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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Opinion of astrologers on election: Shadow of Kalsarp Yoga, the path of Taurus-Scorpio people is not easy

यूपी चुनाव पर ज्योतिषियों की राय : कालसर्प योग की छाया, वृष-वृश्चिक वालों की राह आसान नहीं

Tue, 11 Jan 2022 10:19 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ
रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 11 Jan 2022 10:19 AM IST
सार

कई ज्योतिषियों का कहना है भाजपा को बहुमत मिलेगा, तो कई ने तमाम समस्याएं भी गिनाईं। इनका कहना है, 20 जनवरी तक का समय बहुत ज्यादा उथल-पुथल वाला रहेगा।

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Opinion of astrologers on election: Shadow of Kalsarp Yoga, the path of Taurus-Scorpio people is not easy
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा के साथ ही सत्ता शीर्ष को लेकर अटकलें और बढ़ गई हैं। देश की राजनीति के केंद्र उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री कौन होगा , सरकार किसकी बनेगी, इस सब पर हर खास-ओ-आम की नजर टिकी है। ज्योतिषियों की राय भी बंटी हुई है। कई ज्योतिषियों का कहना है भाजपा को बहुमत मिलेगा, तो कई ने तमाम समस्याएं भी गिनाईं। नक्षत्र गत्यान्वेषी डॉ. शंकर चरण त्रिपाठी, अखिल भारतीय विद्वत परिषद के महासचिव व ज्योतिषाचार्य डॉ. कामेश्वर उपाध्याय, मेरठ के ज्योतिषाचार्य विनोद पुरोहित, लखनऊ के ज्योतिषाचार्य पं. राधेश्याम शास्त्री और सप्तऋषि महर्षि सुषैन ने ग्रह-गोचर की चाल व ऊर्जा के संदेशों के आधार पर चुनाव परिणामों की भविष्यवाणी की है। इनका कहना है, 20 जनवरी तक का समय बहुत ज्यादा उथल-पुथल वाला रहेगा।

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नए क्षत्रप के भाग्योदय में भी बाधा, पुराने वाले को भी दिक्कत
अखिल भारतीय विद्वत परिषद के महासचिव ज्योतिषाचार्य डॉ. कामेश्वर उपाध्याय कहते हैं, जनवरी से मार्च तक चुनावी महीने हैं, जिस पर कालसर्प योग की जबरदस्त छाया है। इसका प्रभाव टिकट वितरण के साथ ही देखने को मिलने लगेगा। वृष और वृश्चिक राशि वालों की कुंडली में अगर राजयोग नहीं है, तो उनके लिए मुश्किलें होंगी। कुंभ राशि वाले लोगों पर शनि की साढ़े साती चल रही, जो सुख में बाधक है। फरवरी में राहु-मंगल का षडाष्टक योग बन रहा है, यह विस्फोटक होगा। पुराने चेहरे हारेंगे भी और कई टिकट से भी वंचित रहेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ के लिए चीेजें काफी बदलेंगी। उनके ग्रहयोग 2017 में ज्यादा बेहतर थे। आदित्य का अ और अखिलेश का अ, दोनों के आगे बढ़ने का संकेत हैं। कालसर्प योग ने पूर्ण बहुमत की ओर बढ़ते कदम बांध दिए हैं। दक्षिण व महाराष्ट्र का दखल प्रचार कार्य में भूमिका के कारण बढ़ जाएगा।
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भाजपा फिर सत्ता में आएगी
नक्षत्र गत्यान्वेषी डॉ. शंकर चरण त्रिपाठी कहते हैं, राहु धनु राशि में भ्रमण कर रहा है, यह संकट पैदा करेगा। योगी के मुख से निकले शब्द बुआ और बबुआ (जो 17 बार से अधिक बोला जा चुका है) में दो-दो ब हैं। बुआ में भी आ है और बबुआ में भी आ है। अ-आ की रचना 31 की संख्या है। 31 का मूलांक 4 है। मकर राशि के भारत में उत्तर प्रदेश को चार का लग्न भाव प्राप्त है। अत: योगी 31 बार अधिकतम, 13 बार न्यूनतम, अपने विपक्षियों पर प्रहार करेंगे।

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बुआ में उ की मात्रा लगी है, यह तीन की संख्या है। 31 में 3 घट जाएगा, तो एक बचेगा यानी मायावती भारतीय जनता पार्टी के नजदीक रहेंगी। दुर्भाग्यवश, बबुआ में भी छोटा उ है। इसके कारण बाइसिकिल यानी अखिलेश यादव 31 की संख्या रखते हैं, जो योगी आदित्यानाथ के 31 नंबर से मिलता है। यानी बाइसिकिल तगड़ी चोट देगी। लेेकिन, योगी का शनि छठे भाव का है। जो षडाष्टक योग बना रहा है, यानी मुस्लिमों के वोटों का बंटवारा होगा और वे योगी की तरफ झुकेंगे। अखिलेश यादव ने साल भर में 17बार से ज्यादा ‘ठोक’ शब्द का इस्तेमाल किया है। ठोक का उलटा होता है कठ यानी अपने ही द्वारा प्रस्तावित अस्थायी नीतियों को जनता के बीच में ले जाने के कारण 31 की संख्या उलट कर 13 हो जाती है।

 

गुंडा, माफिया बदमाश, जो कि एक नंबर है। यह एक आगे जुड़कर 113 बनाता है। इससे जनता में गलत संदेश जाएगा, जो इनको 113 की संख्या पर सिमटा देती है। बबुआ के दो ब, बुआ के एक ब यानी तीन ब मिलकर, तीन की संख्या 31 में से घटा देता है। योगी की अगुवाई में भाजपा करीब 300 सीटें जीतेगी। कांग्रेस मुसलमानों और स्त्रियों को अधिक मैदान में उतारेगी। बसपा को 12, 21, 39 और 48 तो  कांग्रेस को 9, 18, 27 सीटें मिल सकती हैं।

योगी सफलता की ओर

ज्योतिषाचार्य विनोद पुरोहित का कहना है कि योगी आदित्यनाथ की कुंडली में केतु की महादशा चल रही है और यही इनकी कुंडली में राजयोग का कारण है। इनके चतुर्थ भाव में केतु बैठा है। राजनीति और सत्ता का कारक राहु दशम भाव में बैठा है। इसलिए ग्रहगोचर इशारा सफलता की ओर कर रहे हैं, लेकिन इस बार स्थिति चुनौतीपूर्ण है। 2017 से तुलना करें तो ग्रह गोचर जितना बलवान उस वक्त थे, इस बार उनकी स्थिति थोड़ी कमजोर है। वहीं, अखिलेश यादव की कर्क लग्न की कुंडली है और उनकी भी केतु की महादशा चल रही है। दशम भाव में केतु के साथ सूर्य का योग बनना उनकी पकड़ को ढीली कर रहा है। अखिलेश सत्ता के निकट तो नहीं पहुंचेंगे।

पूर्ण बहुमत नहीं, सहारा लेकर बनेगी भाजपा की सरकार
सप्तऋषि ‘महर्षि’ सुषैन कहते हैं, भाजपा दोबारा सत्ता में आएगी। ग्रहों का गोचर कुछ ऐसा है कि यह कालखंड धर्म की पुन: स्थापना का वक्त है। जो पार्टी सनातन धर्म-संस्कृति को समझेगी, सरकार उसी की बनेगी। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी सहारा लेगी बहुजन समाज पार्टी का। रही बात योगी आदित्यनाथ की तो उनके केंद्र में रुख करने के आसार ज्यादा हैं, लेकिन कोई ऐसा चाहेगा नहीं। उत्तर प्रदेश के विभाजन के आसार भी बन रहे हैं।

योगी बनेंगे मुख्यमंत्री
लखनऊ निवासी ज्योतिषाचार्य राधेश्याम शास्त्री कहते हैं कि वर्तमान में केतु महादशा में शनि के अंतर में शनि का प्रत्यंतर 11 जनवरी से 16 मार्च 2022 तक एवं बुध का प्रत्यंतर 13 मई 2022 तक रहेगा। इसी दशा में चुनाव हो रहे हैं। महादशानाथ केतु चंद्र की राशि कर्क में, लग्नेश सूर्य के नवांश में, अंतर एवं प्रत्यन्तरनाथ शनि के नक्षत्र में बली हैं। चंद्र भी शनि की राशि कुंभ में तथा गुरु के नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद में बली हैं। अत: चुनाव में योगी को विजय प्राप्त होगी।

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