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Lucknow News: विद्यार्थियों को नहीं लुभा पा रहे ऑनलाइन कोर्स, स्वयं नहीं हो रहा कारगर
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लखनऊ। समय के साथ विद्यार्थियों में तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, पर अब भी विद्यार्थियों को ऑनलाइन कोर्स नहीं भा रहे हैं। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की ओर से शुरू किए गए स्टडी वेब्स ऑफ एक्टिव-लर्निंग फॉर यंग एस्पायरिंग माइंड्स (स्वयं) पर मौजूद ऑनलाइन के कोर्स में विद्यार्थी दाखिला नहीं ले रहे हैं। राजधानी में सबसे ज्यादा छात्र संख्या वाले लखनऊ विश्वविद्यालय में अभी तक स्वयं पर एक भी पंजीकरण नहीं हुआ है।
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने विद्यार्थियों के लिए निशुल्क ऑनलाइन कोर्स की सुविधा देने के लिए वर्ष 2016 में स्वयं पोर्टल शुरू किया था। पोर्टल शुरू हुए नौ साल होने को हैं, लेकिन अब भी यह प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों को नहीं भाया है। इस प्लेटफॉर्म पर कम अवधि के कोर्स की भरमार है। स्वयं के कोर्स में दाखिला लेने के लिए शासन की ओर से लगातार जागरूकता फैलाई जा रही है। इसके बावजूद अब भी राजधानी में इसकी पंजीकरण संख्या न के बराबर ही है।
भाषा विश्वविद्यालय ने अनिवार्य किए 40 फीसदी क्रेडिट
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय ने अपने विद्यार्थियों के लिए 40 फीसदी क्रेडिट स्वयं पोर्टल से अनिवार्य किए हैं। हालांकि, अभी इसके विस्तृत नियम जारी होने हैं।
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इन वजह से विद्यार्थियों का मन नहीं मोह पा रहा स्वयं
- विश्वविद्यालय और स्वयं पोर्टल के माध्यम से मिलने वाले कोर्स में पास होने के नियम अलग-अलग हैं। विश्वविद्यालय में पास होने के लिए 33 फीसदी तो स्वयं पर 40 फीसदी न्यूनतम अंक लाना अनिवार्य है।
- ज्यादातर कोर्स निशुल्क हैं, लेकिन इनकी परीक्षा के लिए एक हजार रुपये लिए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर पर इन कोर्स की परीक्षा होने पर कोई शुल्क तय नहीं है, लेकिन एजेंसी के माध्यम से मूल्यांकन पर एक हजार रुपये फीस है। इस वजह से विश्वविद्यालय मूल्यांकन के लिए तैयार नहीं हैं और विद्यार्थी एक हजार रुपये देना नहीं चाहते हैं।
- पाठ्यक्रम की गुणवत्ता को लेकर विद्यार्थियों में संशय।
- जागरूकता का अभाव।
विद्यार्थियों पर नहीं डाल सकते दबाव
स्वयं पोर्टल पर मौजूद कोर्स के लिए किसी विद्यार्थी पर दबाव नहीं डाला जा सकता है। जैसे-जैसे विद्यार्थी इनके प्रति आकर्षित होंगे, वे दाखिला लेंगे।
- प्रो. गीतांजलि मिश्रा, डीन एकेडमिक्स, लविवि
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अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने विद्यार्थियों के लिए निशुल्क ऑनलाइन कोर्स की सुविधा देने के लिए वर्ष 2016 में स्वयं पोर्टल शुरू किया था। पोर्टल शुरू हुए नौ साल होने को हैं, लेकिन अब भी यह प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों को नहीं भाया है। इस प्लेटफॉर्म पर कम अवधि के कोर्स की भरमार है। स्वयं के कोर्स में दाखिला लेने के लिए शासन की ओर से लगातार जागरूकता फैलाई जा रही है। इसके बावजूद अब भी राजधानी में इसकी पंजीकरण संख्या न के बराबर ही है।
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भाषा विश्वविद्यालय ने अनिवार्य किए 40 फीसदी क्रेडिट
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय ने अपने विद्यार्थियों के लिए 40 फीसदी क्रेडिट स्वयं पोर्टल से अनिवार्य किए हैं। हालांकि, अभी इसके विस्तृत नियम जारी होने हैं।
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इन वजह से विद्यार्थियों का मन नहीं मोह पा रहा स्वयं
- विश्वविद्यालय और स्वयं पोर्टल के माध्यम से मिलने वाले कोर्स में पास होने के नियम अलग-अलग हैं। विश्वविद्यालय में पास होने के लिए 33 फीसदी तो स्वयं पर 40 फीसदी न्यूनतम अंक लाना अनिवार्य है।
- ज्यादातर कोर्स निशुल्क हैं, लेकिन इनकी परीक्षा के लिए एक हजार रुपये लिए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर पर इन कोर्स की परीक्षा होने पर कोई शुल्क तय नहीं है, लेकिन एजेंसी के माध्यम से मूल्यांकन पर एक हजार रुपये फीस है। इस वजह से विश्वविद्यालय मूल्यांकन के लिए तैयार नहीं हैं और विद्यार्थी एक हजार रुपये देना नहीं चाहते हैं।
- पाठ्यक्रम की गुणवत्ता को लेकर विद्यार्थियों में संशय।
- जागरूकता का अभाव।
विद्यार्थियों पर नहीं डाल सकते दबाव
स्वयं पोर्टल पर मौजूद कोर्स के लिए किसी विद्यार्थी पर दबाव नहीं डाला जा सकता है। जैसे-जैसे विद्यार्थी इनके प्रति आकर्षित होंगे, वे दाखिला लेंगे।
- प्रो. गीतांजलि मिश्रा, डीन एकेडमिक्स, लविवि