डेथ ऑडिट में खुलासा: 21-50 की आयु वालों पर ज्यादा भारी पड़ी कोरोना की दूसरी लहर
डेथ ऑडिट में खुलासा हुआ है कि कोरोना की दूसरी लहर ने 21 से 50 वर्ष की आयु के
लोगों पर अधिक घातक साबित हुआ है। वायरस के नए स्ट्रेन ने एक साथ कई अंगों पर हमला किया है।
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उत्तर प्रदेश में दूसरी लहर के दौरान कोरोना वायरस ज्यादा आक्रामक रहा। फेफड़े के साथ मरीजों के अन्य अंग भी प्रभावित हुए। इसी वजह से 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले मरीजों में से ज्यादातर की मौत कई अंगों के फेल होने से हुई। इसका खुलासा डेथ ऑडिट के दौरान हुआ है।
ऑडिट टीम से जुड़े सूत्रों का कहना है कि दूसरी लहर में वायरस के नए स्ट्रेन ने एक साथ कई अंगों पर हमला किया। इससे कम समय में मरीज अति गंभीर हो गए। दूरदराज के जिलों से जिन मरीजों को केजीएमयू, पीजीआई और लोहिया संस्थान रेफर किया गया, उनकी हालत ज्यादा खराब हो गई। इससे उन्हें बचाना मुश्किल हुआ।
गौरतलब है कि प्रदेश में कोरोना का पहला मरीज फरवरी 2020 में मिला था, जिसे दिल्ली में भर्ती कराया गया। इसके बाद 11 मार्च को कनाडा से लखनऊ आई एक महिला में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई। उसे केजीएमयू में भर्ती किया गया। पर, जनवरी 2021 तक प्रदेश में 5.93 लाख लोग वायरस की चपेट में आए गए। इनमें से 8504 लोगों की मौत हो गई। इस दौरान संक्रमितों की अपेक्षा मृत्युदर 1.4 फीसदी थी। इसमें 80 फीसदी लोग 60 साल से अधिक उम्र वाले थे। ज्यादातर के फेफड़े में गंभीर संक्रमण था।
जबकि इस साल मार्च से 16 जून तक लगभग 11 लाख लोग संक्रमित मिले हैं। इनमें से 13577 लोगों की मौत हो गई। डेथ ऑडिट में लगी टीम से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मरीजों की अपेक्षा मृत्युदर का औसत पुराना ही है। मगर 60 साल से अधिक उम्र वालों की संख्या मृत्युदर 43.98 फीसदी रही। वहीं, 41 से 50 साल वाले 16.52 फीसदी और 51 से 60 साल की उम्र वालों की संख्या 25.27 फीसदी रही।
उम्रवार कुल संक्रमित
आयु वर्ग -- संक्रमितों का प्रतिशत
0 से 10 वर्ष -- 2.88 प्रतिशत
11 से 20 वर्ष -- 8.03 प्रतिशत
21 से 30 वर्ष -- 24.20 प्रतिशत
31 से 40 वर्ष -- 22.20 प्रतिशत
41 से 50 वर्ष -- 16.85 प्रतिशत
51 से 60 वर्ष -- 13. 66 प्रतिशत
60 वर्ष से अधिक -- 11.78 प्रतिशत
स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक डॉ. डीएस नेगी पहली लहर की अपेक्षा दूसरी लहर में मरीजों की संख्या ज्यादा थी तो मौत भी ज्यादा हुई है। पर, ऑक्सीजन थेरेपी कारगर साबित हुई है। यही वजह है कि अस्पतालों में ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन की व्यवस्था की जा रही है। जिससे अब वायरस की चपेट में आने वालों के इलाज में आक्सीजन समस्या न बने।