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पांच किमी तक बेलगाम दौड़ी कार, पुलिस को नहीं दिखी रफ्तार, तीन की जान लेकर रुकी
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लखनऊ। राजधानी के वीआईपी चौराहों में शुमार 1090 चौराहे पर भीषण हादसे में तीन लोगों की मौत का सबब बनी कार ने यातायात पुलिस की व्यवस्था पर सवाल उठा दिए हैं। पॉलीटेक्निक से 1090 तक पांच किमी तक यह कार निरंकुश दौड़ती रही, लेकिन पुलिस की नजर इस पर नहीं पड़ी। कार ने पहले समता मूलक चौराहे पर बाइक सवार को टक्कर मारी फिर 1090 पर रेड सिग्नल तोड़कर भागने की कोशिश में दर्दनाक हादसा कर बैठी।
1090 चौराहे से कुछ दूरी पर मुख्यमंत्री आवास, विधायकों का बहुखंडी आवास और डीजीपी का आवास है। यहां पर यातायात व्यवस्था संभालने के लिए सुबह से देर शाम 9 बजे तक यातायात पुलिस के जवान मुस्तैद रहते हैं। यहां तक कि यातायात पुलिस के लिए बूथ भी बना है, लेकिन यातायात पुलिसकर्मी लोहिया पथ पर रफ्तार पर लगाम लगाने में पूरी तरह से अक्षम हैं। इससे अक्सर हादसे होते हैं।
वाहनों की रफ्तार तय, पर मॉनिटरिंग नहीं
यातायात पुलिस ने नगर निगम इलाके में आने वाली हर सड़क की रफ्तार तय कर रखी है। नगर निगम क्षेत्र में अधिकतम 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से अधिक चलने पर कार्रवाई का प्रावधान है। यातायात पुलिस ने हजरतगंज इलाके में 35 किमी, चारबाग से ट्रांसपोर्टनगर के बीच 30 किमी, लोहिया पथ पर 40 किमी, शहर के सभी ब्रिज पर 30 किमी, ट्रांसपोर्टनगर से स्कूटर इंडिया 40 किमी, परिवर्तन चौक से आईटी चौराहा 25 किमी, चौक चौराहे से ठाकुरगंज 30 किमी, विशालखंड से हैनीमैन चौराहा तक 35 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार तय कर रखी है। वहीं शहर के सभी संपर्क मार्गों और कॉलोनियों में 20 किमी, भीड़भाड़ वाले इलाके में 25 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार तय है। लेकिन निगरानी न होने से रफ्तार पर लगाम नहीं लग रही है।
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धूल फांक रहा 10 लाख का स्पीडो मीटर
राजधानी की सड़कों पर रफ्तार पर नियंत्रण के लिए स्पीड मीटर लगाने की योजना बनाई। इसके लिए 10 लाख रुपये खर्च कर स्पीडोमीटर खरीदे गए, लेकिन यातायात पुलिस ने आज तक इनका उपयोग नहीं किया। ये यातायात पुलिस लाइन में पड़े धूल फांक रहे हैं। इन्हें सिर्फ यातायात माह में प्रदर्शनी में लोगों को दिखाने के लिए निकाला जाता है। यदि इनका उपयोग किया जाए तो सड़कों पर हादसे कम किए जा सकते हैं।
रात में स्टंट करते हैं कार सवार
लोहिया पथ पर गोल्फ क्लब चौराहे, 1090 चौराहा से लेकर समतामूलक और लोहिया चौराहे के बीच अक्सर देर रात 12 बजे से 2 बजे के बीच में कारों की रफ्तार की बाजी लगाई जाती है। युवक कारों से रफ्तार के साथ स्टंट भी करते हैं। बाइक सवार भी स्टंट करने में पीछे नहीं होते हैं। इस दौरान कई हादसे भी हो चुके हैं। इसके बाद भी पुलिस सतर्क नहीं है। यहीं नहीं कभी-कभी तड़के भी कार सवार आपस में रेस करते हैं। इसकी जानकारी होने के बाद भी पुलिस चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकालकर कोई कार्रवाई नहीं करती है।
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1090 चौराहे से कुछ दूरी पर मुख्यमंत्री आवास, विधायकों का बहुखंडी आवास और डीजीपी का आवास है। यहां पर यातायात व्यवस्था संभालने के लिए सुबह से देर शाम 9 बजे तक यातायात पुलिस के जवान मुस्तैद रहते हैं। यहां तक कि यातायात पुलिस के लिए बूथ भी बना है, लेकिन यातायात पुलिसकर्मी लोहिया पथ पर रफ्तार पर लगाम लगाने में पूरी तरह से अक्षम हैं। इससे अक्सर हादसे होते हैं।
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वाहनों की रफ्तार तय, पर मॉनिटरिंग नहीं
यातायात पुलिस ने नगर निगम इलाके में आने वाली हर सड़क की रफ्तार तय कर रखी है। नगर निगम क्षेत्र में अधिकतम 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से अधिक चलने पर कार्रवाई का प्रावधान है। यातायात पुलिस ने हजरतगंज इलाके में 35 किमी, चारबाग से ट्रांसपोर्टनगर के बीच 30 किमी, लोहिया पथ पर 40 किमी, शहर के सभी ब्रिज पर 30 किमी, ट्रांसपोर्टनगर से स्कूटर इंडिया 40 किमी, परिवर्तन चौक से आईटी चौराहा 25 किमी, चौक चौराहे से ठाकुरगंज 30 किमी, विशालखंड से हैनीमैन चौराहा तक 35 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार तय कर रखी है। वहीं शहर के सभी संपर्क मार्गों और कॉलोनियों में 20 किमी, भीड़भाड़ वाले इलाके में 25 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार तय है। लेकिन निगरानी न होने से रफ्तार पर लगाम नहीं लग रही है।
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धूल फांक रहा 10 लाख का स्पीडो मीटर
राजधानी की सड़कों पर रफ्तार पर नियंत्रण के लिए स्पीड मीटर लगाने की योजना बनाई। इसके लिए 10 लाख रुपये खर्च कर स्पीडोमीटर खरीदे गए, लेकिन यातायात पुलिस ने आज तक इनका उपयोग नहीं किया। ये यातायात पुलिस लाइन में पड़े धूल फांक रहे हैं। इन्हें सिर्फ यातायात माह में प्रदर्शनी में लोगों को दिखाने के लिए निकाला जाता है। यदि इनका उपयोग किया जाए तो सड़कों पर हादसे कम किए जा सकते हैं।
रात में स्टंट करते हैं कार सवार
लोहिया पथ पर गोल्फ क्लब चौराहे, 1090 चौराहा से लेकर समतामूलक और लोहिया चौराहे के बीच अक्सर देर रात 12 बजे से 2 बजे के बीच में कारों की रफ्तार की बाजी लगाई जाती है। युवक कारों से रफ्तार के साथ स्टंट भी करते हैं। बाइक सवार भी स्टंट करने में पीछे नहीं होते हैं। इस दौरान कई हादसे भी हो चुके हैं। इसके बाद भी पुलिस सतर्क नहीं है। यहीं नहीं कभी-कभी तड़के भी कार सवार आपस में रेस करते हैं। इसकी जानकारी होने के बाद भी पुलिस चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकालकर कोई कार्रवाई नहीं करती है।