शिक्षामित्रों के समर्थन में सोशल मीडिया पर उठी आवाज, लोगों ने किए ऐसे कमेंट
लखनऊ में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे शिक्षामित्रों का कुछ लोगों ने समर्थन किया है तो कुछ लोगों ने उन्हें अब हटाने पर सवाल भी उठाए हैं। साथ ही सरकार से उनका पक्ष सुनने की अपील की है। आपको बता दें कि लखनऊ के इको गार्डेन में शिक्षा मित्रों ने काला दिवस मनाया और अब तक प्रदर्शन के दौरान उनके जिन साथियों की मौत हो गई सिर मुंडवाकर उन्हें श्रद्घांजलि दी।
शिक्षामित्रों का समायोजन 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद् किया गया था। इसलिए काला दिवस मनाने के लिए उन्होंने आज की तारीख चुनी। प्रदर्शन कर रहे शिक्षामित्रों ने मुख्यमंत्री आवास कूच करने की कोशिश भी की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया।
आम शिक्षक शिक्षा शिक्षामित्र ऐसोसिएशन के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में शिक्षामित्रों ने कहा कि जब तक उन्हें फिर शिक्षक नहीं बना दिया जाता वे यह लड़ाई जारी रखेंगे।
उनके इस प्रदर्शन ने जनता का ध्यान अपनी ओर खींचा। जिस पर लोगों ने सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी। इस पर मिथिलेश कुमार गौतम का कहना है कि 'अगर शिक्षामित्र पढ़ाना नहीं जानते हैं तो इतने दिनों से इनको क्यों रखा है... और अब भी तो पढ़ा ही रहे हैं। इसलिए उनके वेतन में अब कटौती नहीं होनी चाहिए। उनको फिर से उनका हक दिया जाना चाहिए।'
'ऐसी ही जिद अगर बच्चों को पढ़ाने में दिखाते, तो कितनी अच्छी बात होती'
आदर्श खरे के नाम से बने अकाउंट से टिप्पणी की गई है कि ऐसी ही जिद अगर बच्चों को पढ़ाने में दिखाते, तो कितनी अच्छी बात होती। केवल तनख्वाह लेना ही प्राथमिक बेसिक शिक्षकों का उद्देश्य है। वहीं, सुमित शाक्य ने मोदी व योगी सरकार को कोसा है और कहा कि अगर 16 साल की सेवा के बाद भी ये सब करना पड़े तो ऐसी सरकार पर धिक्कार है।
रित्विक कुमार का कहना है कि जितनी काबिलियत हो उतना ही मांग करो... सरकार सही कर रही है।
मामले पर निजामुद्दीन खान का कहना है कि जो शिक्षामित्र टेट पास हैं उन्ही को रखा जाये बाकी सभी को निकाल दिया जाये।
रजनीश भटनागर ने शिक्षामित्रों का पक्ष लिया है और कहा कि 'इससे बुरा भी क्या हो सकता है! मोदी और योगी जागो!'
वहीं, रवि भारद्वाज ने विरोध के तरीके पर सवाल उठाने के साथ ही सरकार को सही ठहराया है। रवि ने कमेंट किया कि 'इसे कहते हैं कि बैठने की जगह मिली तो पैर पसारना शुरू कर दिया...। ये बिना परीक्षा दिये ही मास्टर बनेंगे और जो पढ़-पढ़ कर अपनी आंखें खराब कर लिए वो कहां जाएंगे...। अगर सिर मुंडवाने से ही नौकरी मिलेगी तो सभी सिर मुडवा लेंगे।
प्रदर्शन कर रहे शिक्षामित्रों ने सरकार के सामने ये प्रमुख मांगें रखी-
- आरटीई एक्ट-2009 के तहत 1,24,000 पैरा टीचर को अपग्रेड कर पूर्ण शिक्षक का दर्जा दिया जाए।
- उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा नियमावली के अनुसार पूर्ण शिक्षक का वेतनमान दिया जाए।
- जो शिक्षा मित्र आरटीई एक्ट-2009 में किसी विधिक पहलू से समाहित नहीं हो सके उन्हें भारत के राजपत्र 2017 के अनुसार सहायक अध्यापक पद पर रखते हुए चार वर्ष में उत्तराखंड की तर्ज पर टेट उत्तीर्ण करने की छूट प्रदान करे।
- जो शिक्षा मित्र टेट उत्तीर्ण हैं उनको बिना लिखित परीक्षा उम्र और अनुभव का भारांक देकर नियमित किया जाए।