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अवैध टेलीफोन एक्सचेंज पकड़ा, एक हजार सिम बरामद, दो गिरफ्तार

Fri, 11 Nov 2022 08:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Nov 2022 08:00 AM IST
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Police caught illegal telephone exchange
अवैध टेलीफोन एक्सचेंज चलाने वाले आए पकड़ में। - फोटो : ??? ?????
आशियाना के सेक्टर-के इलाके में आठ महीने से इंजीनियर के मकान के बेसमेंट में अवैध टेलीफोन एक्सचेंज चलाया जा रहा था।
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आशियाना पुलिस व क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने छापा मारकर इंजीनियर व उसके साथी को गिरफ्तार कर लिया।
मौके से सात सिम बॉक्स, कंप्यूटर और करीब एक हजार एक्टीवेटेड सिमकार्ड बरामद किए। आरोपियों ने विदेशी कंपनियों की सर्विस ले रखी थी। इसकी मदद से वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) इंटरनेशनल कॉल कराते थे।
डीसीपी पूर्वी प्राची सिंह के मुताबिक, आरोपियों में इंजीनियर कुमार सौरभ कुशवाहा व उसका साथी भव्य रजत सिंह है।
सौरभ ने कुबूला कि कनाडा समेत कई देशों में वीओआईपी कॉल की सर्विस देने वाली कंपनियां हैं। इनकी सर्विस ले रखी थी। मुंबई के कुछ लोग तकनीकी मदद देते थे।
इन कंपनियों की कॉल एप के जरिए जनरेट होती है। इसे इंडियन टेलीफोन गेटवे की जगह अवैध एक्सचेंज पर मंगाया जाता था। इसके बाद कॉल को मनचाहे नंबर पर डायवर्ट कर दिया जाता था।
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विदेश से की जाने वाली कॉल काफी महंगी होती है। इसलिए लोग अक्सर एप के जरिए वीओआईपी कॉल करते हैं।
डीसीपी के मुताबिक, आरोपियों ने लाखों रुपये की राजस्व की चोट पहुंचाई है। आशियाना थाने में धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज तैयार करने, इंडियन टेलीग्राफ एक्ट और आईटी एक्ट की धारा में केस दर्ज किया गया है।
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एसीपी कैंट अनूप सिंह के मुताबिक, भव्य रजत मोबाइल का काम करता था। उसके पास सिम कार्ड लेने के लिए कई लोग आते थे।
पूछताछ में भव्य ने कुबूला कि अधिकांश लोग केवाईसी के लिए आधार कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। बातों में उलझाकर भव्य ग्राहक से दो से तीन बार फिंगर प्रिंट स्कैन कर लेता था।
इसके बाद एक आईडी पर एक सिम जारी कर देता था, जबकि उसी आईडी पर बाकी सिम जारी करा कर अपने पास रख लेता था। बाद में ये सिम कुमार सौरभ को दे देता था।
दो देशों के गेटवे को देते थे धोखा
क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर शिवानंद मिश्रा ने बताया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय कॉल के लिए दो देशों के नेटवर्क का गेटवे होता है। इसके जरिए ही कॉल की जाती है। इस गेटवे के जरिए होने वाली कॉल का रिकार्ड भी दोनों देशों और टेलीकॉम कंपनियों के पास रहता है, लेकिन इन जालसाजों ने दोनों देशों के गेटवे को भी धोखा दिया। इससे टेलीकॉम कंपनियों को भी आर्थिक चोट पहुंची। इंस्पेक्टर आशियाना अजय प्रकाश मिश्रा के मुताबिक, अवैध एक्सचेंज पर आने वाली कॉल का कोई रिकार्ड नहीं रहता है। अभी इस मामले में और कितने लोग शामिल हैं। इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
ऐसे तैयार होता है अवैध एक्सचेंज
अवैध एक्सचेंज तैयार करने के लिए वीओआईपी के तहत एक विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए एप बनाना होता है। इसके बाद हाईस्पीड कनेक्शन, बेसिक टेलीफोन, मॉडम राउटर, सिम, सिमबॉक्स, नेटवर्क कनेक्शन के लिए एंटीना, एंड्रायड मोबाइल, डाटा कनेक्टर पावर स्टेशन केबल की जरूरत होती है। इसके बाद जिन देशों में कनेक्टिविटी देनी हो वहां के रिचार्ज बाउचर की जरूरत पड़ती है।

ये हुआ बरामद
सात सिम बॉक्स, पांच कंप्यूटर सेट, दो प्रिंटर, छह इंटसेट राउटर, मोबाइल सिग्नल बूस्टर, दो टेलीफोन रिसीवर, छह स्टैंड, सिम बॉक्स में लगे 78 वोडाफोन, 95 जिओ, 259 एयरटेल के सिम बरामद। बाहर डिब्बों में रखे एयरटेल के 50 व बीएसएनएल के 407 सिम मिले। 15 क्रेडिट कार्ड, छह मोबाइल, एक रेडियो फ्रिक्वेंसी केबल और नकदी।
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