‘पिज्जा डिलीवरी बाइक्स’ खतरनाक, मामला कोर्ट में
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पिज्जा डिलीवरी बाइक्स का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। वकालत की पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मामले में सूबे के प्रमुख सचिव परिवहन को चार हफ्ते में जवाबी हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
याची का कहना है कि पिज्जा कंपनियों के डिलीवरी मैन भीड़-भाड़ वाली जगहों पर तय समय में पिज्जा पहुंचाने की जल्दी में तेज और लापरवाही से बाइक चलाते हैं, जो खतरनाक हो सकता है।
साथ ही याची का यह भी आरोप है कि 5 नवंबर 2004 के केंद्र सरकार के गजट में ऐसी मोटरसाइकिलों को ट्रांसपोर्ट वाहन के रूप में दिखाया गया है जबकि सूबे में इन्हें इस रूप में पंजीकृत नहीं किया जा रहा है।
दिसंबर में होगी सुनवाई
इससे सरकार को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। याची ने इन ‘पिज्जा डिलीवरी बाइक्स’ को महाराष्ट्र सरकार की तर्ज पर व्यावसायिक वाहनों के रूप में दर्ज किए जाने और इनके मानक आदि तय किए जाने के निर्देश देने की गुजारिश की है।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति श्रीनारायण शुक्ल की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को नियत कर सूबे के परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिया कि मामले में चार हफ्ते में जवाबी हलफनामा पेश करें।
साथ ही इसमें अमल लायक अधिसूचना या सर्कुलर भी पेश किया जाए। विधि छात्र आयुष सरन ने अधिवक्ता मुरली मनोहर श्रीवास्तव के जरिये यह पीआईएल दायर की है।