गोरखपुर, फूलपुर के बहाने एक हुए गैर कांग्रेसी दल, समर्थन से सपा उत्साहित
गोरखपुर व फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के बहाने भाजपा के खिलाफ प्रदेश के गैर कांग्रेसी विपक्षी दल एक साथ आ गए हैं। बसपा व अन्य दलों के समर्थन से सपा कार्यकर्ता उत्साहित हैं। उनका पूरा जोर पिछड़ा, दलित व मुस्लिम समीकरण बनाने पर है। इसमें वे सफल होंगे या नहीं, यह तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन बसपा के रुख से चुनाव रोचक जरूर हो गया है।
सीएम योगी आदित्यनाथ व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से खाली हुईं गोरखपुर व फूलपुर संसदीय सीटों पर 11 मार्च को मतदान होगा। वोटों की गिनती 14 मार्च को होगी लेकिन अभी से चुनाव का गुणा-भाग लगाया जाने लगा है। बसपा ने रविवार को दोनों सीटों पर सपा उम्मीदवारों के समर्थन का एलान किया था।
सोमवार को राष्ट्रीय लोकदल ने भी सपा का समर्थन कर दिया। एनसीपी, निषाद पार्टी, पीस पार्टी, पीएमएसपी समेत कई अन्य छोटे दल सपा का पहले ही समर्थन कर चुके हैं। ऐसे में गोरखपुर व फूलपुर में भाजपा के खिलाफ गैर कांग्रेसी राजनीतिक दलों की लामबंदी हो गई है। लंबे समय बाद किसी चुनाव में विपक्ष इस तरह एकजुट दिखा है। यह 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता का ट्रेलर हो सकता है।
सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश
सपा और अन्य विपक्षी दल पूरी ताकत सामाजिक समीकरणों को साधने में लगा रहे हैं। जोर इस बात पर है कि पिछड़ों, दलितों व अल्पसंख्यकों का समीकरण मजबूत हो। हालांकि फूलपुर में सपा की तरह भाजपा का प्रत्याशी भी पिछड़े वर्ग के कुर्मी समाज से है। इससे कुर्मी वोटों में बंटवारे की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
गोरखपुर में भाजपा का प्रत्याशी ब्राह्मण है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के व्यक्तिगत प्रभाव के चलते पिछड़े वर्ग के मतदाताओं का बंटवारा होने की संभावना है। फूलपुर में बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद के चुनाव मैदान में उतरने से भी सपा के संभावित समीकरण को झटका लगा है।
वोटिंग बढ़ाने को भाजपा-सपा ने ताकत झोंकी
बदले सियासी हालात में उपचुनाव सत्तापक्ष और विपक्ष के लिए अहम हो गया है। उपचुनाव में कम मतदान की आशंका से उनकी बेचैनी बढ़ी हुई है। भाजपा और सपा ने वोटरों को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने के लिए बूथ स्तर पर प्लानिंग की है।
गोरखपुर में योगी प्राइड
गोरखपुर से वीर बहादुर सिंह के बाद योगी आदित्यनाथ एक साल पहले मुख्यमंत्री बने हैं। उनके सीएम बनने के बाद गोरखपुर जिले में बड़े पैमाने पर विकास कार्य शुरू हुए हैं। पिपराइच में नई चीनी मिल लगने जा रही है। योगी गोरखपुर से पांच बार सांसद रह चुके हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें जितने मत मिले, सपा-बसपा को मिलाकर भी उतने वोट नहीं मिल पाए थे। उनका सीएम होना और विकास कार्यों की शुरुआत भाजपा की बड़ी ताकत है।
फूलपुर में केशव के कौशल की परीक्षा
फूलपुर में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक रखी है। कई मंत्री, विधायक, प्रमुख नेता कैंप कर रहे हैं। इस सीट पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की प्रतिष्ठा दांव पर है। 2014 के लोकसभा चुनाव में केशव बड़े अंतर से विजयी हुए थे। उन्होंने भी क्षेत्र में कई विकास कार्य शुरू कराए हैं। केशव का डिप्टी सीएम व लोकनिर्माण मंत्री होना भी भाजपा के लिए लाभदायक हो सकता है लेकिन असली परीक्षा उनके रणनीतिक कौशल की होगी।