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पटक-पटक कर मार डाला दुधमुंही बच्ची को

Thu, 24 Sep 2015 02:35 AM IST
Updated Thu, 24 Sep 2015 02:35 AM IST
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parents do ritual killing of her 4 month daughter

धर्मनगरी अयोध्या में मंगलवार की देर रात अंधविश्वास में एक दंपती ने अपनी चार माह की लाडली की बलि चढ़ा दी। अंबेडकरनगर जिले एक गांव से आए इस दंपती ने दुधमुंही बच्ची को सरयू किनारे राम की पैड़ी स्थित एक मंदिर के चबूतरे पर पटक-पटक कर हत्या की। शव के टुकड़े इधर-उधर दीवारों पर बिखरे पाए गए।

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आवाज सुन आस-पास के लोगों ने दौड़ाया, तो पैड़ी में कूद गए। बाद में पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। सीओ अयोध्या दिनेश द्विवेदी का कहना है कि मां-बाप बेटी को अशुभ मानते थे, इसीलिए अंधविश्वास के चलते ऐसा किया।
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अंबेडकरनगर जिले के राजेसुल्तानपुर थाना अंतर्गत लालमनपुर गांव निवासी दंपती मूलचंद चौरसिया (22) व उसकी पत्नी सुशीला (20) मंगलवार रात करीब पौने 11 बजे सरयू तट पर टहलते दिखे, उनके साथ चार माह की एक दुधमुंही बच्ची थी।
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लगभग आधे घंटे के बाद दंपती स्वर्गद्वार मोहल्ले में एक सुनसान अंधेरी गली में पहुंचे। यहां पर महिला गली में खड़ी हो आने-जाने वालों को देखने लगी और उसका पति परशुराम मठ मंदिर के सामने बनी फर्श पर अपनी बच्ची शांति को पटक दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बच्ची के शव के अवशेष आसपास दीवारों व मार्ग पर बिखर गए।

खुद को बचाने के लिए राम की पैड़ी में कूद गए

parents do ritual killing of her 4 month daughter

हृदयविदारक घटना के बाद मोहल्ले वाले जुटे तो दंपती भागकर राम की पैड़ी में कूद गए। लोगों ने दोनों को पैड़ी से बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दंपती को गिरफ्तार कर बच्ची के शव को एकत्रित कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया है।

कोतवाल नरेंद्र सिंह ने बताया कि मानसिक रूप से विक्षिप्त दंपती मूलचंद चौरसिया निवासी लालमनपुर राजेसुल्तानपुर अंबेडकरनगर व उसकी पत्नी सुशीला को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई है।

दंपती ने पुलिस को बताया कि वे बेटी शांति को मिलन के लिए अशुभ मानते थे, इसलिए अयोध्या के मंदिर पर उसे पटकर मारने आए थे।

...तो मिलन में बाधक थी बच्ची

parents do ritual killing of her 4 month daughter

अबोध बच्ची की दर्दनाक हत्या के बाद भी दंपती मूलचंद व सुशीला के माथे पर तनिक शिकन भी नहीं दिखी। बच्ची की हत्या स्वीकारते हुए कहा कि पहले पैर से मारा फिर पटककर जान ले ली। घटना के कारणों पर भ्रामक जवाब देते रहे। हर सवाल पर दोहराते थे कि पति-पत्नी के मिलन में बाधक व अशुभ थी बच्ची।

शरीर इसका था आत्मा दूसरे की, पैदा होने के बाद से ही उन पर परेशानियों का पहाड़ टूट पड़ा था। अब सारे ग्रह कट गए हैं। सात जन्मों के बाद अब हम पति-पत्नी का मिलन होगा।

रोहतक में बच्ची के पैदा होते ही फंसा था तंत्र-मंत्र में

मूलचंद के बड़े भाई जयचंद भी घटना को लेकर स्तब्ध था। बताया कि चार भाइयों में सबसे छोटा मूलचंद रोहतक में छह-सात सालों से पेंट व फर्नीचर का काम करता था। वहां पर श्मशान घाट के बगल कमरा लेकर रहता था। वर्ष 2014 में उसका विवाह सुशीला निवासी जमुहीं जिला आजमगढ़ से हुआ था।

पत्नी के गर्भवती होने पर मां को डिलीवरी के लिए लेकर रोहतक गया था और वहां पर बच्ची शांति का जन्म हुआ। इस बीच पत्नी सुशीला की तबियत बिगड़ी तो वह तंत्र-मंत्र के फेर में पड़ गया। उन्हें किसी तांत्रिक ने बताया था कि मिलन के लिए बेटी अशुभ है।

कुछ माह बाद पत्नी मायके चली गई। चार दिनों पूर्व ही वह रोहतक से घर आया था। वह और पत्नी कमरे में ही बच्ची के साथ कई-कई घंटे तक बंद रहते थे। मंगलवार की सुबह पत्नी के साथ निकला था, हम लोगों ने समझा रोहतक जा रहा है।

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