'जहर' का नया ठिकाना देख उबल गए गांव वाले!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मलिहाबाद में जहरीली शराब से 51 मौतों के बाद भी अवैध भट्ठियों को बंद नहीं किया जा सका है। शनिवार को चांदपुर गांव में शराब की भट्ठियां धधकती मिलीं तो ग्रामीण उबल पड़े। ग्रामीणों ने भट्ठियां तोड़कर भारी मात्रा में लहन व तैयार शराब नष्ट कर दी। वहां शराब बना रहे तीन लोग भाग निकले। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। तीनों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
शराब के गढ़ दतली और घोल गांव में पुलिस ने सख्ती की तो धंधेबाजों ने नए ठिकाने तलाश लिए हैं। अब आसपास के गांवों में शराब की भट्ठियां धधकने लगी हैं। शनिवार को प्रयत्न फाउंडेशन की अध्यक्ष नाहिद अकील ने चांदपुर गांव में नशा मुक्ति जागरूकता अभियान की शुरुआत की है।
इसी दौरान कुछ ग्रामीणों ने बताया कि चांदपुर गांव का हरिपाल और उसका बेटा गुड्डू तथा घोल गांव में रहने वाला रिश्तेदार मुन्ना अवैध रूप से शराब बना रहे हैं। इस पर लोग उबल पड़े और उधर का रुख कर दिया।
तुरंत पुलिस को दे दी सूचना
गांव के लोगों ने झाड़ियों और बागों में शराब की भट्ठियां धधकती देख पुलिस को सूचना दी। ग्रामीणों के आने की भनक लगते ही तीनों आरोपी मौके से भाग निकले। उधर, पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों ने भारी मात्रा में लहन, तैयार शराब व शराब बनाने के उपकरण नष्ट कर दिए।
बाद में आई पुलिस ने 30 लीटर शराब सहित बची-खुची सामग्री को कब्जे में लिया। ग्रामीणों का कहना है कि धंधेबाज बाज नहीं आ रहे। दिन में चोरी-छिपे शराब तैयार कर वन विभाग के जंगल में छिपा देते हैं। रात में उसकी आसपास के इलाकों व जिलों में सप्लाई की जा रही है।
गौरतलब है कि मलिहाबाद क्षेत्र में जहरीली शराब ने करीब 51 लोगों की जान ली थी। यही नहीं दतली और खड़ता गांव में एक साथ इतने लोगों की मौत से हडकंप मच गया था। सीएम अखिलेश यादव ने आबकारी विभाग में ढेरों तबादले और निष्कासन किए। इसके बावजूद भी अवैध शराब बनाने वालों ने अपना नया ठिकाना ढूंढ लिया।