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मतदान अधिकारी के मौत मामले में डाक्टर विरुद्व केस दर्ज करने का आदेश
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गोंडा। लोकसभा चुनाव में पोलिंग पार्टियों के रवानगी के दिन जिला अस्पताल में भर्ती हुए मतदान अधिकारी बृजेश कुमार शुक्ल के मौत मामले में चिकित्सक की लापरवाही उजागर हो गई है। चार सदस्यीय चिकित्साधिकारियों की समिति की जांच में जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. टीपी जायसवाल की इलाज में शिथिलता की पुष्टि हुई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले में आरोपित चिकित्सक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश प्रभारी निरीक्षक कोतवाली नगर को दिया है। कोतवाल नगर आलोक राव ने कहा कि मामले की रिपोर्ट आदेश मिलने पर दर्ज की जाएगी।
डायट दर्जीकुआं में कार्यरत बृजेश शुक्ल की ड्यूटी लोकसभा चुनाव में मतदान अधिकारी के रूप में लगी थी। 6 मई को लोकसभा चुनाव होने से 5 मई को पोलिंग पार्टियों की रवानगी के लिए मतदान अधिकारी बृजेश कॉलेज परिसर में थे और वहां तबीयत खराब हो गई, वे बेहोश होकर गिर गए। मौके पर मौजूद एंबुलेंस से उन्हें बेहोशी हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनकी मौत हो गई, परिजनों ने आरोप लगाया कि चिकित्सक ने इलाज में लापरवाही की।
बेहोश होने के बाद भी मरीज को ऑक्सीजन नहीं लगाया गया। जिससे उन्हें बचाया नही जा सका। यही नहीं ऑक्सीजन लगाने के लिए एक हजार रुपये मांगे गए। रुपये न देने पर मरीज के साथ खिलवाड़ हुआ। मृतक के बड़े भाई आलोक शुक्ल ने बताया कि उन्होंने अनुरोध किया कि प्राइवेट अस्पताल के लिए रेफर कर दीजिए, लेकिन चिकित्सक मारपीट करने लगे और जेब में रखे 440 रुपये भी छीन लिए। भाई के गले से सोने की अंगूठी, चेन व उनके जेब से 1800 रुपये भी निकाल लिए। उन्होंने मामले में एफआईआर की मांग प्रशासन से की लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। चार सदस्यीय टीम जांच के लिए बनाई गई। जांच में मरीज के इलाज की पुष्टि हुई। इसके साथ ही मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मुकदमा दर्ज करने का आदेश कर दिया है।
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डायट दर्जीकुआं में कार्यरत बृजेश शुक्ल की ड्यूटी लोकसभा चुनाव में मतदान अधिकारी के रूप में लगी थी। 6 मई को लोकसभा चुनाव होने से 5 मई को पोलिंग पार्टियों की रवानगी के लिए मतदान अधिकारी बृजेश कॉलेज परिसर में थे और वहां तबीयत खराब हो गई, वे बेहोश होकर गिर गए। मौके पर मौजूद एंबुलेंस से उन्हें बेहोशी हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनकी मौत हो गई, परिजनों ने आरोप लगाया कि चिकित्सक ने इलाज में लापरवाही की।
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बेहोश होने के बाद भी मरीज को ऑक्सीजन नहीं लगाया गया। जिससे उन्हें बचाया नही जा सका। यही नहीं ऑक्सीजन लगाने के लिए एक हजार रुपये मांगे गए। रुपये न देने पर मरीज के साथ खिलवाड़ हुआ। मृतक के बड़े भाई आलोक शुक्ल ने बताया कि उन्होंने अनुरोध किया कि प्राइवेट अस्पताल के लिए रेफर कर दीजिए, लेकिन चिकित्सक मारपीट करने लगे और जेब में रखे 440 रुपये भी छीन लिए। भाई के गले से सोने की अंगूठी, चेन व उनके जेब से 1800 रुपये भी निकाल लिए। उन्होंने मामले में एफआईआर की मांग प्रशासन से की लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। चार सदस्यीय टीम जांच के लिए बनाई गई। जांच में मरीज के इलाज की पुष्टि हुई। इसके साथ ही मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मुकदमा दर्ज करने का आदेश कर दिया है।
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