कोरोना से परिषदीय शिक्षिका की मौत, शिक्षकों में आक्रोश
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बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच कोरोना का ग्राफ बढ़ने से परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों में नाराजगी है। मॉल में तैनात एक शिक्षिका की कोरोना से मृत्यु पर शिक्षकों ने मृतक आश्रितों को 50 लाख की मदद की मांग की है। साथ ही रोस्टर प्रणाली के जरिए शिक्षकों को कार्य करने की अनुमति देने की भी मांग की।
परिषदीय विद्यालय एक जुलाई से खुले हैं। इसके साथ ही सभी शिक्षकों और कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से विद्यालय जाना है। वहीं सैकड़ों की संख्या में शिक्षकों को कोविड-19 के सर्वे कार्य में भी लगा दिया गया है। इन शिक्षकों को शील्ड, मास्क, पीपीई, सैनिटाइजर आदि सुरक्षा किट मुहैया नहीं कराई गई है।
शिक्षक खुद ही अपने इंतजामों के सहारे डयूटी कर रहे हैं। वहीं प्राथमिक विद्यालय माल दो की प्रधानाध्यापिका वीना विश्वकर्मा की गुरुवार को कोरोना से ग्रस्त होने की वजह से मृत्यु हो गई। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री वीरेंद्र सिंह ने बताया कि कई शिक्षक और कर्मचारी कोरोना की चपेट में आ चुके हैं।
विभागीय कार्य में ड्यूटी लगाने से पहले शिक्षकों की उम्र, बीमारी, आदि का खास ध्यान रखा जाए। उन पर अनिवार्यता की बाध्यता खत्म की जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि शिक्षकों को साप्ताहिक अवकाश दिया जाए और उस दिन कार्य करने पर प्रतिकर भी दिया जाए। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों व कर्मचारियों को कोरोना से संक्रमित होने पर तुरंत चिकित्सीय सुविधा मुहैया कराई जाए।