भारत-नेपाल सीमा से गायब हो गए निर्धारण के लिए लगे सात पिलर
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भारत-नेपाल बार्डर पर सीमा निर्धारण के लिए लगे पिलर एक-एक कर गायब हो रहे हैं। कई पिलर राप्ती में समा चुके है। ये देश की सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकते है।
इस बाबत भारतीय अधिकारी चुप्पी साधे है। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ सर्वे तक का कार्य किया गया है। नोमेंस लैंड पर जिले में सात पिलर गायब हो चुके हैं। 13 पिलर क्षतिग्रस्त हैं।
भारत नेपाल के बीच नोमेंस लैंड की स्थिति स्पष्ट नहीं है। पिलरों के गायब होने के कारण नोमेंस लैंड पर अतिक्रमण बढ़ रहा है। एसएसबी के अधिकारी लगातार कई वर्षों से जिला प्रशासन व गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेजते आए हैं।
इन रिपोर्टों के बाद कुछ माह पूर्व सीमा पर गायब पिलर के लिए सर्वे हुआ था। इसके बाद सब कुछ ठंडे बस्ते में चला गया। सर्वे के बाद न तो गायब पिलर लगाए गए और न ही क्षतिग्रस्त पिलर की मरम्मत की गई।
सेनानायक बोले-गृह मंत्रालय को ही लेना है एक्शन
एसएसबी 62वीं वाहिनी के सेनानायक सीएस तोमर का कहना है कि दोनों देशों के उच्च अधिकारियों की देखरेख में क्षतिग्रस्त व गायब पिलर का सर्वे किया गया है। ये काम सर्वे ऑफ इंडिया व नेपाल की संयुक्त टीम ने किया है। मामला भारत सरकार स्तर पर है। गृह मंत्रालय को ही इस पर कुछ करना है।
इन जगहों पर पिलर हुए नष्ट
श्रावस्ती जिले में नोमेंस लैंड पर स्थित पिलर संख्या 645/1 व सब पिलर संख्या 643/1, 943/2, 644, 544/1, 644/2, 645 राप्ती की धारा में बह गए। पिलर संख्या 610, 611, 612, 613, 614, 618, 625, 628, 636, 642, 628/2, 636/7, 636/14 का ऊपरी हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। ये पिलर श्रीनगर, सागर गांव, कोदिया, भउआ नाका, सोनपथरी, बंकी, बनकटवा, बनकटी, गुज्जरगौरी, हकीमपुर, जमुनहा और रनियापुर गांव के पास है। इन पिलरों के नष्ट होने के बाद सीमा का निर्धारण नहीं हो पा रहा है।