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मां-ए मां, तू यहां है और मैं प्रतापगढ़ में इंतजार कर रहा था

Sat, 21 Mar 2015 12:06 AM IST
मनीष कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
मनीष कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 21 Mar 2015 12:06 AM IST
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People mourns on the death of their family members.

मां ए मां, तू यहां है और मैं प्रतापगढ़ स्टेशन पर तुम्हारा इंतजार कर रहा था। तुमको ढूंढते हुए मैं यहां पहुंच गया और तू है कि चुप है। मां बोल ना। बोल ना मां। आ चल घर चलें सब इंतजार कर रहे हैं। सब फोन कर रहे हैं कि कहां तक पहुंची होगी। मां चल ना।

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यह एक बेटे की पुकार थी बछरावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ओपीडी ब्लॉक में जो शुक्रवार दोपहर तक शव गृह की शक्ल ले चुका था। 15 शव फर्श पर रखे हुए थे और उनके बीच एक जवान बेटा अपनी मां के सिर को सहलाते हुए उसे जगाने की कोशिश कर रहा था।
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शवों के बीच के इस हृदय विदारक नजारे को देखकर वहां मौजूद हर किसी का कलेजा फट पड़ा। कई लोगों की आंखें छलक गईं और जो बर्दाश्त नहीं कर सके वहां से दूर हट गए। पर किसी की हिम्मत न हुई कि मां के लाडले को यह अहसास करा सके कि अब उसकी मां उसे हमेशा के लिए छोड़ दुनिया से चली गई है।
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अनाउंस‌मेंट से मिली जानकारी पहुंचा घटनास्‍थल

People mourns on the death of their family members.

गायत्री देवी (60) बृहस्पतिवार को देहरादून से प्रतापगढ़ के लिए जनता एक्सप्रेस में सवार हुईं थीं। बेटे की मां से मोबाइल पर लगातार बात हो रही थी। वह पता करता रहा कि मां कहां पहुंची हैं। शुक्रवार सुबह करीब दस बजे मां को लेने के लिए बेटा स्टेशन पहुंच गया। वहां अनाउंसमेंट हुआ कि देहरादून से आ रही जनता एक्सप्रेस बछरावां स्टेशन पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई है और सभी यात्री सुरक्षित हैं।

घोषणा के बाद बेटा जैसे-तैसे करीब साढ़े बारह बजे बछरावां स्टेशन पहुंचा तो मां का कुछ अता-पता नहीं चला। घंटों इधर-उधर भटकने के बाद सीएचसी पहुंचा तो वहां लाशों को देख उसका कलेजा बैठने लगा। बेसुध होकर वह सीएचसी की छान मारता रहा और अंत में लाशों के बीच खड़ा होकर अपनी तलाश शुरू की।

जब उसकी तलाश कफन से ढके एक शव की साड़ी को देखकर पूरी हुई तो वह दहाड़ मारकर रोने लगा। मां-मां की चीख-पुकार सुन वहां मौजूद हर किसी का कलेजा बैठ गया।

शवों के बीच युवक मां के सिरहाने बैठ गया और कहने लगा कि मां ए-मां तू यहां है और मैं तुम्हारा प्रतापगढ़ में इंतजार कर रहा था। मां के सिर को सहलाते हुए बेटा कहता रहा, ‘उठ न सब घर पर इंतजार कर रहे हैं’, पर मां तो चिरनिद्रा में पड़ी थी, अब कहां से उठती।

अपना नाम न बता पाया

People mourns on the death of their family members.

ओपीडी में बैठी एक महिला डॉक्टर ने बताया कि युवक ने सब कुछ बता दिया, लेकिन अपना नाम नहीं बता रहा है। जब पूछों तो आंखों से आंसुओं की धारा बह उठती है। सिर्फ रोता है और कहता है कि डॉक्टर मेरी मां को देख लो ना।

न जाने क्यों वो मुझसे बात नहीं कर रही है। बेटे को डॉक्टरों ने समझाने की कोशिश की पर वह जिद्द पर अड़ रहा, कहा- ‘अभी घर से दूसरे लोग आएंगे तो मां हमारे साथ चली जाएगी।’ डॉक्टरों व अन्य लोगों का भी दिल पसीज गया और उन्होंने बेटे को मां के सिरहाने बैठे रहने दिया, ताकि उसके जख्म को और कुरेदा न जा सके।

मौके पर मौजूद डॉ. सचिन ने बताय कि युवक जब शव के पास पहुंचा और मां की साड़ी देखी तो बिना चेहरा देखे ही वह पूरी तरह टूट गया। सदमा लगने की वजह से अब वो कुछ बता भी नहीं रहा है। उसके मोबाइल से दूसरे परिवारीजनों को सूचना दी गई है जिससे कि उसको संभाला जा सके।

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