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यूपी: 896 हेडकांस्टेबल और सब-इंस्पेक्टर को झटका, जानिए क्यों हुआ इनका डिमोशन
Fri, 11 Sep 2020 10:44 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 11 Sep 2020 10:44 AM IST
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उत्तर प्रदेश पुलिस
- फोटो : सोशल मीडिया
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पीएसी से नागरिक पुलिस में आए जवानों को प्रमोशन मांगने पर उन्हें मूल काडर पीएसी में भेज दिया गया है। ऐसे 896 पुलिसकर्मियों को पदावनत करते हुए वापस किया गया है जबकि 22 आरक्षियों को आरक्षी के ही पद पर वापस भेजा गया है।
गुरुवार को डीजीपी मुख्यालय से जारी इस आदेश से रिवर्ट होने वाले पुलिसकर्मियों में भारी रोष है। 2008 से पूर्व पीएसी से नागरिक पुलिस में स्थानांतरण हो जाया करता था। इसके तहत कुल 932 पुलिसकर्मी सशस्त्र पुलिस बल से नागरिक पुलिस में आए।
उनमें से 890 आरक्षी से मुख्य आरक्षी के पद पर प्रोन्नत हो गए। 6 को उप निरीक्षक के पद पर प्रोन्नति मिली, 22 आरक्षी के पद पर ही रहे और 14 की मृत्यु हो गई। उप निरीक्षक पद पर जिन्हें प्रोन्नति नहीं मिली उन्होंने अदालत का रुख किया।
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अदालत ने इस पर डीजीपी मुख्यालय से जवाब मांगा। वहीं, डीजीपी मुख्यालय ने इस स्थानांतरण के आदेश को ही गलत बता दिया। कहा कि पीएसी व नागरिक पुलिस दो अलग-अलग संवर्ग हैं। पूर्व में पीएसी से कुछ लोगों की ड्यूटी नागरिक पुलिस में लगाई गई थी। जिसे संवर्ग परिवर्तन नहीं कहा जा सकता। क्योंकि इसका न तो कोई शासनादेश है और न ही किसी नियमावली में प्राविधान।
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गुरुवार को डीजीपी मुख्यालय से जारी इस आदेश से रिवर्ट होने वाले पुलिसकर्मियों में भारी रोष है। 2008 से पूर्व पीएसी से नागरिक पुलिस में स्थानांतरण हो जाया करता था। इसके तहत कुल 932 पुलिसकर्मी सशस्त्र पुलिस बल से नागरिक पुलिस में आए।
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उनमें से 890 आरक्षी से मुख्य आरक्षी के पद पर प्रोन्नत हो गए। 6 को उप निरीक्षक के पद पर प्रोन्नति मिली, 22 आरक्षी के पद पर ही रहे और 14 की मृत्यु हो गई। उप निरीक्षक पद पर जिन्हें प्रोन्नति नहीं मिली उन्होंने अदालत का रुख किया।
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अदालत ने इस पर डीजीपी मुख्यालय से जवाब मांगा। वहीं, डीजीपी मुख्यालय ने इस स्थानांतरण के आदेश को ही गलत बता दिया। कहा कि पीएसी व नागरिक पुलिस दो अलग-अलग संवर्ग हैं। पूर्व में पीएसी से कुछ लोगों की ड्यूटी नागरिक पुलिस में लगाई गई थी। जिसे संवर्ग परिवर्तन नहीं कहा जा सकता। क्योंकि इसका न तो कोई शासनादेश है और न ही किसी नियमावली में प्राविधान।
नियम विरुद्ध प्रोन्नति
पूर्व में पीएसी के जवानों की नागरिक पुलिस में ड्यूटियां लगाई जाती रही हैं। इसी दौरान पीएसी के कुछ आरक्षियों को नियम विरुद्ध प्रोन्नति भी मिल गई। उन्हें पदावनत कर दिया गया है। साथ ही उन्हें उनके मूल कॉडर में वापस कर दिया गया है।
- पीयूष आनंद, एडीजी स्थापना
छुट्टी पर गए पुलिसकर्मी
सूत्रों का कहना है कि जिन पुलिसकर्मियों को वापस पीएसी में भेजा जा रहा है उनमें से अधिकतर छुट्टी पर चले गए हैं। वे अदालती लड़ाई की तैयारी में जुट गए हैं। रिवर्ट होने वालों का तर्क है कि इसमें उनकी क्या गलती है। स्थानांतरण तत्कालीन आईजी स्थापना के यहां से हुआ था। प्रोन्नति बोर्ड ने प्रोन्नति दी। इसकी जिम्मेदारी अफसरों की है न कि पुलिसकर्मियों की। अगर यह गलती हुई है तो किस अधिकारी की गलती से हुआ उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?
- पीयूष आनंद, एडीजी स्थापना
छुट्टी पर गए पुलिसकर्मी
सूत्रों का कहना है कि जिन पुलिसकर्मियों को वापस पीएसी में भेजा जा रहा है उनमें से अधिकतर छुट्टी पर चले गए हैं। वे अदालती लड़ाई की तैयारी में जुट गए हैं। रिवर्ट होने वालों का तर्क है कि इसमें उनकी क्या गलती है। स्थानांतरण तत्कालीन आईजी स्थापना के यहां से हुआ था। प्रोन्नति बोर्ड ने प्रोन्नति दी। इसकी जिम्मेदारी अफसरों की है न कि पुलिसकर्मियों की। अगर यह गलती हुई है तो किस अधिकारी की गलती से हुआ उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?