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एसजीपीजीआई में लीवर के मरीजों को आज से मिलेगा इलाज
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एसजीपीजीआई में हेलेटोलॉजी विभाग की ओपीडी शुक्रवार से शुरू हो रही है। सप्ताह में दो दिन सोमवार और शुक्रवार सुबह 9:30 बजे से 2:30 बजे तक ओपीडी में मरीज देखे जाएंगे।
यह ओपीडी संस्थान के निदेशक और देश के प्रसिद्ध हेपेटोलॉजिस्ट प्रोफेसर आरके धीमान के नेतृत्व में चलेगी। प्रोफेसर धीमान ने बताया कि संस्थान में हेपेटोलॉजी विभाग की स्थापना की जा चुकी है।
ओपीडी में यकृत के रोगियों को उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा दी जाएगी। संस्थान में यकृत से जुड़ी बीमारियों की जांच के लिए लैब की भी स्थापना की जा चुकी है।
मरीजों को पंजीकृत कर यकृत, गॉलब्लैडर और पैंक्रियास की बीमारियों का इलाज किया जाएगा। कुछ समय बाद उन मरीजों का भी पंजीयन किया जाएगा, जिन्हें लीवर प्रत्यारोपण की जरूरत है।
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लिवर प्रत्यारोपण के लिए शुरू की गई तैयारी
प्रोफेसर धीमान ने बताया कि संस्थान में नए सिरे से लिवर प्रत्यारोपण की तैयारी शुरू की गई है। मरीजों की काउंसिलिंग से लेकर प्रत्यारोपण के बाद उनकी देखरेख के माकूल इंतजाम किए जा रहे हैं। इसमें हेपेटोलॉजी विभाग के साथ ही दूसरे विभागों की टीम भी मदद करेगी। यहां जीवित और मृत दोनों तरह के डोनर से लिवर का लोब (लिवर का छोटा सा हिस्सा) लेकर सस्ती दर पर गंभीर मरीजों को राहत दिलाने का प्रयास है। गंभीर रूप से बीमार लिवर रोगियों के लिए लिवर आईसीयू की स्थापना की जा रही है। उसी तरह एल्ब्यूमिन वार्ड, एडवांस्ड लिवर डायरेक्टेड एंडोस्कोपी, हेपेटिक हीमोडायनेमिक लैबोरेटरी आदि सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।
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यह ओपीडी संस्थान के निदेशक और देश के प्रसिद्ध हेपेटोलॉजिस्ट प्रोफेसर आरके धीमान के नेतृत्व में चलेगी। प्रोफेसर धीमान ने बताया कि संस्थान में हेपेटोलॉजी विभाग की स्थापना की जा चुकी है।
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ओपीडी में यकृत के रोगियों को उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा दी जाएगी। संस्थान में यकृत से जुड़ी बीमारियों की जांच के लिए लैब की भी स्थापना की जा चुकी है।
मरीजों को पंजीकृत कर यकृत, गॉलब्लैडर और पैंक्रियास की बीमारियों का इलाज किया जाएगा। कुछ समय बाद उन मरीजों का भी पंजीयन किया जाएगा, जिन्हें लीवर प्रत्यारोपण की जरूरत है।
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लिवर प्रत्यारोपण के लिए शुरू की गई तैयारी
प्रोफेसर धीमान ने बताया कि संस्थान में नए सिरे से लिवर प्रत्यारोपण की तैयारी शुरू की गई है। मरीजों की काउंसिलिंग से लेकर प्रत्यारोपण के बाद उनकी देखरेख के माकूल इंतजाम किए जा रहे हैं। इसमें हेपेटोलॉजी विभाग के साथ ही दूसरे विभागों की टीम भी मदद करेगी। यहां जीवित और मृत दोनों तरह के डोनर से लिवर का लोब (लिवर का छोटा सा हिस्सा) लेकर सस्ती दर पर गंभीर मरीजों को राहत दिलाने का प्रयास है। गंभीर रूप से बीमार लिवर रोगियों के लिए लिवर आईसीयू की स्थापना की जा रही है। उसी तरह एल्ब्यूमिन वार्ड, एडवांस्ड लिवर डायरेक्टेड एंडोस्कोपी, हेपेटिक हीमोडायनेमिक लैबोरेटरी आदि सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।