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सिर्फ 10 फीसदी मरीजों को ही मिल पा रहा है ओपीडी में इलाज
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कोरोना का खौफ : अन्य रोगों से पीड़ित घर में रहकर ले रहे पुरानी दवाएं
जिनकी हालात गंभीर वही पहुंच रहे हैं इमरजेंसी में दिखवाने के लिए
राजधानी में कोरोना का असर अन्य रोगों से पीड़ित मरीजों पर भी पड़ रहा है। सामान्य की अपेक्षा इन दिनों सिर्फ 10 फीसदी को ही ओपीडी में इलाज मिल रहा है। ऐसे में तमाम मरीज पहले से चल रहीं दवाओं के सहारे कोरोना खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। जिनकी हालात गंभीर है, वही इमरजेंसी में पहुंच रहे हैं, लेकिन तीन दिन से इसकी हालत भी खराब है। केजीएमयू और लोहिया संस्थान में होल्डिंग एरिया फुल होने से 50 से ज्यादा नए मरीज लेने में समस्या हो रही है।
सामान्य दिनों में केजीएमयू में 10 हजार, लोहिया संस्थान में पांच हजार, पीजीआई में दो हजार, बलरामपुर अस्पताल में चार हजार, सिविल में तीन हजार मरीजों की ओपीडी होती थी। इसके अलावा सीएचसी व निजी अस्पताल में मरीज पहुंचते थे। इनकी संख्या करीब 35 हजार होती थी। अब स्थिति यह है कि सभी जगह मिलाकर करीब साढ़े तीन हजार मरीज देखे जा रहे हैं।
लोहिया, केजीएमयू और पीजीआई में सिर्फ कैंसर मरीजों की ओपीडी चल रही है। अन्य को टेलीमेडिसिन से परामर्श दिया जा रहा है। गंभीर मरीज इमरजेंसी के जरिये भर्ती करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन यहां भी कोविड मरीज ही निकल रहे हैं। इससे अन्य की भर्ती नहीं हो पा रही है।
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सिविल व बलरामपुर में गिरा ग्राफ
सिविल अस्पताल की ओपीडी में करीब तीन सौ मरीजों को देखा जा रहा है। बलरामपुर अस्पताल में मेडिसिन, बाल रोग विभाग, सर्जरी, एंटी रैबीज आदि की ओपीडी में चार से पांच सौ मरीज देखे जा रहे हैं। यही हाल प्राइवेट अस्पतालों का है। यहां भी पहले की तुलना में 10 फीसदी ही मरीज पहुंच रहे हैं। विभागवार स्थितियां देखें तो सिविल के मेडिसिन विभाग में 300 से ज्यादा मरीज आते थे। सोमवार को यहां करीब 35 मरीज ही पहुंचे। बलरामपुर में पांच सौ की अपेक्षा करीब 50 मरीज पहुंचे।
इमसरेंजी में सिर्फ गंभीर मरीज भर्ती
केस 1
गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभाग में सामान्य दिनों में केजीएमयू में पांच सौ मरीज, लोहिया संस्थान में दो सौ और पीजीआई में दो सौ मरीज देखे जाते थे। सोमवार को केजीएमयू में इमरजेंसी में पांच, लोहिया में तीन और पीजीआई में दो मरीजों को भर्ती किया गया है।
केस 2
यूरोलॉजी के मरीजों में सामान्य दिनों में केजीएमयू में दो सौ, लोहिया में 100, पीजीआई में 50 से 60 मरीज देखे जाते थे। सोमवार को तीनों संस्थानों को मिलाकर इमरजेंसी में सात मरीज देखे गए हैं।
मरीजों का दर्द
केस 1
बाराबंकी के विजय वर्मा का लोहिया संस्थान से किडनी का इलाज चल रहा था। वह पांच माह से डॉक्टर को नहीं दिखा पा रहे हैं। पहले से चल रही दवाएं ही ले रहे हैं। मंगलवार को इमरजेंसी पहुंचे तो पहले वाली दवाएं ही खाने की सलाह देकर लौटा दिया गया।
केस 2
सरोजनी नगर निवासी मुन्नू की केजीएमयू के मेडिसिन विभाग से दवा चल रही है। उन्हें शुगर, थायराइड सहित अन्य समस्याएं हैं। वे पांच माह से लगातार दवाएं खा रहे हैं, लेकिन चिकित्सक को दोबारा नहीं दिखा पा रहे हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
निजी अस्पतालों की ओपीडी चल रही है, लेकिन कोरोना के डर से मरीज ना के बराबर आ रहे हैं। अनुमान है कि पहले की अपेक्षा 10 फीसदी मरीज ही पहुंच रहे हैं। वह भी जिनकी समस्याएं बढ़ जा रही है। बाकी इंतजार कर रहे हैं।
डॉ. रमा श्रीवास्तव, अध्यक्ष आईएमए
संस्थान में ई-ओपीडी चल रही है। मरीजों को सलाह दी जा रही हैं। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को बेड की उपलब्धता के हिसाब से भर्ती किया जा रहा है।
प्रो. आरके धीमान, निदेशक पीजीआई
ओपीडी बंद होने से इमरजेंसी पर दबाव बढ़ता जा रहा है। हालत यह है कि होल्डिंग एरिया में पॉजिटिव आने वाले मरीजों को वार्ड में शिफ्ट करने में समस्या हो रही है। जैसे-जैसे बेड खाली होते हैं, यहां से मरीजों को शिफ्ट कराते हैं। तीन दिन से स्थितियां ज्यादा खराब हैं।
-डॉ. संतोष कुमार, सीएमएस, ट्रॉमा सेंटर, केजीएमयू
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जिनकी हालात गंभीर वही पहुंच रहे हैं इमरजेंसी में दिखवाने के लिए
राजधानी में कोरोना का असर अन्य रोगों से पीड़ित मरीजों पर भी पड़ रहा है। सामान्य की अपेक्षा इन दिनों सिर्फ 10 फीसदी को ही ओपीडी में इलाज मिल रहा है। ऐसे में तमाम मरीज पहले से चल रहीं दवाओं के सहारे कोरोना खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। जिनकी हालात गंभीर है, वही इमरजेंसी में पहुंच रहे हैं, लेकिन तीन दिन से इसकी हालत भी खराब है। केजीएमयू और लोहिया संस्थान में होल्डिंग एरिया फुल होने से 50 से ज्यादा नए मरीज लेने में समस्या हो रही है।
सामान्य दिनों में केजीएमयू में 10 हजार, लोहिया संस्थान में पांच हजार, पीजीआई में दो हजार, बलरामपुर अस्पताल में चार हजार, सिविल में तीन हजार मरीजों की ओपीडी होती थी। इसके अलावा सीएचसी व निजी अस्पताल में मरीज पहुंचते थे। इनकी संख्या करीब 35 हजार होती थी। अब स्थिति यह है कि सभी जगह मिलाकर करीब साढ़े तीन हजार मरीज देखे जा रहे हैं।
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लोहिया, केजीएमयू और पीजीआई में सिर्फ कैंसर मरीजों की ओपीडी चल रही है। अन्य को टेलीमेडिसिन से परामर्श दिया जा रहा है। गंभीर मरीज इमरजेंसी के जरिये भर्ती करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन यहां भी कोविड मरीज ही निकल रहे हैं। इससे अन्य की भर्ती नहीं हो पा रही है।
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सिविल व बलरामपुर में गिरा ग्राफ
सिविल अस्पताल की ओपीडी में करीब तीन सौ मरीजों को देखा जा रहा है। बलरामपुर अस्पताल में मेडिसिन, बाल रोग विभाग, सर्जरी, एंटी रैबीज आदि की ओपीडी में चार से पांच सौ मरीज देखे जा रहे हैं। यही हाल प्राइवेट अस्पतालों का है। यहां भी पहले की तुलना में 10 फीसदी ही मरीज पहुंच रहे हैं। विभागवार स्थितियां देखें तो सिविल के मेडिसिन विभाग में 300 से ज्यादा मरीज आते थे। सोमवार को यहां करीब 35 मरीज ही पहुंचे। बलरामपुर में पांच सौ की अपेक्षा करीब 50 मरीज पहुंचे।
इमसरेंजी में सिर्फ गंभीर मरीज भर्ती
केस 1
गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभाग में सामान्य दिनों में केजीएमयू में पांच सौ मरीज, लोहिया संस्थान में दो सौ और पीजीआई में दो सौ मरीज देखे जाते थे। सोमवार को केजीएमयू में इमरजेंसी में पांच, लोहिया में तीन और पीजीआई में दो मरीजों को भर्ती किया गया है।
केस 2
यूरोलॉजी के मरीजों में सामान्य दिनों में केजीएमयू में दो सौ, लोहिया में 100, पीजीआई में 50 से 60 मरीज देखे जाते थे। सोमवार को तीनों संस्थानों को मिलाकर इमरजेंसी में सात मरीज देखे गए हैं।
मरीजों का दर्द
केस 1
बाराबंकी के विजय वर्मा का लोहिया संस्थान से किडनी का इलाज चल रहा था। वह पांच माह से डॉक्टर को नहीं दिखा पा रहे हैं। पहले से चल रही दवाएं ही ले रहे हैं। मंगलवार को इमरजेंसी पहुंचे तो पहले वाली दवाएं ही खाने की सलाह देकर लौटा दिया गया।
केस 2
सरोजनी नगर निवासी मुन्नू की केजीएमयू के मेडिसिन विभाग से दवा चल रही है। उन्हें शुगर, थायराइड सहित अन्य समस्याएं हैं। वे पांच माह से लगातार दवाएं खा रहे हैं, लेकिन चिकित्सक को दोबारा नहीं दिखा पा रहे हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
निजी अस्पतालों की ओपीडी चल रही है, लेकिन कोरोना के डर से मरीज ना के बराबर आ रहे हैं। अनुमान है कि पहले की अपेक्षा 10 फीसदी मरीज ही पहुंच रहे हैं। वह भी जिनकी समस्याएं बढ़ जा रही है। बाकी इंतजार कर रहे हैं।
डॉ. रमा श्रीवास्तव, अध्यक्ष आईएमए
संस्थान में ई-ओपीडी चल रही है। मरीजों को सलाह दी जा रही हैं। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को बेड की उपलब्धता के हिसाब से भर्ती किया जा रहा है।
प्रो. आरके धीमान, निदेशक पीजीआई
ओपीडी बंद होने से इमरजेंसी पर दबाव बढ़ता जा रहा है। हालत यह है कि होल्डिंग एरिया में पॉजिटिव आने वाले मरीजों को वार्ड में शिफ्ट करने में समस्या हो रही है। जैसे-जैसे बेड खाली होते हैं, यहां से मरीजों को शिफ्ट कराते हैं। तीन दिन से स्थितियां ज्यादा खराब हैं।
-डॉ. संतोष कुमार, सीएमएस, ट्रॉमा सेंटर, केजीएमयू