फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Patients are not getting treatment because they dont have golden card of Ayushman Yojna.

आयुष्मान योजना: गोल्डन कार्ड न होने से नहीं मिल रहा इलाज, भटक रहे मरीज

Sat, 05 Oct 2019 06:14 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 05 Oct 2019 06:14 PM IST
विज्ञापन
Patients are not getting treatment because they dont have golden card of Ayushman Yojna.

आयुष्मान योजना में अभी भी चंद मरीजों को ही इलाज मिल पा रहा है। गोल्डन कार्ड नहीं होने से मुश्किलें आ रही हैं। ग्रामीण इलाके की स्थिति ज्यादा गंभीर है। इटौंजा के अटेसुआ निवासी जरीना का पैर टूट गया। उनके पास गोल्डन कार्ड नहीं है। वह गोल्डन कार्ड के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गई, लेकिन अभी तक बन नहीं पाया है।

विज्ञापन


ऐसे में वह अस्पताल जाती हैं तो आयुष्मान मित्र गोल्डन कार्ड की मांग करते हैं। कार्ड नहीं होने से इलाज नहीं मिल पा रहा है, जबकि शासनादेश है कि लाभार्थी का नाम सूची में है तो उसका इलाज किया जाए। इसके बाद भी जरीना को इलाज नहीं मिल पा रहा है। जरीना की तरह ही रमेश मौर्या, गोवर्धन प्रसाद भी कार्ड के इंतजार में इलाज नहीं करा पा रहे हैं।
विज्ञापन


सामुदायिक स्वास्थ्य बीकेटी के अधीक्षक डॉ. विनीत कुमार भार्गव ने बताया कि इटौंजा, बीकेटी में 18608 परिवारों के 90 हजार लाभार्थियों के गोल्डेन कार्ड बनने हैं। अभी तक बीकेटी में 5900 गोल्डन कार्ड बने हैं। इसी तरह इटौंजा में 4500 गोल्डन कार्ड ही बन सके हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Trending Videos

केजीएमयू में सर्जरी से बेहतर हुई रोशनी

सड़क हादसे में घायल होने सीतापुर निवासी मनोज की दाईं आंख के नीचे की हड्डी (आर्बिट फ्लोर) टूट गई थी। ऐसे में उन्हें एक ही सामान डबल दिखाई देता था। निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने इंप्लांट के जरिये हड्डी जोड़ने की बात कही। मरीज आयुष्मान कार्डधारक था।

परिवारीजन उसे लेकर 16 सितंबर को केजीएमयू के ओरल एंड मैक्सिलो फेशियल सर्जरी विभाग पहुंचे। यहां विभागाध्यक्ष डॉ. शादाब मोहम्मद ने सर्जरी की। उसकी क्षतिग्रस्त मांसपेशियों को रिपेयर करके कार्टिलेज (ऊतकों का समूह) निकाला। फिर उसे ऑर्बिट फ्लोर पर लाकर फिक्स कर दिया।

अब मरीज की आंखें फिट हो गई है। उसकी रोशनी भी ठीक है। डॉ. शादाब ने बताया कि यह ऑर्बिट फ्लोर रीकंस्ट्रक्शन बाय इअर कार्टिलेज्य तकनीक से संभव हुआ। केजीएमयू में इस तकनीक से पहली बार सर्जरी की गई है।

यहां करें शिकायत, दें सुझाव

अब भी लाभार्थियों को विभिन्न तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए अमर उजाला ने एक अभियान शुरू की है। इसका उद्देश्य योजना में आ रही समस्याओं को सामने लाना और उसके निराकरण की दिशा में काम करना है। आपकी कोई शिकायत, सुझाव हो तो हमें बताएं।

व्हाट्सअप - 8859108092 (सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक)
मेल -  chandrab@knp. amarujala.com

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed