किसान कराहते रहे, अफसर दबाए बैठे रहे 1200 करोड़, बांटे सिर्फ 480 करोड़
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दो साल पहले ओला गिरने व बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों के राहत के नाम पर सूबे की तत्कालीन अखिलेश सरकार व केंद्र की मोदी सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप आपको याद ही होंगे। पर, किसानों की मदद के मामले में सरकारी मशीनरी के कामकाज की बेहद कड़वी और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है।
चालू वित्तीय वर्ष में अखिलेश सरकार की ओर से दिए गए करीब 1700 करोड़ रुपये में से 1200 करोड़ अफसर दबाए बैठे रहे। कुल सरकारी इमदाद की महज 26.38 फीसदी रकम ही किसानों को मिल सकी। आठ जिलों ने ही पूरी रकम खर्च की।
अब वित्तीय वर्ष खत्म होने को आया तो जिलाधिकारी बची रकम को वापस करने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं। मथुरा, कानपुर नगर, हापुड़ और हमीरपुर ने तो किसानों के इमदाद की रकम वापस भी कर दी है।
फरवरी, मार्च व अप्रैल 2015 में ओलावृष्टि व अतिवृष्टि किसानों की फसल पर आफत बनकर टूटी। किसान कराह उठे थे। किसानों की मदद के लिए केंद्र सरकार ने एकमुश्त 2801 करोड़ तो राज्य सरकार ने 2917 करोड़ रुपये मंजूर किए।
केंद्र व राज्य दोनों ही सरकारों ने दिए रुपये
प्रदेश सरकार ने अपने हिस्से के 2917 करोड़ रुपये में से 1699.71 करोड़ रुपये चालू वित्त वर्ष में दिए। अखिलेश को उम्मीद रही होगी कि गाढ़े दिन में किसानों की वह जिस तरह राज्य के खजाने से बढ़कर मदद और प्रचार कर रहे हैं, उससे चुनाव में किसान उनकी मदद करेंगे।
पर, जो हकीकत सामने आई है उसके मुताबिक दिए गए 1699.71 करोड़ रुपये में 20 मार्च तक सिर्फ 448 करोड़ 38 लाख 33 हजार रुपये ही किसानों में बांटे गए।
बाकी रकम वापस करने के लिए उन्नाव, ललितपुर, अमरोहा, चित्रकूट, बस्ती, सिद्धार्थनगर के जिलाधिकारियों ने राहत आयुक्त से मार्गदर्शन मांगा है।
सिर्फ आठ जिलों ने पूरी रकम खर्च की
अंबेडकरनगर, बागपत, बलिया, गौतमबुद्धनगर, कासगंज, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर ने ही पूरी रकम खर्च की।
लखनऊ ने तो एक पाई नहीं बांटी, बस्ती में 109 करोड़ सरेंडर की तैयारी
लखनऊ के डीएम ने किसानों की मदद के लिए 60.67 करोड़ रुपये सरकार से मांगे, और मिले भी। मगर पीड़ित किसानों को एक पाई भी नहीं बांटी। बस्ती को 169.98 करोड़ रुपये मिले थे, महज 27 करोड़ 97 लाख रुपये ही बांटे गए।
बस्ती के अफसर अब 109.65 करोड़ रुपये सरेंडर करने की जुगत भिड़ा रहे हैं। रायबरेली ने 100.54 करोड़ रुपये लिए थे। पर 16 करोड़ 72 लाख आठ हजार रुपये ही बांटे।
पता करेंगे क्यों नहीं बांटी गई राहत की रकम
मामले पर प्रमुख सचिव राजस्व अरविंद कुमार का कहना है कि रिपोर्ट से साफ है कि राहत वितरण में ज्यादातर जिलों ने रुचि नहीं ली। कुछ जिलों ने तो राशि सरेंडर भी कर दी है।
कुछ डीएम ने चुनाव से काम के प्रभावित होने की बात कही है। मैंने जिलाधिकारियों से कहा है कि किसानों को मदद सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वित्त वर्ष के बचे दिनों में राशि किसानों को बांटी जाए। वितरण के बाद यदि रकम बचती है तो 31 मार्च से पहले सरेंडर की जाए।