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निकाय चुनाव: पिछड़ा वर्ग आयोग ने मौजूदा कानूनों में बदलाव की सिफारिश की, आरक्षण में होगा बड़ा उलटफेर

Fri, 10 Mar 2023 12:32 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 10 Mar 2023 12:32 PM IST
सार

पिछड़ा वर्ग आयोग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई रिपोर्ट में चक्रानुक्रम आरक्षण में नियमों का पालन न करने की जानकारी दी है साथ ही चुनाव प्रक्रिया को फूलप्रूफ बनाने को लेकर भी कई सुझाव दिए गए हैं। 

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OBC Commission recommends big changes in laws for reservation.
- फोटो : amar ujala

विस्तार

नगर निकाय चुनाव में पिछड़ी जाति को आरक्षण देने के संबंध में उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में कई खामियों का जिक्र किया गया है। आयोग ने आरक्षण प्रक्रिया को फूलप्रूफ बनाने के लिए मौजूदा कानून में बदलाव के साथ कई महत्वपूर्ण सिफारिश की गईं हैं। 350 पेज की रिपोर्ट में ऐसी कई ऐसी सीटों का जिक्र है, जहां 30 साल से आरक्षण बदला ही नहीं गया। इन सीटों को एक ही जाति या श्रेणी के लिए आरक्षित किए जाने का खुलासा किया गया है।

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सूत्रों के मुताबिक आयोग द्वारा 2002 से 2017 की अवधि में कराये गए निकायों चुनावों में आरक्षण के लिए अपनाई गई प्रक्रिया का विश्लेषण किया गया है। इसमें आयोग ने पाया कि नगर निकाय अधिनियम में किए गए प्रावधान के मुताबिक मौजूदा चुनाव के लिए कराए गए रैपिड सर्वे और चक्रानुक्रम आरक्षण प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। आयोग ने निकाय चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया को फूलफ्रूफ बनाने के लिए मौजूदा कानून में बदलाव की भी सिफारिश की है।
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आयोग की रिपोर्ट में सबसे अधिक जोर चक्रानुक्रम आरक्षण प्रक्रिया के पालन पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चक्रानुक्रम व्यवस्था के तहत नियमानुसार क्रमशः अनसूचित जनजाति महिला, अनुसूचित जन जाति, अनुसूचित जाति महिला, अनूसचित जाति, पिछड़ा वर्ग महिला, पिछड़ा वर्ग और अंत में अनारक्षित महिला व अनारक्षित श्रेणी के लिए सीटों के आरक्षण देने का प्रावधान है, लेकिन पिछले 30 वर्षों के दौरान इस प्रक्रिया का पालन सही तरीके नहीं किए जाने की भी बात कही गई है।

आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वे के दौरान कई जिलों में यह भी देखने को मिला है कि कई ऐसी जातियां हैं, जिनकी आबादी अधिक होने के बाद भी उस जाति को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया है। आयोग ने अपनी सिफारिश में इन विसंगतियों की तरफ ध्यान देने और उन्हें दूर करने के लिए सुझाव दिए हैं। 1995 के बाद से हुए शहरी निकायों के चुनाव में अनारक्षित सीटों पर पिछड़ा वर्ग के लोगों के जीतकर आने के आंकड़ों का भी विश्लेषण किया गया है।

सीटों के आरक्षण में होगा बड़ा उलटफेर

आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद अब इसे कैबिनेट में मंजूरी दी जाएगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में आयोग की रिपोर्ट को मंजूरी दी जाएगी। प्रमुख सचिव नगर विकास अमृत अभिजात के स्तर से रिपोर्ट को कैबिनेट मंजूरी के लिए रखने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। इसके बाद रिपोर्ट की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को देते हुए यूपी में निकाय चुनाव कराने की अनुमति मांगी जाएगी।

सूत्रों का कहना है कि आयोग की रिपोर्ट के आधार पर सीटों के आरक्षण में बड़ा उलट-फेर होगा। नगर विकास विभाग ट्रिपल टेस्ट के आधार पर मेयर व अध्यक्ष की सीटों का नए सिरे से आरक्षण करेगा। सूत्रों का कहना है कि अनारक्षित कई सीटें ओबीसी के खाते में जा सकती हैं।

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