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ट्रामा से लौटाए गए मेडिसिन के मरीज
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ट्रॉमा से बिना इलाज लौटाए मेडिसिन के मरीज
किसी को हड़ताल तो कइयों को बेड खाली नहीं होने का दिया हवाला
केजीएमयू प्रशासन की कार्रवाई का विरोध कर रहे मेडिसिन के रेजिडेंट
केस 1
कानपुर की चंद्रावती (40) के पेट में पानी भर गया था। वहां से डॉक्टर ने केजीएमयू रेफर कर दिया। परिवारीजन मंगलवार को उन्हें लेकर क्वीन मैरी पहुंचे। यहां चिकित्सक ने ट्रॉमा सेंटर ले जाने की सलाह दी। मरीज के परिजन कैजुअल्टी पहुंचे। जहां उनसे कहा गया कि पहले मेडिसिन विभाग में जाकर बेड के बारे में जानकारी कर लो। महिला के पति का आरोप है कि वह मेडिसिन विभाग पहुंचे तो वहां रेजिडेंट काला फीता बांध कर बैठे थे। उन्होंने मरीज की फाइल भी देखी। इसके बाद हड़ताल होने की बात कह कर मरीज को लौटा दिया। मरीज फिर कैजुअल्टी पहुंचा, जहां चिकित्सक ने हाथ खड़े कर दिए, जिसकेबाद वे मरीज को निजी अस्पातल ले गए।
केस 2-
आजमगढ़ निवासी प्रेमनाथ को लेकर परिवारीजन मंगलवार दोपहर करीब दो बजे ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। उनकी प्लेटलेट्स कम होने से वह बेहोशी की स्थिति में थे। कैजुअल्टी से मेडिसिन विभाग भेजा गया। यहां रेजिडेंटों ने पहले हड़ताल का हवाला दिया और फिर बेड खाली नहीं होने की बात कह कर मरीज को लौटा दिया। करीब दो घंटे तक ट्रॉमा सेंटर में चक्कर काटने के बाद परिवारीजन मजबूरन मरीज को लेकर निजी अस्पताल चले गए।
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में ऑर्थोपेडिक्स और मेडिसिन विभाग के रेजिडेंट के बीच हुई मारपीट के बाद उनपर हुई कार्रवाई का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। हालत यह है कि मंगलवार को मेडिसिन विभाग के रेजिडेंटों ने बांह में काली पट्टी बांध कर काम किया। इस दौरान ट्रॉमा सेंटर से तमाम मरीजों को लौटा दिया गया। उनसे क भी हड़ताल होने की बात बताई गई तो कभी बेड खाली नहीं होने की। इस बात की जानकारी अधिकारियों को भी दी गई, लेकिन किसी ने मौके पर जाने की जहमत नहीं उठाई।
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ट्रॉमा सेंटर में दो दिन पहले ऑर्थोपेडिक्स विभाग के रेजिडेंट नशे में धुत होकर पहुंचे थे।
इलाज में लापरवाही का आरोप लगाने पर ऑर्थोपेडिक्स और मेडिसिन विभाग के रेजिडेंटों के बीच जमकर मारपीट हुई थी। तोड़फोड़ और बवाल के बाद दोनों विभागों के तीन-तीन जूनियर रेजिडेंटों को निलंबित कर दिया गया है। मंगलवार को इसकेविरोध में मेडिसिन विभाग के रेजिडेंटों ने बांह पर काली पट्टी बांध कर काम किया। ओपीडी एवं वार्ड में वरिष्ठ डॉक्टरों के मौजूद होने पर तो मरीजों को देखा, लेकिन उनके जाते ही हड़ताल और विरोध प्रदर्शन की बात कह कर मरीजों को लौटा दिया गया। सबसे खराब हालत ट्रॉमा सेंटर की रही। यहां आने वाले मरीजों को देखने से मना कर दिया गया। ऐसे में मरीज कैजुअल्टी से लेकर मेडिसिन विभाग तक चक्कर काटते नजर आए।
मरीज को लौटाया है तो अतिरिक्त चार्ज लगाएंगे
मेडिसिन विभाग के रेजिडेंटों ने निलंबन के विरोध में काली पट्टी बांध कर काम किया है। ट्रॉमा में मरीज को लौटाने की बात सामने नहीं आई है। फिर भी मैं मौके पर जाकर स्थिति देखता हूं। मरीज को लौटाते हैं तो उन पर अतिरिक्त चार्ज लगाया जाएगा।
- प्रो. एसएन शंखवार, सीएमएस केजीएमयू
बेड नहीं होने से आई समस्या
मरीजों को लौटाने की बात सामने आने पर संकाय सदस्य मौके पर गए थे। जांच पड़ताल के दौरान पता चला कि सभी बेड फुल हैं। बेड खाली नहीं होने की वजह से यहां से मरीज रेफर किए गए हैं। बिना इलाज लौटाया नहीं गया है।
- डॉ. सुधीर सिंह, मीडिया प्रभारी, केजीएमयू
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किसी को हड़ताल तो कइयों को बेड खाली नहीं होने का दिया हवाला
केजीएमयू प्रशासन की कार्रवाई का विरोध कर रहे मेडिसिन के रेजिडेंट
केस 1
कानपुर की चंद्रावती (40) के पेट में पानी भर गया था। वहां से डॉक्टर ने केजीएमयू रेफर कर दिया। परिवारीजन मंगलवार को उन्हें लेकर क्वीन मैरी पहुंचे। यहां चिकित्सक ने ट्रॉमा सेंटर ले जाने की सलाह दी। मरीज के परिजन कैजुअल्टी पहुंचे। जहां उनसे कहा गया कि पहले मेडिसिन विभाग में जाकर बेड के बारे में जानकारी कर लो। महिला के पति का आरोप है कि वह मेडिसिन विभाग पहुंचे तो वहां रेजिडेंट काला फीता बांध कर बैठे थे। उन्होंने मरीज की फाइल भी देखी। इसके बाद हड़ताल होने की बात कह कर मरीज को लौटा दिया। मरीज फिर कैजुअल्टी पहुंचा, जहां चिकित्सक ने हाथ खड़े कर दिए, जिसकेबाद वे मरीज को निजी अस्पातल ले गए।
केस 2-
आजमगढ़ निवासी प्रेमनाथ को लेकर परिवारीजन मंगलवार दोपहर करीब दो बजे ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। उनकी प्लेटलेट्स कम होने से वह बेहोशी की स्थिति में थे। कैजुअल्टी से मेडिसिन विभाग भेजा गया। यहां रेजिडेंटों ने पहले हड़ताल का हवाला दिया और फिर बेड खाली नहीं होने की बात कह कर मरीज को लौटा दिया। करीब दो घंटे तक ट्रॉमा सेंटर में चक्कर काटने के बाद परिवारीजन मजबूरन मरीज को लेकर निजी अस्पताल चले गए।
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केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में ऑर्थोपेडिक्स और मेडिसिन विभाग के रेजिडेंट के बीच हुई मारपीट के बाद उनपर हुई कार्रवाई का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। हालत यह है कि मंगलवार को मेडिसिन विभाग के रेजिडेंटों ने बांह में काली पट्टी बांध कर काम किया। इस दौरान ट्रॉमा सेंटर से तमाम मरीजों को लौटा दिया गया। उनसे क भी हड़ताल होने की बात बताई गई तो कभी बेड खाली नहीं होने की। इस बात की जानकारी अधिकारियों को भी दी गई, लेकिन किसी ने मौके पर जाने की जहमत नहीं उठाई।
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ट्रॉमा सेंटर में दो दिन पहले ऑर्थोपेडिक्स विभाग के रेजिडेंट नशे में धुत होकर पहुंचे थे।
इलाज में लापरवाही का आरोप लगाने पर ऑर्थोपेडिक्स और मेडिसिन विभाग के रेजिडेंटों के बीच जमकर मारपीट हुई थी। तोड़फोड़ और बवाल के बाद दोनों विभागों के तीन-तीन जूनियर रेजिडेंटों को निलंबित कर दिया गया है। मंगलवार को इसकेविरोध में मेडिसिन विभाग के रेजिडेंटों ने बांह पर काली पट्टी बांध कर काम किया। ओपीडी एवं वार्ड में वरिष्ठ डॉक्टरों के मौजूद होने पर तो मरीजों को देखा, लेकिन उनके जाते ही हड़ताल और विरोध प्रदर्शन की बात कह कर मरीजों को लौटा दिया गया। सबसे खराब हालत ट्रॉमा सेंटर की रही। यहां आने वाले मरीजों को देखने से मना कर दिया गया। ऐसे में मरीज कैजुअल्टी से लेकर मेडिसिन विभाग तक चक्कर काटते नजर आए।
मरीज को लौटाया है तो अतिरिक्त चार्ज लगाएंगे
मेडिसिन विभाग के रेजिडेंटों ने निलंबन के विरोध में काली पट्टी बांध कर काम किया है। ट्रॉमा में मरीज को लौटाने की बात सामने नहीं आई है। फिर भी मैं मौके पर जाकर स्थिति देखता हूं। मरीज को लौटाते हैं तो उन पर अतिरिक्त चार्ज लगाया जाएगा।
- प्रो. एसएन शंखवार, सीएमएस केजीएमयू
बेड नहीं होने से आई समस्या
मरीजों को लौटाने की बात सामने आने पर संकाय सदस्य मौके पर गए थे। जांच पड़ताल के दौरान पता चला कि सभी बेड फुल हैं। बेड खाली नहीं होने की वजह से यहां से मरीज रेफर किए गए हैं। बिना इलाज लौटाया नहीं गया है।
- डॉ. सुधीर सिंह, मीडिया प्रभारी, केजीएमयू