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मुख्तार की भाभी का घर गिराने के मामले में आदेश सुरक्षित

Thu, 08 Oct 2020 01:27 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2020 01:27 AM IST
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Order secured in case of demolition
मुख्तार की भाभी का घर गिराने के मामले में आदेश सुरक्षित
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की भाभी का घर गिराने से रोकने की याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई पूरी करने के बाद आदेश सुरक्षित कर लिया है।
एलडीए की डालीबाग स्थित गाटा संख्या 93 के अपने मकान के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को लेकर मुख्तार अंसारी की भाभी फरहत अंसारी ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर किया था।
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इसके बाद बीते 29 सितंबर के एलडीए के फाइनल आदेश को चुनौती देते हुए अंसारी ने एक नई याचिका बीते एक अक्तूबर को दायर किया। कोर्ट ने दोनों याचिकाओं पर सुनवाई सात अक्तूबर को नियत की थी।
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न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ के समक्ष बुधवार को याचिकाओं पर पक्षों के वकीलों ने दलीलें पेश कीं।
याची ने इस प्रकरण में एलडीए और जिला प्रशासन की कार्रवाई को गलत बताते हुए हाईकोर्ट की शरण लेकर अपने घर को वैध निर्माण कहते हुए इसको गिराने पर रोक लगाए जाने की गुजारिश की है।
याची की तरफ से कहा गया था कि जिला प्रशासन जिन कानूनों के तहत करवाई कर रहा है, वे अब अस्तित्व में नहीं हैं। यह भी आरोप लगाया कि प्रशासनिक अफसरों ने रिपोर्ट मांगने की तारीख से पहले की तारीख की रिपोर्ट दी हैं, जो कानून की नजर में ठहरने लायक नहीं हैं।
एलडीए के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि बीते 31 अगस्त को जारी कारण बताओ नोटिस और उस पर पेश याची की आपत्तियों पर गौर करने के बाद एलडीए ने 29 सितंबर को फाइनल आदेश पारित किया है।
इस पर याची के वरिष्ठ अधिवक्ता एचजीएस परिहार ने कोर्ट को बताया कि 29 सितंबर के फाइनल आदेश को (जिसमें याची के मकान का मानचित्र एलडीए ने अस्वीकृत कर दिया है), याची ने बीते एक अक्तूबर को एक अन्य याचिका दायर कर चुनौती दिया है।

उधर, राज्य सरकार और एलडीए के वकीलों ने कार्यवाही को विधिक बताते हुए याचिकाओं का विरोध किया। परिहार के मुताबिक, अब कोर्ट मामले में फैसला सुनाएगा।
यह है मामला
दरअसल, पहले एक कमेटी का गठन किया गया था, जो डालीबाग में निष्क्रांत संपत्ति की जांच कर के उसके संबंध में अपनी रिपोर्ट दे रही थी। इस मामले में अब तक जो तथ्य जांच कमेटी के सामने आए हैं, उनमें करीब पांच एकड़ निष्क्रांत भूमि पर लगभग 15 बड़े निर्माण ध्वस्तीकरण के दायरे में हैं। इस रिपोर्ट पर सभी सदस्यों के दस्तखत हो चुके हैं। जल्द ही इस मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण को कार्रवाई भी करना संभव है। वहां की करीब पांच एकड़ भूमि, निष्क्रांत भूमि के दायरे में कही जा रही है।
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