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लखनऊ 'गैंगरेप' गहराया, HC पहुंचा मामला

Tue, 22 Jul 2014 10:25 AM IST
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 22 Jul 2014 10:25 AM IST
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PIL in high court for CBI probe in gangrape

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सोमवार को मोहनलालगंज दरिंदगी मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग वाली पीआईएल दायर की गई।

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इस पर 23 जुलाई को सुनवाई हो सकती है। यह याचिका पीपुल्स फोरम की संयोजक नूतन ठाकुर ने दायर की है।

याचिका में मृतका की तस्वीर को सोशल मीडिया पर प्रचारित न किए जाने संबंधी नियमों को अमल में लाए जाने की भी गुजारिश की गई है।

गौरतलब है कि कुछ सवालों को लेकर यूपी पुलिस ने खुलासे नहीं किये हैं, वहीं पुलिस की कार्यशैली से भी सवाल उठ रहे हैं अतः मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की जा रही है।

ये सवाल बना पुलिस की परेशानी

PIL in high court for CBI probe in gangrape

इसके अलावा पीड़ित के साथ ही आरोपी के परिवार के सदस्यों ने भी पुलिस के खुलासे पर अंगुली उठाते हुए सीबीआई से मामले की जांच कराने की मांग की है।

कुछ समाज सेवी संगठनों ने भी इसकी मांग की है। वहीं सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि अभी ऐसी कोई औपचारिक मांग सामने नहीं आई है। अगर आती है तो जरूरी फैसला किया जाएगा।

पुलिस अब तक इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं है कि जिस महिला का बेरहमी से कत्ल किया गया, वह सिर्फ फोन पर बातचीत करने वाले अनजाने शख्स के साथ रात के समय अकेली कैसे चली गई।

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एडीजी ने भी जताई संभावना

PIL in high court for CBI probe in gangrape

गार्ड रामसेवक जिस सिम कार्ड से बात करता था, वह सिम किसके नाम से है, उसे सामने क्यों नहीं लाया जा रहा है?

जांच की निगरानी कर रही एडीजी सुतापा सान्याल से रविवार को जब ये सवाल हुए तो उन्होंने इतना भर कहा कि जिसके नाम से सिमकार्ड है, उसे सामने लाया जाना उचित नहीं है।

ऐसे ही कई अन्य सवालों के जवाब में अधिकारियों का यह कहना है कि इस सवाल का औपचारिक जवाब देना उचित नहीं होगा। यानी पुलिस बहुत चीजें छिपा रही है।

मौका-ए-वारदात का मुआयना करने के बाद एडीजी सुतापा सान्याल ने माना था कि घटना में दो या इससे अधिक लोग शामिल रहे होंगे।

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खुद के सवालों को किया अनदेखा

PIL in high court for CBI probe in gangrape

उन्होंने फोरेंसिक एक्सपर्ट की राय का भी हवाला दिया था। सवाल यह भी उठता है कि रामसेवक के बारे में तो पुलिस को तफ्तीश शुरू होते ही जानकारी हो गई थी।

यह जानकारी महिला के सिम कार्ड की कॉल डिटेल से हुई थी। इसी आधार पर एडीजी ने यह कहा था कि कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है जबकि कुछ अन्य की तलाश की जा रही है।

लेकिन जिस तरीके से खुलासा हुआ उससे सवाल उठते हैं कि तफ्तीश में पुलिस ने अपने ही कई सवालों को अनदेखा कर दिया।

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