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कोविड मरीजों के लिए एंबुलेंस बढ़ीं मगर अन्य गंभीर रोगियों की मुसीबत, कोई टेंपो तो कोई रिक्शे पर लादकर पहुंच रहा अस्पताल
Fri, 24 Jul 2020 05:33 PM IST
ishwar ashish
हिमांशु अवस्थी, अमर उजाला, लखनऊ
हिमांशु अवस्थी, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 24 Jul 2020 05:33 PM IST
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टेंपो में लादकर मरीज को अस्पताल लाए परिजन।
- फोटो : amar ujala
केस-1
लखीमपुर खीरी के रहने वाले मो. इमरान (35) लिवर की गंभीर बीमारी से ग्रसित थे। तीमारदारों ने उन्हें बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया था। गुरुवार सुबह डॉक्टरों ने उन्हें केजीएमयू रेफर कर दिया। मरीज को ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस सेवा पर कॉल की। दो घंटे बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। वहीं अस्पताल ने भी गंभीर मरीज को शिफ्ट करने के लिए एंबुलेंस नहीं दी। ऐसे में तीमारदार मरीज को टेंपो में लादकर ट्रॉमा पहुंचे।
केस-2
डालीगंज निवासी विनोद (32) की गुरुवार सुबह अचानक हालत बिगड़ गई। तीमारदारों ने सरकारी एंबुलेंस सेवा पर कॉल किया, मगर वहां से एंबुलेंस नहीं मिल सकी। मरीज को टेंपो में लादकर अस्पताल लाया गया। इस दौरान मरीज की सांसें उखड़ रही थीं। उसे ऑक्सीजन स्पोर्ट की जरूरत थी।
ये मामले स्वास्थ्य विभाग की ध्वस्त व्यवस्था को आइना दिखा रहे हैं। एंबुलेंस न मिलने से मरीज परेशान हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना मरीजाें की शिफटिंग के लिए सरकारी एंबुलेंस रिर्जव कर ली हैं। ऐसे में इमरजेंसी सेवा में लगी एंबुलेंस का भी संकट खड़ा हो गया है।
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अन्य बीमारियों से पीड़ित गंभीर मरीजों को घंटों इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में मरीज ऑटो, टेंपो व रिक्शे पर लादकर अस्पताल पहुंचाए जा रहे हैं। इसपर अफसरों का दावा है कि सामान्य मरीजों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
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लखीमपुर खीरी के रहने वाले मो. इमरान (35) लिवर की गंभीर बीमारी से ग्रसित थे। तीमारदारों ने उन्हें बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया था। गुरुवार सुबह डॉक्टरों ने उन्हें केजीएमयू रेफर कर दिया। मरीज को ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस सेवा पर कॉल की। दो घंटे बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। वहीं अस्पताल ने भी गंभीर मरीज को शिफ्ट करने के लिए एंबुलेंस नहीं दी। ऐसे में तीमारदार मरीज को टेंपो में लादकर ट्रॉमा पहुंचे।
केस-2
डालीगंज निवासी विनोद (32) की गुरुवार सुबह अचानक हालत बिगड़ गई। तीमारदारों ने सरकारी एंबुलेंस सेवा पर कॉल किया, मगर वहां से एंबुलेंस नहीं मिल सकी। मरीज को टेंपो में लादकर अस्पताल लाया गया। इस दौरान मरीज की सांसें उखड़ रही थीं। उसे ऑक्सीजन स्पोर्ट की जरूरत थी।
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ये मामले स्वास्थ्य विभाग की ध्वस्त व्यवस्था को आइना दिखा रहे हैं। एंबुलेंस न मिलने से मरीज परेशान हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना मरीजाें की शिफटिंग के लिए सरकारी एंबुलेंस रिर्जव कर ली हैं। ऐसे में इमरजेंसी सेवा में लगी एंबुलेंस का भी संकट खड़ा हो गया है।
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अन्य बीमारियों से पीड़ित गंभीर मरीजों को घंटों इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में मरीज ऑटो, टेंपो व रिक्शे पर लादकर अस्पताल पहुंचाए जा रहे हैं। इसपर अफसरों का दावा है कि सामान्य मरीजों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
108 की 35 एंबुलेंस रिजर्व करने से बढ़ी मुसीबत
स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद 108 की 34 सामान्य एंबुलेंस व एक अत्याधुनिक एंबुलेंस कोविड मरीजों के लिए तो लगा दी, लेकिन अन्य गंभीर मरीजों को भूल गए। 108 की जिले की 44 एंबुलेंस हैं, जिनमें 35 कोविड में रिजर्व किए जाने के बाद सामान्य मरीजों की कॉल आने पर उन्हें जल्द एंबुलेंस नहीं मिल पा रही है। ऐसे में मरीज परेशान हैं।
छह एम्बुलेंस वीवीआईपी के लिए
छह एंबुलेंस स्वास्थ्य विभाग ने वीआईपी लोगों के लिए रिजर्व रखी हैं। वहीं सरकारी असपतालों में करीब 20 से अधिक एंबुलेंस अभी भी खड़ी हैं। सिविल अस्पताल की 8 में से पांच एंबुलेंस वीवीआईपी ड्यूटी में लगाई गई हैं। तीन एंबुलेंस मरीजों के लिए रखी गई हैं।
छह एम्बुलेंस वीवीआईपी के लिए
छह एंबुलेंस स्वास्थ्य विभाग ने वीआईपी लोगों के लिए रिजर्व रखी हैं। वहीं सरकारी असपतालों में करीब 20 से अधिक एंबुलेंस अभी भी खड़ी हैं। सिविल अस्पताल की 8 में से पांच एंबुलेंस वीवीआईपी ड्यूटी में लगाई गई हैं। तीन एंबुलेंस मरीजों के लिए रखी गई हैं।
कुल एंबुलेंस की संख्या
108 - 44 इमरजेंसी सेवा
102 - 34 जच्चा बच्चा की सेवा
अत्याधुनिक एम्बुलेंस - 04
हर दिन, दो सौ से अधिक कॉलें
इमरजेंसी पड़ने पर हर रोज करीब 200 से 300 लोग 108 कॉल सेंटर पर कॉल करके एंबुलेंस की मांग करते हैं। इसमें हादसे व बीमारी समेत अन्य शामिल होते हैं। ऐसे में बची 9 एंबुलेंस से पूरे जिले में सेवा दे पाना आसान नहीं होगा। वहीं प्रदेशभर से 108 के कॉल सेंटर पर हर रोज करीब 20 हजार कॉलें आती हैं। इसमे सात हजार से अधिक कॉल इमरजेंसी की होती हैं।
102 - 34 जच्चा बच्चा की सेवा
अत्याधुनिक एम्बुलेंस - 04
हर दिन, दो सौ से अधिक कॉलें
इमरजेंसी पड़ने पर हर रोज करीब 200 से 300 लोग 108 कॉल सेंटर पर कॉल करके एंबुलेंस की मांग करते हैं। इसमें हादसे व बीमारी समेत अन्य शामिल होते हैं। ऐसे में बची 9 एंबुलेंस से पूरे जिले में सेवा दे पाना आसान नहीं होगा। वहीं प्रदेशभर से 108 के कॉल सेंटर पर हर रोज करीब 20 हजार कॉलें आती हैं। इसमे सात हजार से अधिक कॉल इमरजेंसी की होती हैं।