिस्टल, खोखा, कारतूस, खून इकट्ठा किया गया साथ ही आरोपी के शव को उसके परिजनों को ससम्मान सुपुर्द किया गया है। शुक्रवार को सुनवाई के समय वादी के वकीलों ने पुलिस के हलफ नामे पर आपत्ति दाखिल करने के लिए समय की मांग की। इसपर कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 23 फ रवरी की तारीख तय करते हुए हलफ नामे की प्रति वादी के वकील को देने का आदेश दिया, साथ ही वादी को आपत्ति दाखिल करने का अवसर भी दिया।
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परिवाद में यह कहा गया
पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर, डीसीपी संजीव सुमन, एसीपी प्रवीण मलिक एवं इंस्पेक्टर विभूति खंड चंद्रशेखर सिंह के खिलाफ राकेश विश्वकर्मा की ओर से वकील प्रांशु अग्रवाल और आदेश सिंह ने गत बुधवार को परिवाद दाखिल किया था। मामला सुनवाई योग्य है या नहीं, इस बिंदु पर सुनवाई के लिए अदालत ने 20 फ रवरी की तारीख तय की थी। परंतु बृहस्पतिवार को वादी के वकीलों ने मामले की गंभीरता को लेकर तुरंत सुनवाई किए जाने की मांग करते हुए अर्जी दी और कहा कि वादी के भाई की कथित एनकाउंटर में हत्या कर दी गई। वहीं ऐसे मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी दिशा निर्देशों का पुलिस अधिकारियों ने पालन नहीं किया। अहम दस्तावेजों में छेड़छाड़ भी की जा रही है। कोर्ट ने बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए मामले में पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्या निर्देशों का पालन हुआ है या नहीं।