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एक ही छत के नीचे होगा हड्डी के सभी रोगों का निदान

Fri, 27 Nov 2020 01:20 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 27 Nov 2020 01:20 AM IST
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ortho related all treatment under one roof
चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने किया केजीएमयू में सेंटर फॉर ऑर्थोपेडिक सुपर स्पेशलिटीज की इमारत का शिलान्यास
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चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने बृहस्पतिवार को केजीएमयू में सेंटर फॉर ऑर्थोपेडिक सुपर स्पेशलिटीज की इमारत का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि यह इमारत चिविवि के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बनेगी। यहां बच्चों की हड्डी से संबंधित सभी समस्याओं का इलाज हो सकेगा। सेंटर के अंतर्गत दो विभाग, स्पोट्स मेडिसिन और पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक विभाग तथा दो समर्पित इकाइयां, ऑर्थोप्लास्टी यूनिट और स्पाइन सेंटर संचालित किए जाएंगे।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने इसके अलावा केजीएमयू में संविधान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में डॉक्टरों से अपील की कि वह मरीजों के प्रति अपनी जिम्मेेदारी को समझते हुए उन्हें चिकित्सीय सेवाएं मुहैया कराएं। कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. बिपिन पुरी ने कहा कि सेंटर फॉर ऑर्थोपेडिक सुपरस्पेशलिटीज का शिलान्यास एक नये अध्याय की शुरूआत है। केजीएमयू देश का अकेला ऐसा चिकित्सा विवि होगा जहां ऑर्थोपेडिक की चार सुपर स्पेशलिटीज की अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। इमारत में 6 तल और दो फ्लोर का बेसमेंट होगा। इसमें सारी जांचें एक ही स्थान पर हो सकेंगी। उन्होंने बताया कि कंस्ट्रक्शन और डिजाइन सर्विसेस तथा यूपी जल निगम इमारत का निर्माण कराएगी और इसकी अनुमानित लागत 86 करोड़ रुपये होगी। हर विभाग में 60 बेड की व्यवस्था होगी, जिसमें एचडीयू व आईसीयू बेड शामिल हैं। कार्यक्रम में न्याय मंत्री ब्रजेश पाठक, चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे और कई डॉक्टर मौजूद थे।
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कैंपस के निकट ही आवास
केजीएमयू की फैकल्टी के लिए कैंपस के पास ही आवास बनेगा। चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने कहा कि जल्द इस पर विचार कर निर्णय ले लिया जाएगा कि आवास कहां पर बनाए जाएं। आवास बनाने का प्रस्ताव न्याय मंत्री ब्रजेश पाठक ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री के समक्ष रखा, जिस पर उन्होंने हामी भरी।
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शुरुआती दस मिनट मरीज के लिए अहम
कुलपति डॉ. बिपिन पुरी ने कहा कि ट्रॉमा केयर में शुरूआती समय यानि प्लेटिनियम-10 मिनट मरीज की जान बचाने के लिए बहुत जरूरी हैं। कई बार इतने समय में मरीज अस्पताल नहीं पहुंच पाता। यदि केजीएमयू एवं उसके 5 किलोमीटर के दायरे में चिकित्सकों, ट्रैफिक पुलिस कर्मियों एवं एंबुलेंस कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाए तो मरीज की जान बचाना आसान होगा। मरीज को पहले ही प्राथमिक उपचार मिल जाएगा और पीडियाट्रिक ट्रॉमा के मामलों का और बेहतर तरीके से प्रबंधन हो सकेगा। केजीएमयू में पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी। नवजात शिशु जिन्हें जन्म से ही रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं, पैरों में टेढ़ापन तथा अन्य प्रकार की विकृतियां होती हैं उनका केजीएमयू में बेहतर ढंग से इलाज होता है। डॉ. पुरी ने कहा केजीएमयू निकट भविष्य में प्री-हॉस्पिटल पीडियाट्रिक ट्रॉमा केयर सर्विस को विकसित करने की परियोजना पर काम कर रहा है।
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