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अखिलेश बने रोड़ा, नहीं पूरा होगा माया का 'सपना'

Sat, 13 Sep 2014 11:03 AM IST
अजित बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ
अजित बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 13 Sep 2014 11:03 AM IST
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plans of mayawati regime will not be completed.

यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की राह में रुकावट बन गए हैं। उन्होंने माया की महत्वाकांक्षी योजनाओं में अड़ंगा लगा दिया है।

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बसपा सरकार में मंजूर की गईं सड़कों का निर्माण पूरा नहीं हो पाएगा। सपा सरकार ने इन सड़कों को बजट देने से हाथ खड़े कर लिए हैं। दरअसल सपा सरकार के पास अपनी ही स्वीकृत सड़कों को पूरा कराने के लिए धन नहीं है।
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ये सड़कें राज्य सड़क निधि के तहत मंजूर की गई थीं। बसपा और फिर सपा सरकार के शुरुआती कार्यकाल में धड़ाधड़ एक के बाद एक नई सड़कों को मंजूरी दी जाती रही, लेकिन पुराने कामों को पूरा कराने के लिए कोई कारगर रणनीति नहीं बनाई गई।
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हाल यह है कि वर्ष 2008-09 से 2011-12 तक स्वीकृत कामों को पूरा कराने के लिए ही 839 करोड़ रुपये की जरूरत है। जबकि मायावती सरकार ने इन सड़कों के लिए स्वीकृत राशि का बड़ा हिस्सा दिया था, फिर भी उससे निर्माण पूरा करा पाना संभव नहीं था।

सिर्फ 1400 करोड़ रुपये ही किए आवंटित

plans of mayawati regime will not be completed.

वहीं सपा सरकार को अपने कार्यकाल के पहले दो सालों में मंजूर की गई सड़कों को पूरा करने के लिए 2,568 करोड़ रुपये की जरूरत है। वर्ष 2013-14 के बजट में इसके लिए 1400 करोड़ रुपये ही आवंटित किए गए हैं।

इसमें से 100 करोड़ रुपये नए कामों पर और शेष राशि पुराने कामों पर खर्च होगी। यानी पिछले दो सालों में स्वीकृत राज्य सड़क निधि की अधूरी सड़कों के निर्माण के लिए जितनी धनराशि की जरूरत है, उससे आधी ही मिल सकी है।

यही वजह है कि शासन ने मायावती सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत सड़कों को पूरा न करने का फैसला किया है। वहीं इसकी एक वजह लागत दरों का काफी बढ़ जाना भी बताई जा रही है।

हालांकि तय किया गया है कि पुरानी स्वीकृत सड़कों को ‘सेफ स्टेज’ तक पहुंचाकर यानी लेपन आदि कार्य करके इस जिम्मेदारी को खत्म मान लिया जाएगा।

बसपा सरकार में स्वीकृत, पर अधूरी सड़कों का ब्यौरा

plans of mayawati regime will not be completed.
वर्ष--सड़कों की लंबाई--पूरा कराने के लिए चाहिए
2008-09--132 किमी (7 सड़कें)--29 करोड़ रुपये
2009-10--226 किमी (13 सड़कें)--124 करोड़ रुपये
2010-11--265 किमी (19 सड़कें)--160 करोड़ रुपये
2011-12--907 किमी (71 सड़कें)--124 करोड़ रुपये

सपा सरकार में स्वीकृत, पर अधूरी सड़कों का ब्यौरा
वर्ष--सड़कों की लंबाई--पूरा कराने के लिए चाहिए
2012-13--2,254 किमी (151 सड़कें)--2,185 करोड़ रुपये
2013-14--370 किमी (47 सड़कें)--383 करोड़ रुपये

इस पर पीडब्‍ल्यूडी के प्रमुख सचिव रजनीश दुबे का कहना है कि राज्य सड़क निधि के पुराने स्वीकृत कामों की लागत काफी बढ़ चुकी है। इसलिए पुरानी दरों पर काम करने के लिए ठेकेदार तैयार नहीं है। इन कामों को सेफ स्टेज तक पहुंचाकर संबंधित फाइलें बंद कर दी जाएंगी।
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